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पुराने इतिहास की नींव पर नई ईंट

श्रेया जय /  March 09, 2019

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वाराणसी में काशी विश्वनाथ धरोहर क्षेत्र (हेरिटेज जोन) की आधारशिला रखी। इस परियोजना के तहत वाराणसी विकास प्राधिकरण (वीडीए) व्यावसायिक एवं आवासीय संरचनाओं समेत मौजूदा ढांचे गिरा रहा है। प्राधिकरण काशी विश्वनाथ से लेकर घाटों तक 15,000 वर्गमीटर क्षेत्र में आने वाले प्राचीन मंदिरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा रहा है। सरकार ने एक व्यापक परियोजना के तहत गंगा घाटों से मंदिर क्षेत्र तक श्रद्धालुओं का प्रवेश आसान करने के लिए चलंत रास्ते बनाने की घोषणा की है। हालांकि श्रद्धालुओं को अपनी सुविधाओं की परवाह नहीं है। एक 50 साल के श्रद्धालु ने कहा, 'सरकार सुविधाएं दे या नहीं दें, सच्चे दिल वाला श्रद्धालु इसकी परवाह नहीं करता। मैं तब भी आऊंगा और घंटों खड़ा रहूंगा।'

जीर्णोद्धार कार्यों के दौरान वीडीए ने 50 से अधिक मंदिरों की खोज की है। जमीन के 25 फुट नीचे श्रीनीलकंठ महादेव मंदिर है। पुराणों में वर्णित समुद्र मंथन को समर्पित एक 500 साल पुराना मंदिर भी है, साथ ही एक और मंदिर है, जिसका निर्माण गुप्त वंश के दौरान हुआ था। आधुनिक समय में हुए  निर्माण कार्यों से इन प्राचीन मंदिरों तक पहुंचना लगभग असंभव हो गया था। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास (केवीटीटी) वह सभी जमीन खरीद रही हैं, जहां ढांचे गिराए जा रहे हैं।

न्यास कुछ मामलों में सर्किल रेट का तीन गुना भुगतान करने के लिए तैयार है। हेरिटेज जोन परियोजना के लिए न्यास के पास 1,000 करोड़ रुपये का बजट है। पहले चरण में यह ढांचे गिराने और जमीन अधिग्रहण पर 250 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। जो संरचनाएं विस्थापित की जा रही हैं, उनमें घर, विश्राम गृह और दुकानें शामिल हैं। ये सभी भी 100 से 200 साल पुरानी हैं। मौजूदा ढांचे गिराए जाएं और इनका विरोध नहीं हो, यह संभव नहीं। कई धार्मिक समूहों, इतिहासकारों और नागरिकों की तरफ से विरोध केस्वर उठने लगे हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय इस महत्त्वपूर्ण परियोजना पर सीधे निगरानी रख रहा है और वीडीए युद्ध स्तर पर काम कर रहा है। वीडीए के सचिव विशाल सिंह अगले एक साल के अंदर परियोजना पूरी किए जाने को लेकर आश्वस्त हैं। सिंह न्यास के पहले गैर-ब्राह्मïण प्रमुख हैं।

सिंह श्री कृष्ण काशी विश्वनाथ स्पेशल एरिया डेवलपमेंट बोर्ड के मुख्य कार्याधिकारी हैं। यह बोर्ड पूरी परियोजना की देख-रेख कर रहा है। उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, 'हम सभी धार्मिक स्थलों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा रहे हैं। वास्तव में वीडीए को कई ऐतिहासिक संरचनाएं मिली हैं। हमने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को इन स्थलों की कार्बन डेटिंग कराने को कहा है।'

मुगल शासक औरंगजेब द्वारा निर्मित ज्ञानवापी मस्जिद काशी विश्वनाथ के परिसर में है और यहां तक पहुंचना पहले के मुकाबले अब काफी आसान बनाया गया है। यही पर एसकेवीडीबी का अस्थायी कार्यालय भी स्थापित किया गया है। पहली मंजिल पर कार्यालय में सिंह उन धार्मिक समूहों से घिरे हैं, जो मंदिर या जमीन देने के पक्ष में नहीं हैं। सिंह ने कहा, 'हम मंदिर के साथ जुड़े आवासीय हिस्से को ही हटा रहे हैं। मार्च, 2018 से हमने लगभग 270 जायदाद खरीदी हैं और केवल मालिकाना हक रखने वालों को ही मुजावजा दिया है। कई मामलों में जो लोग घरों में रहते हैं, वे मालिक नहीं हैं। वे या तो किरायेदार हैं या अवैध रूप से रह रहे हैं। उन्हें जगह छोडऩे के लिए कहा गया है और उन्हें हम वैकल्पिक जगह मुहैया करा रहे हैं।'

मंदिर न्यास की वेबसाइट पर उपलब्ध सूची के अनुसार दिसंबर, 2018 तक 89 लोगों को मुआवजा मिला है। मुआवजे की राशि 1 लाख से 5 लाख रुपये के बीच है। पिछले साल करीब 167 छोटे और बड़े जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण से जुड़ीं परियोजनाएं पूरी की गईं। परियोजना के तहत मणिकर्णिका, ललिता और जलसेन घाट भी पुनर्विकिसित किए जाएंगे। सभी पुरोहितों के लिए संग्रहालय, विश्राम गृह, रंगभूमि और आवास बनाए जाने पर विचार हो रहा है। बिड़ला पुस्तकालय सलामत रहेगा और इसका जीर्णोद्धार होगा। 
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