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नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार, एमेजॉन प्राइम के भविष्य पर चिंता

नेहा अलावधी और शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली March 17, 2019

नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार और एमेजॉन प्राइम जैसे ओवर-द-टॉप (ओटीटी) प्लेटफॉर्म पर आपके पसंदीदा ओरिजनल कार्यक्रम का भविष्य अनिश्चित दिख रहा है। सरकार यदि अपनी ई-कॉमर्स नीति के मसौदे को बिना किसी संशोधन के मौजूदा स्वरूप में लागू करती है तो इनके भविष्य पर संकट के बादल छा जाएंगे। इस महीने के आरंभ में उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवद्र्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने मसौदा नीति पर हितधारकों से टिप्पणी आमंत्रित की थी जिसकी अंतिम तिथि को 23 फरवरी से बढ़ाकर 29 मार्च करने का निर्णय लिया था। हालांकि अंतिम तिथि को बढ़ाने की मांग करने वाले प्रमुख डिजिटल कंपनियों में नेटफ्लिक्स और हॉटस्टार शामिल हैं जिन्होंने डेटा, स्वामित्व और परिचालन नियमों को लेकर चिंता जताई है।
 
हालांकि मौजूदा मसौदा नीति में ई-कॉमर्स को जिस तरीके से परिभाषित किया गया है उस पर मुख्य तौर पर विरोध जताया गया है। इसमें ई-कॉमर्स की परिभाषा इलेक्ट्रॉनिक नेटवर्क के जरिये डिजिटल उत्पादों एवं सेवाओं सहित वस्तुओं की खरीदारी, बिक्री, विपणन अथवा वितरण करने वाले उपक्रम के तौर पर की गई है। ई-कॉमर्स में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर डीपीआईआईटी की ओर से जारी प्रेस नोट में भी इसका संकेत मिलता है। डीपीआईआईटी के प्रेस नोट 2 (2018) में कहा गया है कि यदि किसी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म विदेशी निवेश हासिल करता है तो वह अपने प्लेटफॉर्म पर बिकने वाले उत्पादों का स्वामित्व अथवा नियंत्रण हासिल नहीं कर सकता है।
 
उद्योग के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, 'वर्तमान मसौदा नीति में ई-कॉमर्स को जिस तरह परिभाषित किया गया है वह प्रेस नोट 2 पर भी लागू होगा। इससे सेवा कंपनियों के संदर्भ में ई-कॉमर्स नीति को लेकर उद्योग कहीं अधिक आशंकित है।' डीपीआईआईटी के एक अधिकारी ने कहा, 'मौजूदा नियमों के तहत नेटफ्लिक्स को भी एफडीआई की श्रेणी में रखा जाएगा क्योंकि उसके अधिकांश प्रोडक्शन अमेरिकी ओरिजनल कंपनी करती है।' हालांकि फ्लिपकार्ट और ई-कॉमर्स जैसी ई-मार्केटप्लेस ने खुद को केवल एक प्लेटफॉर्म कहते हुए प्रेस नोट 2 की पाबंदियों से खुद को बचाने की कोशिश की है। लेकिन ओटीटी कंपनियां खुद को कहीं अधिक जटिल स्थिति में फंसी हुई महसूस कर रही हैं। सूत्रों ने बताया कि मसौदा नीति में दी गई सेवाओं की परिभाषा के दायरे में ओयो, ओला और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां भी होंगी।
 
डीपीआईआईटी के अधिकारी ने कहा, 'टीवी कार्यक्रम, फिल्म एवं डॉक्युमेंटरी के रूप में डिजिटल सामग्रियों को इन ओटीटी की इन्वेंटरी के तौर पर वर्गीकृत किया गया है और हमने इन कंपनियों को इसकी सूचना दे दी है।' इसका मतलब साफ है कि ओटीटी को भारत में अपने ओरिजनल प्रोडक्शन के प्रसारण की अनुमति संभवत: नहीं होगी।  नेटफ्लिक्स लगातार कहती रही है कि वह अन्य स्टूडियो को सामग्री तैयार करने के लिए लाइसेंस देने के बजाय अपनी अधिकतर परियोजनाओं को आंतरिक तौर पर ही तैयार करना चाहती है। इसी प्रकार, एमेजॉन प्राइम अपनी एमेजॉन स्टूडियो इकाई के जरिये सामग्री तैयार करती है। यूट्यूब और ऐपल भी ऐसा ही करती है। भारत में सबसे अधिक डाउनलोड किए जाने वाले ओटीटी हॉटस्टार ने भी पिछले साल ओरिजनल सामग्री तैयार करने के लिए 120 करोड़ रुपये का बजट बनाया था। ये प्लेटफॉर्म विभिन्न प्रोडक्शन हाउसों को सामग्री तैयार करने के लिए लाइसेंस देते हैं लेकिन ओरिजनल सामग्री उन्हें बौद्धिक संपदा पर बेहतर नियंत्रण देती हैं। नेटफ्लिक्स, एमेजॉन प्राइम और हॉटस्टार ने इस मुद्दे पर टिप्पणी के लिए भेजे गए मेल का कोई जवाब नहीं दिया।
 
खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर अतुल पांडे ने कहा, 'यदि ये प्लेटफॉर्म भारत में अपने प्रसारण के लिए लाइसेंसिंग मॉडल पर काम कर रहे हैं तो सामग्री को इन्वेंटरी नहीं माना जाएगा। लेकिन यदि वे सामग्री के मालिक भी हैं तो उस पर प्रस्तावित ई-कॉमर्स नियम लागू होंगे।' उन्होंने कहा कि ओटीटी को नई नीति के प्रभावी होने की तिथि से तीन साल के भीतर ई-कॉमर्स नीति में वर्णित डेटा-स्थानीयकरण मानदंडों का भी पालन करना होगा।
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