बिजनेस स्टैंडर्ड - वित्त मंत्रालय से सेवानिवृत्ति के बाद इंतजार करतीं नौकरियां
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Saturday, July 20, 2019 02:43 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम अर्थव्यवस्था खबर

वित्त मंत्रालय से सेवानिवृत्ति के बाद इंतजार करतीं नौकरियां

शुभमय भट्टाचार्य / नई दिल्ली March 10, 2019

वित्त विभाग के अधिकारियों की सेवानिवृत्ति के बाद भी मांग बनी रहती है। वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को हमेशा से अन्य मंत्रालयों के सेवानिवृत्त अधिकारियों की तुलना में फायदा मिलता रहा है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के चेयरमैन सुशील चंद्रा की चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्ति दिल्ली की नौकरशाही के जाने माने ट्रेंड के अनुरूप है। ऐसा नियामकीय संस्थाओं के बढऩे की वजह से हो रहा है। 

यह धारणा हर दशक बीतने के साथ मजबूत होती जा रही है। अन्य सेवाओं के अधिकारी उतने भाग्यशाली नहीं रहे हैं। सीबीडीटी के पहले चेयरमैन पद से सेवानिवृत्त होने के बाद एन रंगाचारी 1996 में भारतीय बीमा नियामक विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के पहले चेयरमैन बने थे। हालांकि उसके बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर के कई प्रमुख पद नहीं पा सके और लंबे समय बाद रवि कांत भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के सदस्य बनाए गए। 

इसी तरह से इंडियन ऑडिट ऐंड अकाउंट सर्विस के धीरेंद्र स्वरूप को व्यय सचिव के बाद भारतीय पेंशन फंड नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के पहले चेयरमैन बने थे। यह धारणा चालू दशक में भी नहीं बदली है। 90 के दशक तक आईएएस अधिकारियों के लिए भी सेवानिवृत्ति के बाद बहुत पद नहीं रहते थे। उस समय वित्त मंत्रालय के सचिव व विशेष सचिव स्तर के सिर्फ 5 अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद जगह मिल पाई थी। लेकिन 90 का दशक खत्म होने पर नॉर्थ ब्लॉक के 17 अधिकारियों को अपना कार्यकाल खत्म होने के बाद नया काम मिल गया। नियामकीय संस्थाओं की संख्या बढऩे की वजह से वित्त मंत्रालय के अधिकारियों को ज्यादा अवसर मिलने लगे। 

मौजूदा दशक में 12 अधिकारियो को पहले ही विभिन्न पद मिल चुके हैं। राजीव महर्षि सीएजी बनने के पहले गृह सचिव थे और उसके पहले वित्त सचिव पद पर थे। सीआईसी के सदस्य बनने वाले विमल जुल्का सूचना प्रसारण मंत्रालय में आने के पहले लंबे समय तक मुद्रा के महानिदेशक थे। अजय त्यागी भी सेबी में जाने से पहले वित्त मंत्रालय में थे। अगर इन अधिकारियों को सूची में शामिल किया जाए तो इस तरह का लाभ पाने वालों की संख्या और बढ़ जाती है।  इनमें से प्रत्यक्ष कर के प्रमुख सुशील चंद्रा और अप्रत्यक्ष कर में प्रमुख वनजा सरना ने रिकॉर्ड बनाया है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि सेवानिवृत्त होने वाले दोनों के प्रमुख कार्यकारी हैसियत के पद पा रहे हैं।

Keyword: Rajiv Maharshi, CAG, CIC, Sushil Chandra, CBDT, Sushil Chandra, Regulatory Institution, TRAI, Indian Audit, PFRDA,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या आरबीआई के संकेत के बाद कर्ज सस्ता करेंगे बैंक?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.