बिजनेस स्टैंडर्ड - चुनाव और कानून व्यवस्था
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, March 19, 2019 12:03 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

चुनाव और कानून व्यवस्था

संपादकीय /  March 11, 2019

देश में 17वीं लोकसभा और चार विधानसभा के लिए सात चरण में होने वाले चुनाव 11 अप्रैल से 19 मई तक 39 दिन चलेंगे। सन 1999 में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) का चलन शुरू होने के बाद ये सबसे लंबे चुनाव होंगे। सन 1951-52 में देश का पहला आम चुनाव 25 अक्टूबर से 21 फरवरी तक चार महीने चला था, उसके बाद से यह दूसरा सबसे लंबा चुनाव होगा। यह प्रश्न स्वाभाविक है कि अतीत में जब देश में बैलेट पेपर पर भी काफी कम समय में चुनाव हो चुके हैं तो फिर इस बार इतनी लंबी प्रक्रिया क्यों। इस सवाल के जवाब का एक पहलू तो यह है कि देश में मतदाताओं की तादाद बहुत तेजी से बढ़ी है क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ी आबादी वाला लोकतांत्रिक देश है। सन 1951 में देश में 17.3 करोड़ मतदाता थे, 2019 में इनकी तादाद 90 करोड़ का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है। 

 
अगर 2014 के आम चुनाव की तर्ज पर 66 फीसदी मतदान का अनुमान रखा जाए तो करीब 59.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक देश अमेरिका की आबादी से भी अधिक है। कश्मीर से अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तक कई लाख मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे। ऐसे में बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा इंतजाम मुहैया कराने के मोर्चे पर निर्वाचन आयोग के समक्ष काफी बड़ी चुनौती है। अगर हर चरण के बीच सात दिन का अंतराल न होता तो प्रक्रिया छोटी हो सकती थी। इसके चलते ईवीएम की रखवाली के लिए स्ट्रॉन्ग रूम पर सुरक्षा बलों की तैनाती का अनावश्यक बोझ उत्पन्न होगा। 
 
चुनाव की तिथियों का ब्योरा हमारे देश में शासन के एक अन्य पहलू की ओर ध्यान आकृष्ट करता है। 80 लोकसभा सीटों वाले और 24 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले उत्तर प्रदेश के बारे में तो माना जा सकता है कि उसके लिए सात चरण में चुनाव कराया जा रहा है लेकिन कुछ छोटे राज्यों के लिए कई चरण के चुनाव कराना अजीब है। उदाहरण के लिए 48 सीटों एवं 30 लाख वर्ग किलोमीटर में फैले महाराष्ट्र में चार चरण में और 42 सीटों तथा 88 हजार वर्ग किमी में फैले पश्चिम बंगाल में सात चरण में चुनाव कराए जाने हैं। 40 सीटों और 94 हजार वर्ग किमी वाले बिहार, 14 सीट और 79 हजार वर्ग किमी वाले झारखंड और 29 सीटों तथा 30 लाख वर्ग किमी भू क्षेत्र वाले मध्य प्रदेश तथा ओडिशा (21 सीट, 15 लाख वर्ग किमी भूक्षेत्र) में भी चार चरण में मतदान कराया जा रहा है। 
 
ऐसे सवालों का जवाब प्राय: इन राज्यों में कानून व्यवस्था की स्थिति के रूप में सामने आता है। पश्चिम बंगाल और बिहार में राजनीतिक हिंसा का पुराना सिलसिला रहा है। पश्चिम बंगाल में 2018 में जिस तरह भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं की हत्या हुई है, उससे अंदाजा लगता है कि राज्य में 2019 के चुनाव शांतिपूर्ण नहीं होने वाले। सांप्रदायिक तनाव ने मुख्य दलों की प्रतिस्पर्धा को और हवा दी है। झारखंड, मध्य प्रदेश और ओडिशा में माओवादी अशांति चुनाव आयोग के समक्ष सुरक्षा की एक अलग ही चुनौती पेश करती है। न तो यहां की राज्य सरकारें और न ही केंद्र सरकार इस संकट का कोई हल निकाल सकी है। सन 2017 में आई फिल्म न्यूटन में इसे बखूबी दर्शाया गया था। ऐसी ही अशांति का विस्तारित स्वरूप जम्मू कश्मीर में देखने को मिलता है जहां छह लोकसभा सीट के लिए पांच चरण में मतदान होगा। ऐसे में स्पष्ट है कि लंबी निर्वाचन प्रक्रिया की एक अहम वजह कानून व्यवस्था की स्थिति है।
Keyword: parliament, election, ECI, BJP, congress, EVM, VVPAT,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या प्रत्यक्ष कर संग्रह का लक्ष्य हासिल कर पाएगी सरकार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.