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बैंक और एनबीएफसी के लिए हालात में आता सुधार

श्रीपाद ऑटे /  March 11, 2019

बैंक और आवास वित्त कंपनियों समेत गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को पिछले साल बुरे दौर से गुजरना पड़ा जिससे निवेशकों को भी निराशा का सामना करना पड़ा। फंसे कर्ज या एनपीए में तेजी, धोखाधड़ी और शीर्ष प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं की वजह से बैंकिंग शेयर प्रभावित हुए थे। इसके अलावा, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एनपीए नियमों (पिछले साल फरवरी में लागू) से जुड़ी चिंताओं से भी निफ्टी बैंक सूचकांक पिछले साल मार्च में अपने जनवरी के ऊंचे स्तर से लगभग 15 प्रतिशत गिर गया था। वहीं, एनबीएफसी के लिए, सितंबर में आईएलऐंडएफएस के दिवालिया होने के बाद नकदी संकट से जूझना पड़ा। 

हालांकि कुछ बैंक और एनबीएफसी (बीएसई 500 में शामिल) इस रुझान को मात देने में सफल रहे और मौजूदा समय में वे अपने 52 सप्ताह के ऊंचे स्तरों के नजदीक कारोबार कर रहे हैं या इन स्तरों से महज 10 प्रतिशत दूर हैं। आखिर, क्या बदलाव आया है? पिछली दो तिमाहियों में बड़े बैंकों द्वारा प्रदर्शन में सुधार दर्ज किया गया है और कुछ एनबीएफसी के लिए नकदी संकट घट रहा है और उन्हें निवेशकों का भरोसा जीतने में मदद मिली है। 

कई कॉरपोरेट ऋणदाताओं ने दिसंबर 2018 की तिमाही में अपनी परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया और कम एनपीए (कम स्लिपेज) तथा मौजूदा एनपीए से वसूली को देखते हुए यह रुझान बरकरार रहने की संभावना है। उदाहरण के लिए, ऐक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक ने तीसरी तिमाही में सकल एनपीए में अपने मार्च 2018 के ऊंचे स्तरों के मुकाबले से 102-109 आधार अंक की गिरावट दर्ज की। 

कम नए एनपीए का मतलब है फंसे कर्ज के लिए प्रावधान में कमी आना। मैक्वेरी के विश्लेषकों को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) और निजी ऋणदाताओं के लिए उधारी लागत सामान्य रहने और अगले दो वर्षों में इसके लगभग 160-190 आधार अंक तथा 100 आधार अंक पर पहुंचने का अनुमान है। पीएसबी और निजी ऋणदाताओं के लिए उधारी लागत वित्त वर्ष 2018 में 420 आधार अंक और 200 आधार अंक के ऊंचे स्तरों पर पहुंच गई थी। विश्लेषकों का कहना है कि उधारी लागत सुधरने, अपेक्षित वसूली की वजह से ब्याज में सुधार से वित्त वर्ष 2021 तक मार्जिन में 20-50 आधार अंक का सुधार देखा जा सकता है। 

चूंकि एनपीए रिटेल ऋणदाताओं के लिए बड़ी चिंता नहीं है, लेकिन क्षेत्रीय एनपीए स्तर में बदलाव कॉरपोरेट परिसंपत्ति गुणवत्ता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। इसके अलावा, ऐक्सिस बैंक और आईसीआईसीआई बैंक में भी प्रबंधन में बदलाव से शेयरों को मदद मिली है। मैक्वेरी का कहना है कि लेकिन कमजोर और छोटे बैंकों के साथ विलय जैसी कुछ समस्याओं, कृषि ऋण माफी के संदर्भ में परिसंपत्ति गुणवत्ता चिंताओं और निजी ऋणदाताओं के हाथों बाजार भागीदारी खोने से पीएसबी को निजी बैंकों की तुलना में नुकसानदायक स्थिति का सामना करना पड़ा है। 

इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम का कहना है कि हालांकि पीएसबी के लिए भी हालात अनुकूल हैं। वह कहते हैं, 'पीएसबी के लिए एनपीए में कमी आनी शुरू हुई है और समायोजित पूंजी स्थिति में सुधार आया है। इसके अलावा, पीएसबी शेयरों का मूल्यांकन मौजूदा समय में काफी आकर्षक है। इसलिए कुछ पीएसबी शेयर खरीदने के लायक हो सकते हैं।'

इलाहाबाद, बैंक, कॉरपोरेशन बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र जैसे कुछ पीएसबी को हाल में आरबीआई की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) ढांचे से बाहर निकलने में मदद मिली है जिससे बाजार में भी उत्साह दिखा है। उम्मीद जताई जा रही है कि ये पीएसबी अब वृद्घि दरों में सुधार दर्ज करेंगे, क्योंकि शाखा विस्तार और उधारी के संदर्भ में उन्हें पीसीए से संबंधित किसी सख्ती का सामना नहीं करना पड़ेगा। हालांकि वृद्घिशील पूंजी के अभाव और धीमे निवेश चक्र से उनकी ऋण बुक वृद्घि प्रभावित हो सकती है।

दूसरी तरफ, खुदरा उधारी व्यवसाय लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहा है और खपत बढऩे तथा निर्माणाधीन आवासीय संपत्ति पर जीएसटी में ताजा कटौती से परिदृश्य में सुधार आया है। यह एचडीएफसी बैंक और आरबीएल बैंक जैसे निजी रिटेल ऋणदाताओं के लिए अच्छा संकेत है। पीएसबी में पूंजी चिंता और एनबीएफसी में नकदी संकट से निजी रिटेल ऋणदाताओं को अपनी ऋण बुक दुरुस्त बनाने और बाजार भागीदारी बढ़ाने में मदद मिलेगी।

हालांकि एनबीएफसी को नकदी की किल्लत और परिसंपत्ति-देयता अंतर का अभी सामना करना पड़ रहा है, लेकिन स्वर्ण वित्त ऋणदाताओं और सरकारी के स्वामित्त वाली वित्तीय कंपनियों (पीएफसी, आरईसी) जैसी कुछ कंपनियां और एचडीएफसी जैसी मजबूत पैतृक समर्थन वाली कंपनियां निवेशकों के बीच अपनी लोकप्रियता बढ़ा रही हैं। मणप्पुरम फाइनैंस और मुथुट फाइनैंस जैसी स्वर्ण ऋणदाता कंपनियां अपने अल्पावधि के परिसंपत्ति ढांचे की वजह से अन्य एनबीएफसी की तुलना में लाभ उठा रही हैं। ये कंपनियां अक्सर एक साल तक के लिए उधार देती हैं। 

दूसरी तरफ, कुछ आवास वित्त कंपनियों और अन्य ऋणदाताओं के लिए, रियल एस्टेट डेवलपरों में निवेश अन्य चिंता है। एनबीएफसी से डेवलपरों के लिए कोष के अभाव के साथ साथ संपत्ति की सुस्त बिक्री की वजह से विश्लेषक इस श्रेणी से परिसंपत्ति गुणवत्ता पर दबाव पैदा होने का अनुमान जता रहे हैं। 

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