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स्वैप ऑक्शन में उलझे करेंसी डीलर

अनूप रॉय और अभिजित लेले / मुंबई 03 14, 2019

नकदी का नया विकल्प

26 मार्च को नीलामी के माध्यम से पेश की जाएगी स्वैप ऑक्शन की सुविधा
इसके  माध्यम से रिजर्व बैंक ने दिया है नकदी का विकल्प
मुद्रा बाजार की इस मामले में अलग अलग राय 
नीलामी की सफलता को लेकर संदेह

बिजनेस स्टैंडर्ड स्वैप ऑक्शन में उलझे करेंसी डीलरभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चुनिंदा बैंकरों के साथ एक सप्ताह लंबी चली बातचीत के बाद बुधवार शाम को बैंकों के लिए 5 अरब डॉलर की स्वैप सुविधा पेश की, जिससे नकदी का स्थायी सुविधा मिल सके।  26 मार्च को एक नीलामी के माध्यम से 3 साल के स्वैप की सुविधा मिलेगी। इसका मकसद यह है कि जांचे परखे और आजमाए हुए खुले बाजार के परिचालन (ओएमओ) के अलावा नकदी प्रबंधन के और भी तरीके पेश किए जाएं, जिसके तहत केंद्रीय बैंक द्वितीयक बाजार से बॉन्ड की खरीद और बिक्री करता है।

नीलामी में रिजर्व बैंक छोटे शुल्क (फॉरवर्ड प्रीमियम) के लिए स्पॉट डॉलर स्वीकार करेगा और उसके बाद 3 साल तक डॉलर मुहैया कराने की प्रतिबद्धता जताएगा। ऐसा करने में रिजर्व बैंक जोखिम लेगा कि अगर रुपये के मुकाबले डॉलर मजबूत होता है तब भी वह डॉलर मुहैया कराएगा। ऐसे में इससे रिजर्व बैंक को संभवत: ज्यादा प्रीमियम मिलने और बैंकोंं को कम प्रीमियम की पेशकश करने की सुविधा मिल सकेगी। बोली के आधार पर केंद्रीय बैंक कट-ऑफ प्रीमियम का फैसला कर सकेगा। मार्केट डीलर नहीं समझ पा रहे हैं कि ऐसा क्यों किया गया है, जबकि हकीकत यह है कि बैंकों के पास संभवत: बिक्री करने या गिरवी रखने के लिए पर्याप्त बॉन्ड नहीं हैं। बाजार में यह भी एक मत चल रहा है कि मार्च के अंत तक कुछ बड़ा प्रवाह आ सकता है, लेकिन अब तय यह आम लोगों की जानकारी में नहीं है क्योंकि बैंकरों का कहना है कि केंद्रीय बैंंक ने इस सुविधा को लेकर बैंकों के साथ कम से कम एक सप्ताह तक चर्चा की है।

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) और अग्रिम कर जमा किए जाने से व्यवस्था में 2.5 लाख करोड़ डॉलर नकदी कम होगी। लेकिन इसका प्रबंधन हो सकता है क्योंकि अप्रैल से सरकार का धन व्यवस्था में आ जाएगा। इसके साथ ही मार्च वित्तीय वर्ष का अंतिम महीना है और नकदी की कमी होने पर बॉन्ड यील्ड में कोई तेजी आने की स्थिति में बैंकों को मार्केट-टु-मार्केट नुकसान उठाना पड़ेगा।  एक बड़े सरकारी बैैंंक के कोषागार प्रमुख ने कहा कि कम अवधि के लिए नकदी के संकट के कारण पहले ही भारी जमा (2 करोड़ रुपये और इससे ऊपर)पर ब्याज दरें 60 से 70 आधार अंक बढ़ाना पड़ा है। 

बैंक आफ इंडिया के प्रबंध निदेशक और सीईओ दीनबंधु महापात्र ने पुष्टि की कि, 'कुछ समय से जमा पर ब्याज दरें बढ़ रहीहैं। मार्च में नकदी की आपूर्ति कम है।' बहरहाल स्वैप ऑक् शन की सफलता को लेकर बाजार के हिस्सेदारों की राय अलग अलग है। उनका कहना है कि विशेष डॉलर जमा योजना की अनुपस्थिति में संभवत: बैंकों के पास तैयार धन नहीं होगा, जैसा कि 2013 में हुआ था।  हालांकि इसे स्वागतयोग्य कदम माना जा रहा है। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज प्राइमरी डीलरशिप लिमिटेड के शोध प्रमुख ए प्रसन्ना ने कहा, 'इस कदम से नकदी प्रबंधन का नया तरीका सामने आया है और यह स्वागतयोग्य है। मार्च के आधिर में ओएमओ सपोर्ट की कमी की चिंता से भी इसकी वजह से मुक्ति मिलेगी, जब रिजर्व बैंक पहले ही बहुत ज्यादा ओएमओ विकल्प दे चुका है।' 

प्रसन्ना ने कहा कि  इसका कोई महत्त्व नहीं है कि 26 मार्च की नीलामी सफल होती है या नहीं, क्योंकि इससे कई मकसद पूरे हो रहे हैंं। प्रसन्ना ने कहा, 'यह एक नीलामी है। व्यवस्था से जो सुविधा मिल सकती है, वह मुहैया करा रही है। निकट भविष्य में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा आने की संभावना हैं।' 
Keyword: RBI, currency, dealer,,
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