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मल्टीकैप फंड को नहीं मिला मिडकैप में तेजी का फायदा

जश कृपलानी / मुंबई March 11, 2019

बाजार पूंजीकरण के लिहाज से अलग-अलग कंपनियों में निवेश करने वाली मल्टीकैप योजनाएं अब शायद मिडकैप व स्मॉलकैप में तेजी का फायदा नहींं उठा पाएंगी क्योंकि ये फंड लगातार लार्जकैप शेयरों में निवेश से चिपकी हुई है। वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के विश्लेषण के मुताबिक, मल्टीकैप योजनाओं के जरिये लार्जकैप में निवेश 2017-18 के 62 फीसदी से बढ़कर जनवरी 2019 के आखिर में 68 फीसदी के पार निकल गया है। इस बीच, मिडकैप शेयरों में निवेश 21 फीसदी से घटकर 19 फीसदी रह गया है। इसके अलावा स्मॉलकैप में निवेश इस अवधि में 9.3 फीसदी से घटकर 6.4 फीसदी रह गया। 32 मल्टीकैप योजनाओं में से 22 योजनाओं ने अपने-अपने फंड का 65 से 95 फीसदी लार्जकैप शेयरों में लगाया हुआ है।
 
एचएसबीसी म्युचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी तुषार प्रधान ने कहा, हम देख रहे हैं कि ज्यादातर मल्टीकैप फंड लार्जकैप फंड जैसा बन गया है। जब हम औसत निवेश पर नजर डालते हैं तो मिडकैप में निवेश 20 फीसदी को भी नहीं छू पाया है। जब हम सोच रहे हैं कि मूल्यांकन में गिरावट के चलते मिडकैप की क्षमता शायद ज्यादा होगी, लेकिन निवेशकों को यह मल्टीकैप फंडों में निवेश के जरिए नहीं मिल रहा है। प्रधान ने कहा कि दो-तीन साल की अनुमानित आय की रफ्तार में बढ़ोतरी कुछ मिडकैप में नहीं है। विश्लेषकों के अनुमान के मुताबिक, मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट और आय में अनुमानित बढ़ोतरी ने विश्लेषकों का रुख इस क्षेत्र को लेकर तेजी का हो गया है। निफ्टी मिडकैप की आय वित्त वर्ष 2019-21 के दौरान 22 फीसदी के हिसाब से बढऩे की उम्मीद है।
 
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों ने हालिया नोट में कहा है, मिडकैप बनाम लार्जकैप का प्राइस टु अर्निंग प्रीमियम वित्त वर्ष 2018 में बढ़कर 46 फीसदी पर पहुंच गया। हालांकि मिडकैप में गिरावट के बाद पीई प्रीमियम 10 फीसदी रह गया है। विश्लेषकों ने कहा कि प्राइस टु बुक के आधार पर निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स निफ्टी के मुकाबले 12 फीसदी छूट पर कारोबार कर रहा है। म्युचुअल फंड उद्योग पर नजर रखने वाले विश्लेषकों ने कहा कि ज्यादातर फंड मैनेजर मूल्यांकन में गिरावट के बावजूद लार्जकैप के साथ बने रह सकते हैं।
 
मॉर्निंगस्टार इंडिया के निदेशक (फंड रिसर्च) कौस्तुभ बेलापुरकर ने कहा, फंड मैनेजर हालांकि स्वीकार करते हैं कि मिडकैप का मूल्यांकन अपेक्षाकृत सस्ता हो गया है, लेकिन चुनाव के चलते संभावित उतारचढ़ाव के चलते वे सतर्कता बरते हुए हैं। हम मिडकैप में निवेश में बढ़ोतरी देख सकते हैं, लेकिन इसमें रातोंरात कोई बड़ा परिवर्तन नहीं होगा। पिछले वर्षों में भारी तेजी के बाद मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों में पिछले साल तेज गिरावट आई। साल 2018 में बीएसई मिडकैप व बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स क्रमश: 13 फीसदी व 23 फीसदी टूटा।
 
बाजार के विशेषज्ञोंं ने कहा कि आय में तेजी न होने, कंपनी संचालन के मसले और नकदी से जुड़े मामलोंं के अलावा महंगे मूल्यांकन ने इन कंपनियों के शेयरों में गिरावट में अहम योगदान किया। हाल में बीएसई मिडकैप व बीएसई स्मॉलकैप सूचकांकों ने लगातार तीन हफ्ते में सकारात्मक रिटर्न दिया है और इनमें क्रमश: 8 फीसदी व 11 फीसदी की तेजी दर्ज हुई है। विश्लेषकों ने कहा कि कीमतों में हुई हालिया बढ़ोतरी टिकाऊ तेजी की ओर बढ़ सकती है क्योंकि आर्थिक संकेतक अनुकूल हो गए हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों ने कहा, अर्थव्यवस्था व आय में सुधार हो रहा है और हम 2019-20 की ओर बढ़ रहे हैं। अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि आरबीआई अप्रैल की नीतिगत बैठक में ब्याज दरें घटाएगा। हालिया परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स और हमारी आर्थिक गतिविधियों वाले प्रोप्राइटरी इंडेक्स ने साल 2019 की मजबूत शुरुआत का संकेत दिया है। मिडकैप के लिए फंडामेंटल व मूल्यांकन पर हमारा विश्लेषण और मिडकैप बनाम लार्जकैप की तुलना से पता चलता है कि मिडकैप के प्रति आकर्षण बढ़ा है। 
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