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डेवलपरों की मुनाफाखोरी की होगी जांच

इंदिवजल धस्माना और करण चौधरी / नई दिल्ली March 15, 2019

राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण (एनएए) को रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ बड़े शहरों से कई शिकायतें मिली हैं, जिनमें कहा गया है कि वे वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का लाभ ग्राहकों को नहीं दे रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जीएसटी परिषद द्वारा इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) खत्म करने और निर्माणाधीन मकानों पर कर की दरें कम करने के के बाद से एनएए को शिकायतें बढ़ी हैं। 

यह शिकायतें मुंबई, दिल्ली, गुरुग्राम, अहमदाबाद, बेंगलूरु, चेन्नई और कोलकाता के साथ अन्य शहरों में दर्ज कराई गई हैं, जहां कथित रूप से मकान के खरीदारों को जीएसटी का फायदा देने से इनकार किया गया है। पिछले महीने परिषद ने निर्माणाधीन फ्लैटों पर जीएसटी दर मौजूदा 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत करने का फैसला किया था, जिनके दाम 45 लाख से ऊपर हैं। इसके अलावा सस्ते मकानों पर जीएसटी मौजूदा 8 प्रतिशत से कम करके 1 प्रतिशत करने का फैसला किया गया, जो रियल एस्टेट पर बनी मंत्रिमंडल की समिति की सिफारिश से भी कम है। इन दोनों स्थितियों में बिल्डर नए ढांचे के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर सकेंगे। 

विशेषज्ञों ने कहा कि एनएए को आगे शिकायतें और बढ़ेंगी क्योंकि मुनाफे की राशि की गणना को लेकर कोई साफ तरीका नहीं बताया गया है। बिल्डरों को आईटीसी खत्म होने का घाटा उठाना होगा, जबकि अंतिम उपभोक्ताओं को कर कम करने का लाभ देना होगा। बिल्डरों के मुताबिक ग्राहक चाहते हैं कि जीएसटी में हुई कटौती का पूरा लाभ उन्हें दिया जाए। 

दिल्ली उच्च न्यायालय में एनएए के खिलाफ मुकदमा लड़ रही पिरामिड इन्फ्राटेक के वकील और खेतान ऐंड कंपनी के पार्टनर अभिषेक रस्तोगी ने कहा, 'मुनाफाखोरी रोधी जांच के दायरे में आने वाले बिल्डरोंं को संभवत इच्छित राहत नहीं मिलेगी। इसकी वजह यह है कि घोषणा के बावजूद जीएसटी परिषद ने यह साफ नहीं किया है कि मुनाफे की गणना का तरीका क्या है।' 

उन्होंने कहा कि 1 अप्रैल के बाद किस्तों पर जो कर लगेगा, उसमें बिल्डर घाटे की पूर्ति करने की कोशिश करेंगे, जो उन्हें देने से इनकार कर दिया गया है। मकान के खरीदार संभवत: इससे सहमत नहींं होंगे। रस्तोगी ने कहा, 'इसकी वजह से मुनाफाखोरी रोधी विवाद खड़ा हो सकता है।' 

एनएए ने पिरामिड इन्फ्रास्ट्रक्चर से कहा है कि वह 2,476 खरीदारों की किस्त में से 8.22 करोड़ रुपये कम करे या उन्हें पैसे वापस करे, क्योंकि उसने आईटीसी का लाभ गुरुग्राम की 2 सस्ती आवासीय परियोजनाओं में नहीं दिया है। प्राधिकरण ने यह भी कहा है कि कंपनी हर खरीदार को धन प्राप्त करने की तिथि से 18 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज का भुगतान करे। कंपनी इस आदेश के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय पहुंच गई है। कंपनी ने कहा है कि यह परियोजना समय से जुड़ी थी, न कि निर्माण से, जिस आधार पर एनएए ने गणना करके जुर्माना लगाया है। उच्च न्यायालय ने एनएए के फैसले पर रोक लगा दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी।

रियल एस्टेट संगठन नारेडको के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि बहरहाल मकान के कई खरीदारों ने अप्रैल तक के लिए ईएमआई रोक दिया है, जब नई घोषित दरें लागू होंगी। इनपुट के मसले से काले धन के सृजन पर भी असर पड़ सकता है। रियल एस्टेट पर बनी मंत्रियों की समिति ने सिफारिस की थी कि भवन निर्माण में काम आने वाली कम से कम 80 प्रतिशत सामग्री की खरीद संगठित डीलरों से की जानी चाहिए, जिससे इस समस्या से निपटा जा सके। परिषद 19 मार्च को होने वाली अगली बैठक में इस मसले पर चर्चा करेगी।
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