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स्टर्लिंग ने अन्य प्रवर्तकों के लिए खोला रास्ता

देव चटर्जी / मुंबई March 11, 2019

दिवालिया संहिता की धारा 12 ए के तहत लेनदार 65 फीसदी की कटौती के साथ स्टर्लिंग बायोटेक की एकमुश्त भुगतान की पेशकश स्वीकार किए जाने के साथ ही अन्य कंपनियों के प्रवर्तकों की तरफ से कानूनी लड़ाई का मंच तैयार हो गया है, जिन्होंने ऐसा ही आवेदन दाखिल किया है और अपनी कंपनियों को लेकर ऐसा ही व्यवहार चाहते हैं। दिसंबर 2018 के आखिर में लेनदारों ने दिवालिया संहिता की धारा 12 ए के तहत 63 मामलों का निपटान किया, जो डिफॉल्टर को अपनी तरफ से पेशकश की अनुमति देता है और कंपनी का नियंत्रण बनाए रखने का भी, चाहे मामला एनसीएलटी में क्यों न स्वीकार कर लिया गया हो। आईबीसी के नियमों के तहत डिफॉल्ट करने वाले प्रवर्तकों की पेशकश पर 90 फीसदी लेनदारों की सहमति की जरूरत पड़ती है।
 
स्टर्लिंग बायोटेक के मामले में लेनदारों की समिति ने प्रवर्तकों की पेशकश स्वीकार करके कंपनी के खिलाफ दिवालिया याचिका वापस लेने का फैसला लिया, जिसके चलते बैंकों को अपने बकाए पर 65 फीसदी की कटौती झेलनी होगी। कॉरपोरेट वकीलों ने कहा कि स्टर्लिंग की निपटान योजना ने अन्य प्रवर्तकों के लिए रास्ता खोल दिया है, जो अदालतों में दिवालिया मामले का सामना कर रहे हैं। 48,000 करोड़ रुपये के कर्ज भुगतान में चूक करने वाली भूषण पावर ऐंड स्टील लिमिटेड के मामले में प्रवर्तक संजय सिंघल ने सभी बकाए के भुगतान की पेशकश की, लेकिन लेनदारों ने पेशकश ठुकरा दी थी। एनसीएलएटी में सिंघल की अपील पर ट्रिब्यूनल ने इस पर मार्च के आखिर तक एनसीएलटी से फैसला लेने को कहा है।
 
सिंघल की पेशकश भूषण पावर के लिए जेएसडब्ल्यू स्टील की पेशकश के खिलाफ है, जिसने लेनदारों को 19,500 करोड़ रुपये के अग्रिम भुगतान की पेशकश की है। एनसीएलटी को जेएसडब्ल्यू की पेशकश पर एनसीएलएटी के आदेश के मुताबिक मार्च के आखिर तक फैसला लेना है। एक बड़ी कंपनी के सीईओ ने कहा, सर्वोच्च न्यायालय ने प्रवर्तकों के लिए दिवालिया संहिता की धारा 12ए की खिड़की खोल दी है। लेकिन लेनदारों की समिति को संतुष्ट करना होगा और 90 फीसदी लेनदारों को प्रस्ताव पर अपनी सहमति देनी होगी। इसके अलावा लेनदारों की समिति दिवालिया संहिता की धारा 12ए के तहत प्रस्ताव को मनमाने तरीके से खारिज नहींं कर सकती। इसे देखते हुए आगे कुछ समय और कानूनी लड़ाई जारी रहेगी। अंतत: सर्वोच्च न्यायालय को फैसला लेना है कि क्या सीओसी ने 12 ए के आवेदन को ठुकराने में सही तरीके से अपने स्वविवेक का इस्तेमाल किया या नहीं। विगत में अदालतों ने स्पष्ट किया है कि सीओसी और रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल न्यायाधीश नहीं हैं और आईबीसी मामले में अंतिम फैसला लेने का अधिकार अदालतों के पास है।
 
45,000 करोड़ रुपये के बैंंक कर्ज भुगतान में चूक करने वाले एस्सार स्टील के प्रवर्तकों ने भी एनसीएलटी के अहमदाबाद पीठ में मामले के निपटान के लिए धारा 12 ए के तहत याचिका दी थी। लेकिन इनकी याचिका जनवरी में खारिज हो गई थी और एनसीएलटी ने कहा था कि यह स्वीकारयोग्य नहींं है क्योंकि प्रवर्तक एस्सार स्टील एशिया होल्डिंग लिमिटेड के पास कर्ज निपटान प्रस्ताव पेश करने का अधिकार नहीं है क्योंकि इसने अन्य समाधान आवेदक की तरह संपर्क नहीं किया। रुइया ने एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ एनसीएलएटी जाने का फैसला लिया। रुइया ने लेनदारों व परिचालक लेनदारों का पूरा बकाया 54,389 करोड़ रुपये चुकाने की पेशकश की। इस बीच, एनसीएलटी ने आर्सेलरमित्तल की पिछले हफ्ते आर्सेलरमित्तल के 42,000 करोड़ रुपये के अग्रिम भुगतान के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। एस्सार स्टील की परिचालक लेनदार स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक ने भी एनसीएलटी के आदेश के खिलाफ आज एनसीएलएटी का दरवाजा खटखटाया क्योंकि इसे आर्सेलरमित्तल की पेशकश के तहत कुछ भी नहीं मिलने जा रहा है।
Keyword: sterling biotech, IBC, NCLT,,
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