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लार्ज कैप में निवेश को सक्रिय और निष्क्रिय फंडों में बांटें

संजय कुमार सिंह और तिनेश भसीन /  March 11, 2019

इन दिनों डेट और इक्विटी दोनों तरह के म्युचुअल फंडों के निवेशक असमंजस में हैं। पिछले एक साल के दौरान सक्रियता से प्रबंधित लार्ज-कैप फंडों में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) का औसत प्रतिफल लगभग -1.39 फीसदी रहा है। दूसरी ओर निफ्टी 50 इंडेक्स फंड के निवेशक को 4.39 फीसदी प्रतिफल (श्रेणी का औसत प्रतिफल) मिला है। निश्चित आय के मामले में बहुत से डेट फंडों की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस), जी समूह और डीएचएफएल समूह से संबंधित घटनाक्रम के कारण प्रभावित हुई है। इससे बहुत से लोग चिंतित होंगे। वे यह सलाह लेना चाहेंगे कि उन्हें इक्विटी में निष्क्रिय फंडों और निश्चित आय के मामले में सावधि जमा को तो तरजीह नहीं देनी चाहिए, जो अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश माध्यम होते हैं।

पिछला साल असामान्य 

लार्ज कैप सक्रिय फंडों के प्रदर्शन को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि इनके लिए पिछला साल असामान्य रहा। लार्ज कैप सूचकांक की अगुआई महज 5 से 7 दिग्गज शेयरों जैसे एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक, रिलायंस, बजाज फाइनैंस, इन्फोसिस और टीसीएस ने की। शेष लार्ज कैप शेयरों ने या तो सपाट या ऋणात्मक प्रतिफल दिया। विविधीकृत पोर्टफोलियो चलाने वाले फंड प्रबंधक कम से कम 30 से 40 शेयर रखते हैं। अगर उन्होंने सूचकांक के इन दिग्गज शेयरों में निवेश नहीं किया होगा या सूचकांक की तुलना में कम निवेश किया होगा तो उन्होंने कमजोर प्रदर्शन किया होगा। डीएसपी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और निष्क्रिय निवेश के प्रमुख अनिल घेलानी ने कहा, 'सक्रिय फंडों के प्रदर्शन को परखने के लिए एक साल बहुत कम अवधि है। बाजार के एक हिस्से में ही तेजी का रुझान भविष्य में बदल सकता है।' लार्ज कैप सक्रिय फंड प्रबंधकों द्वारा बाजार की तुलना में बेहतर प्रतिफल अर्जित करना पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन यह कम हो रहा है और आगे भी ऐसा ही देखने को मिल सकता है। 

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के निदेशक (प्रबंध अनुसंधान) कौरुतुभ बेलापुरकर ने कहा, 'फंड श्रेणियों के पुनर्वर्गीकरण और प्रबंधनाधीन संपत्तियों में भारी बढ़ोतरी के बाद लार्ज कैप फंड प्रबंधकों के लिए बाजार से बेहतर प्रतिफल अर्जित करना मुश्किल होता जा रहा है।' भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा फंडों का पुनर्वर्गीकरण करने के बाद अतिरिक्त प्रतिफल अर्जित करना मुश्किल हो गया है। अब लार्ज कैप फंड प्रबंधक अपने पोर्टफोलियो की 20 फीसदी राशि ही मिड और स्मॉल कैप शेयरों में निवेश कर रहे हैं। बेंचमार्क के रूप में कीमत प्रतिफल सूचकांक की जगह कुल प्रतिफल सूचकांक ने ले ली है, जिससे लार्ज कैप में सक्रिय फंड प्रबंधकों के लिए बेहतर प्रदर्शन करना मुश्किल हो गया है। 

निष्क्रिय फंडों में निवेश

हालांकि अभी तक लार्ज कैप सक्रिय फंडों का बेहतर प्रदर्शन करना पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। बेलापुरकर ने कहा, 'आपको अच्छे सक्रिय फंड प्रबंधकों को चिह्नित करना चाहिए। इसमें जरूरत होने पर सलाहकार की मदद ली जानी चाहिए। इसके बाद प्रबंधकों को प्रदर्शन दिखाने के लिए कम से कम 5-7 साल का समय देना चाहिए।' निवेशकों को ऐसे फंडों का चयन करना चाहिए, जिसका हर कैलेंडर वर्ष में शानदार प्रदर्शन करने का ट्रैक रिकॉर्ड है और जिनका कम खर्च अनुपात है। 

घेलानी के मुताबिक आपको इस समय लार्ज कैप श्रेणी में सक्रिय और निष्क्रिय दोनों में पूरक निवेश करना चाहिए। उन्होंने कहा, 'सक्रिय प्रबंधित फंडों में एसआईपी बंद न करें। आप इससे इतर जो राशि निवेश कर सकते हैं, वह निष्क्रिय फंडों में निवेश की जानी चाहिए।' मिड और स्मॉल कैप क्षेत्र में शेयरों की तादाद काफी अधिक है। मिड कैप क्षेत्र में 150 शेयर हैं और बाजार पूंजीकरण के हिसाब से 250वीं  रैंक के बाद के सभी शेयर स्मॉल-कैप हैं।  

शेयरों के इस बड़े क्षेत्र के बारे में बहुत ज्यादा शोध नहीं हुआ है, इसलिए फंड प्रबंधकों के पास इनमें बेहतर प्रतिफल अर्जित करने का मौका है। इसके अलावा इस समय मिड और स्मॉल कैप में निष्क्रिय फंड और एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों के बहुत कम विकल्प हैं। 

क्रेडिट जोखिम सामने 

निश्चित आय के मामले में अब तक निवेशकों को ब्याज दर का जोखिम झेलना पड़ता था। लेकिन अब उन्हें ऐसा क्रेडिट जोखिम झेलना पड़ रहा है, जो अब तक कभी नहीं देखा गया। डिफॉल्ट, डाउनग्रेड और भविष्य में डिफॉल्ट के जोखिमों के कारण बहुत से फंडों की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) प्रभावित हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी एक वजह क्रेडिट भी है। टाटा म्युचुअल फंड के वरिष्ठ फंड प्रबंधक (निश्चित आय) अखिल मित्तल ने कहा, 'बैंकों और म्युचुअल फंडों दोनों ने कंपनियों को ऋण दिया है। बैंकिंग प्रणाली पिछले कई वर्षों से फंसे कर्जों (एनपीए) की समस्या से जूझ रही है। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि अर्थव्यवस्था का दबाव डेट फंड पोर्टफोलियो पर भी दिखेगा क्योंकि वे भी उन्हीं कंपनियों को ऋण देते हैं।' 

हालांकि उनके मुताबिक अच्छी बात यह है कि इन समस्याओं से डेट फंडों के एयूएम का 1-1.5 फीसदी ही प्रभावित हुआ है। ज्यादातर फंडों के वर्तमान संकट से उबरने और सही स्थिति में बने रहने की संभावना है। डेट फंड विविधीकरण का लाभ देते हैं, इसलिए उन्हें कंपनी सावधि जमाओं और गैर-परिवर्तनीय डिबेंचरों (एनसीडी) जैसे विकल्पों पर तरजीह दी जानी चाहिए। पॉजिटिव वाइब्स कंसल्टिंग ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक मल्हार मजूमदार ने कहा, 'एक निवेशक अपनी छोटी सी राशि को भी बहुत सी कंपनियों में निवेश करता है। अगर कोई एक या दो कंपनियां किसी मुसीबत में फंसती भी हैं तो शेष निवेश सुरक्षित बना रहता है और लाभ देता है।'

सावधानी से चुनें फंड श्रेणी 

इन घटनाक्रमों के बाद निवेशकों को डेट फंडों को सावधि जमा जैसी वे योजनाएं मानना बंद करना चाहिए, जो ऊंचा प्रतिफल देती हैं। (यह संभव है कि पहले निवेशकों को ऊंचा प्रतिफल मिला हो।) आईडीएफसी म्युचुअल फंड के प्रमुख (निश्चित आय) सुयश चौधरी ने कहा, 'कम जोखिम लेने वाले निवेशकों को ज्यादातर निवेश उन डेट फंडों में करना चाहिए, जो अवधि और ऋण जोखिम को नियंत्रित करते हैं।' इसका मतलब है कि आपको उन फंडों में निवेश करना चाहिए, जो मुख्य रूप से एएए बॉन्डों में निवेश करते हैं और जिनमें परिपक्वता की औसत अवधि 2 से 5 साल है। 

बैंकिंग और पीएसयू बॉन्ड फंड एक अन्य सुरक्षित श्रेणी है, जिसके बारे में विचार किया जा सकता है। क्रेडिट रिस्क फंड जैसी ज्यादा जोखिम वाले श्रेणियों में केवल उन्हीं निवेशकों को निवेश करना चाहिए, जो जोखिम लेने की क्षमता रखते है। उन्हें भी सीमित निवेश करना चाहिए। ऐसे डेट फंडों से बचें, जिनका एक प्रवर्तक वाले समूह में 5 फीसदी से अधिक निवेश है। डेट फंडों से पूरी तरह निकलकर सावधि जमाओं जैसी सुरक्षित योजनाओं में निवेश करना जरूरी नहीं है। बेलापुरकर ने कहा, 'यह बाद ध्यान रखें कि डेट फंडों और सावधि जमाओं में कर का अंतर है। अगर आप डेट फंडों में निवेेश को तीन साल रखते हैं तो आपको सूचकांक का लाभ मिलता है और मामूली कर चुकाना पड़ता है। कर के बाद के आधार पर आम तौर पर डेट फंड ज्यादा बेहतर साबित होते हैं।' जोखिम से पूरी तरह दूर रहने वाले वे निवेशक, जिनकी कोई कर योग्य आय नहीं है या वे सबसे निचले कर वर्ग में आते हैं तो उनके लिए सावधि जमाओं में निवेश करना बेहतर है। इसके अलावा कोई जोखिम नहीं उठाने की मंशा रखने वाले निवेशकों को एफडी का विकल्प अपनाना चाहिए। 

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