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स्वास्थ्य सेवा का मिलेगा अधिकार: राहुल

अर्चिस मोहन /  March 16, 2019

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि लोकसभा के लिए उनकी पार्टी के घोषणापत्र में सबके लिए स्वास्थ्य के लिए न्यूनतम गारंटी का अधिकार शामिल किया जाएगा। कांग्रेस ने कहा कि पार्टी मरीजों के लिए सार्वजनिक अस्पताल को पहला विकल्प बनाना चाहती है और यह स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। 

पिछले महीने से ही कांग्रेस अध्यक्ष ने अपनी जनसभाओं में घोषणापत्र के प्रमुख वादों की घोषणा करनी शुरू कर दी है। इनमें गरीबों के लिए न्यूनतम आय गारंटी, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) में सुधार करना, केंद्र सरकार की नौकरियों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण और शहरी क्षेत्र की झुग्गी-झोपडिय़ों में रहने वाले लोगों के लिए किफायती आवास देने का वादा शामिल है। 

रायपुर में मेडिकल क्षेत्र के पेशेवरों को संबोधित करते हुए राहुल ने नरेंद्र मोदी सरकार की आयुष्मान भारत स्वास्थ्य योजना की आलोचना की जिसकी जिम्मेदारी उनके मुताबिक देश के 15-20 चुनिंदा कारोबारियों को सौंप दी गई है। उन्होंने कहा, 'हम स्वास्थ्य सेवा अधिकार कानून पर विचार करेंगे जिसके तहत सभी भारतीयों को न्यूनतम स्वास्थ्य सेवा की गारंटी दी जा सकती है। हम स्वास्थ्य सेवा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3 फीसदी पर लाने और डॉक्टरों तथा स्वास्थ्य सेवा से जुड़े पेशेवरों की तादाद बढ़ाने पर विचार करेंगे।'

कांग्रेस शिक्षा के लिए जीडीपी का 6 फीसदी हिस्सा आवंटित करने और शिक्षा से जुड़े एक राष्ट्रीय आयोग का गठन करने का वादा कर सकती है। पार्टी अपने घोषणापत्र में शिक्षा के अधिकार कानून के तहत सार्वभौमिक माध्यमिक शिक्षा का वादा करने के साथ ही समाज के पिछड़े वर्ग के लिए अंग्रेजी माध्यम की शिक्षा देने पर जोर दे सकती है।

कांग्रेस घोषणापत्र समिति के सदस्य एम वी राजीव गौड़ा ने बताया कि स्वास्थ्य सेवा के अधिकार में सबको इलाज कराने, दवाएं लेने, और अस्पताल में भर्ती होने की सेवाएं शामिल हैं। गौड़ा ने कहा, 'हमारा जोर स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने पर है न की बीमा देने पर। हम चाहते हैं कि मरीजों के लिए सार्वजनिक अस्पताल प्रथम विकल्प बने और लोगों की मोटी रकम स्वास्थ्य सेवाएं लेने में खर्च न हो जिसकी वजह से हर साल लाखों लोगों की आर्थिक स्थिति और खराब होती जाती है।'

इस महीने के आखिर में विपक्षी दल अपना सामान्य एजेंडा जारी करने के लिए तैयार हैं। कई संगठनों, अकादमिक जगत के लोगों, हिस्सेदारों ने कांग्रेस द्वारा आयोजित विचार-विमर्श के सत्र में योगदान दिया जिसे समृद्ध भारत ट्रस्ट, रिक्लेमिंग दि रिपब्लिक और 'वादा न तोड़ो अभियान' ने संचालित किया। 

कांग्रेस अपने घोषणापत्र में कृषि जोत की उच्चतम सीमा कानून को सख्ती से लागू करने, अतिरिक्त भूमि का हस्तांतरण भूमिहीन गरीबों और दलितों को करने, भूमि अधिकार महिलाओं को देने पर विचार कर रही है। महिलाओं के समूह ने महिला किसान अधिकार विधेयक 2011 का प्रस्ताव रखा था जिसे राज्य सभा में मशहूर कृषि विशेषज्ञ एम एस स्वामीनाथन ने 2011 में पारित करने के लिए पेश किया था ताकि कृषि क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं को महिला किसान का प्रमाणपत्र मिल सके। यह भी प्रस्ताव है कि राज्य को महिलाओं के नाम पंजीकृत प्रॉपर्टी के लिए ट्रांसफर फीस और स्टैंप शुल्क में छूट दी जानी चाहिए।

रोजगार संकट का हल करने के लिए कांग्रेस के घोषणापत्र में एक औद्योगिक नीति के प्रति प्रतिबद्धता जताई जा सकती है ताकि विनिर्माण, निर्माण, पर्यटन, बैंकिंग, बीमा, पेंशन, दूरसंचार, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र की नौकरियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। समृद्ध भारत ट्रस्ट ने चुनावी सुधार का प्रस्ताव रखा है जिसमें चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राष्ट्रपति के द्वारा प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और मुख्य न्यायाधीश के द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर की जानी चाहिए। पार्टी बैंकिंग सुधार और मीडिया में सुधार का प्रस्ताव भी अपने घोषणापत्र में कर सकती है जिसके लिए भारतीय प्रेस परिषद को नियामकीय शक्तियां दी जाएंगी।
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