बिजनेस स्टैंडर्ड - पुरानी काशी में बिजली की नई कहानी
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पुरानी काशी में बिजली की नई कहानी

पावर ग्रिड ने वाराणसी में सबसे पुराने इलाके का नवीनीकरण किया, बाकी के काम में भी दिखी रफ्तार
श्रेया जय /  03 14, 2019

काम का दायरा

ग्राहकों के लिए कनेक्शन: 60,000
लटक रहे तारों को भूमिगत केबल में तब्दील करने का काम: 1510 किलोमीटर
हेरिटेज रोड: 20
सब स्टेशन: नई 2, 9 की क्षमता में बढ़ोतरी
परियोजना की लागत: 431.96 करोड़ रुपये
भारत सरकार का अनुदान: 259.2 करोड़ रुपये
पीयूवीएनएनएल का योगदान (10 फीसदी)+ऋण : 172.8 करोड़ रुपये
क्रियान्वयन की लागत: 362.5 करोड़ रुपये

बिजनेस स्टैंडर्ड पुरानी काशी में बिजली की नई कहानीवाराणसी के दशाश्वमेध घाट को जाने वाली सड़क पर चलने के लिए एक इंच खाली जगह नहीं है। लोग, रिक्शॉ, मोटरसाइकिल और गाय सभी एक ही रफ्तार से चल रहे हैं। लेकिन व्यक्ति के सिर से ऊपर का नजारा बिल्कुल अलग है। कोई बिजली का तार ढीला नहीं लटक रहा है, किसी बिजली के खंभे पर जंग नजर आ रही है और न ही लाइटें कभी जलती या बुझती नजर आ रही हैं और न ही  खस्ताहाल ट्रांसफॉर्मर नजर आ रहे हैं।  घाटों के आसपास के 8 किलोमीटर के क्षेत्र और विशेष रूप से 2 किलोमीटर भीतर पुरानी काशी का क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में अनुकरणीय सुधार हुआ है। उत्तर प्रदेश में ऐसा पहली बार हुआ है। इसका श्रेय केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया को दिया जाना चाहिए। आम तौर पर आईपीडीएस या शहरी बिजली सुधार योजना का क्रियान्वयन राज्य की विद्युत वितरण कंपनी करती है। 

आईपीडीएस के कार्यों में विद्युत वितरण नेटवर्क का नवीनीकरण करना, ट्रांसफॉर्मर और उपभोक्ता स्तर पर 100 फीसदी मीटर लगाना, भूमिगत केबल और स्मार्ट मीटर आदि शामिल हैं। अधिकारियों ने नाम न प्रकाशित करने का आग्रह करते हुए कहा कि यह शहर प्रधानमंत्री का संसदीय क्षेत्र है, इसलिए उन्होंने पीयूवीएनएल को मदद दी। यहां काम की केंद्रीय मंत्रालय सीधे निगरानी कर रहे हैं। वाराणसी को बिजली सुधारों का मॉडल शहर बनाया जाएगा।  वर्ष 2017 में बिजली वितरण कंपनी पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीयूवीएनएल) ने पुरानी काशी के लिए सलाहकार का अनुबंध पावर ग्रिड को दिया था। केईसी इंटरनैशनल को प्रतिस्पर्धी बोली के जरिये ठेकेदार चुना गया।

ईईएसएल लिमिटेड ने पूरे शहर में पुराने दौर की स्ट्रीट लाइट लगाई हैं। यह परियोजना 432 करोड़ रुपये की है, जिसमें 20 पुरानी सड़कें, करीब 54,000 उपभोक्ताओं समेत 14 कॉलोनी शामिल हैं। आईपीडीएस योजना के तहत परियोजना की 60 फीसदी लागत केंद्र मुहैया कराएगा। शेष लागत के लिए पीयूवीएनएल ने विद्युत वित्त निगम (पीएफसी) से कर्ज लिया है। पीएफसी आईपीडीएस के लिए नोडल एजेंसी है। पावर ग्रिड की सलाह फीस 50 करोड़ रुपये थी, जिसे उसने छोड़ दिया और इसे अपने सीएसआर में शामिल कर दिया। 

पुरानी काशी में शहर के आकर्षण का मुख्य केंद्र है, जहां दशाश्वमेध, मणिकर्णिका जैसे घाट, काशी विश्वनाथ मंदिर और गोदोलिया, भेलूपुर, मैदागिन जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके हैं। पावर ग्रिड के लिए यह ऐसी दूसरी परियोजना है। पहली परियोजना गोवा में थी। पावर ग्रिड के वरिष्ठ महाप्रबंधक वी एन सिंह ने कहा, 'पावर ग्रिड 33 किलोवाट से कम की परियोजनाएं यानी घरों में कनेक्शन देने का काम  अपने हाथ में नहीं लेती है, इसलिए यह एक चुनौती थी। हमें जिस क्षेत्र में काम करना था, उसका ढांचा भी एक चुनौती था।'  उदाहरण के लिए मणिकर्णिका घाट में घाट को जाने वाली सड़क बहुत संकरी है। अन्य श्मशान घाटों की तरह यह घाट भी 24घंटे चालू रहता है। एक कर्मचारी ने कहा, 'हमारे पास निर्माण के लिए मध्य रात्रि के बाद 20 मिनट का समय होता था, इसलिए हम रोजाना उन 20 मिनट में एक मीटर खुदाई करते थे और केबल डाल देते थे।'

इस परियोजना के लिए पावर ग्रिड के करीब 50 अधिकारियों, पीएफसी के 5 अधिकारियों और केईआई के 50 कर्मचारियों को वाराणसी में तैनात किया गया था। केईआई के एक कर्मचारी ने कहा कि इसकी परियोजना की डेडलाइन दो साल थी और रोजाना नई चुनौती होती थी। उन्होंने कहा, 'कई बार वीवीआईपी आते थे या किसी त्योहार पर भीड़ जुटने की वजह से स्थानीय प्रशासन काम रोक देता था। हमें मंदिरों, मस्जिदों आदि के आसपास खुदाई करते समय धार्मिक भावनाओं को भी ध्यान में रखना होता था।'

कजाकपुरा जैसे क्षेत्रों में बुनकरों की छोटी कारोबारी इकाइयां हैं। इन बुनकरों में से ज्यादातर मुस्लिम हैं। ऐसे क्षेत्रों के लिए केईआई ने जनता को समझाने के लिए स्थानीय विधायकों की मदद ली। एक अधिकारी ने कहा, 'सत्तारूढ़ पार्टी से भी मदद मिली।' कंपनी ने एक जीआईएस सिस्टम सहित दो नए सब-स्टेशन स्थापित किए। जीआईएस सिस्टम विद्युत पारेषण में सबसे आधुनिक तकनीक है। यहां लगा जीआईएस सिस्टम देश में दूसरा ऐसा सिस्टम है। 

करीब 1,510 किलोमीटर लंबी केबल भूमिगत डाली गईं और 9 ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता में बढ़ोतरी की गई। जीआईएस सिस्टम भीड़भाड़ वाले चौक क्षेत्र में लगाया गया है क्योंकि यहां जगह कम है और सिस्टम बिजली आपूर्ति को दोगुनी कर सकता है। इसके अच्छे नतीजे भी सामने आए हैं। विद्युत वितरण कंपनी का घाटा घटकर 9.9 फीसदी पर आ गया है। यह नवंबर, 2016 में परियोजना शुरू होने के समय 17.4 फीसदी था। बिजली की चोरी शून्य है। बिजली की आपूर्ति में कोई कटौती नहीं हो रही है। पूरे क्षेत्र में छेड़छाड़ न किए जा सकने वाले मीटर लगाए हैं। अधिकारियों ने कहा कि घाटे में कमी और आपूर्ति में सुधार से परियोजना की लागत वसूल हो गई है। 
Keyword: varanasi, road, power, infra,,
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