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स्टर्लिंग बायोटेक की पेशकश मंजूर

देव चटर्जी और अभिजित लेले / मुंबई March 08, 2019

लेनदारों ने स्टर्लिंग बायोटेक के विवादास्पद प्रवर्तकों की तरफ से की गई एकमुश्त निपटान पेशकश पर सहमति जताई है, जिन्होंने बैंक के 15,000 करोड़ रुपये के बकाए के भुगतान में डिफॉल्ट किया था। बैंकरों ने कहा कि प्रवर्तकों ने जो पेशकश की है उस पर लेनदारों को करीब 65 फीसदी की भारी भरकम कटौती झेलनी होगी।

स्टॉक एक्सचेंजों को भेजे बयान में कंपनी ने कहा, लेनदारों की समिति ने कंपनी की कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया की वापसी को बहुमत के साथ मंजूर कर लिया है। लेनदारों ने एसीजी एसोसिएटेड कैप्सुल्स प्राइवेट लिमिटेड की समाधान योजना और परिसमापन के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। कंपनी ने बुधवार को यह जानकारी दी थी।

सरकारी बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि प्रवर्तकों चेतन व नितिन संदेसरा ने कर्ज के भुगतान के लिए विदेशी निवेशक को शामिल किया है और कंपनी की योजना बकाया रकम के एक हिस्से का भुगतान, पूर्ण भुगतान का अपना इरादा जाहिर करने के लिए है। सूत्र ने कहा, प्रवर्तक पहले ही एकमुश्त निपटान की पेशकश का पांच फीसदी जमा करा चुके हैं। समाधान की इच्छा रखने वाले लेनदारों के सामने वसूली, इसमें संशोधन या रकम के पुनर्गठन का विकल्प है। इस मामले में पुनर्गठन का कोई मसला नहीं है और यह मामला परिसंपत्ति की बिक्री या निपटान के जरिए वसूली का है। एक बैंकर ने ये बातें कही। करीब 90 फीसदी लेनदारों ने एकमुश्त निपटान पेशकश पर सहमति जताई है।

लेनदारों ने एनसीएलटी से इस खाते की निकासी का फैसला लिया। इससे पहले पिछले साल जून में इसे आईबीसी के तहत कर्ज समाधान के लिए संदर्भित किया गया था। बैंकरों ने कहा कि इसे एनसीएलटी से बाहर निकालने का फैसला लिया गया क्योंकि परिसमापन की कीमत बकाया रकम के मुकाबले काफी कम होगी और परिसमापन प्रक्रिया में काफी वक्त लगेगा। ऐसे में लेनदारों की समिति की 4 मार्च व 5 मार्च को हुई बैठक में लेनदारों ने कंपनी की आईबीसी के तहत परिसमापन में भेजने का प्रस्ताव ठुकरा दिया।

स्टर्लिंग बायोटेक की सालाना रिपोर्ट (2017-18) के मुताबिक, (जिस पर दिसंबर 2018 में इसके रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने हस्ताक्षर किए हैं) वित्तीय लेनदारों ने कंपनी के खिकलाफ 14,939 करोड़ रुपये का दावा किया था। इसमें से रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल ने 21 नवंबर 2018 तक 8,967 करोड़ रुपये का दावा स्वीकार किया था। 31 मार्च 2018 तक कंपनी ने कर्ज, उधारी और वाह्य वाणिज्यिक उधारी के तौर पर 7,564 करोड़ रुपये रहने की बात कही थी।

निपटान का आवेदन आईबीसी की धारा 12ए के तहत दाखिल किया गया, जो प्रवर्तकों को कंपनी के लिए पेशकश का मौका देता है, अगर बाध्यकारी बोली जमा नहीं कराई गई है और 90 फीसदी लेनदार इस पर सहमत हों। सालाना रिपोर्ट में कंपनी ने कहा है कि वह प्रवर्तन निदेशालय की जांच के दायरे में थी, जिसने इसके मुंबई व वड़ोदरा कार्यालत की तलाशी अगस्त 2017 में ली थी। कंपनी सीबीआई व एसएफआईओ के जांच के दायरे में भी है। 29 मई 2018 को ईडी ने कंपनी की संपत्तियां जब्त की थी। कंपनी के प्रवर्तक विदेश में हैं।

इस साल 14 फरवरी को स्टर्लिंग के प्रवर्तक चेतन, चेतन की पत्नी और नितिन संदेसर के अलावा हितेशकुमार पटेल ने दिल्ली न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर उनके खिलाफ जारी गैर-जमानती वॉरंट रद्द करने की मांग की थी। यह खबर एक समाचार एजेंसी ने दी। इस मामले पर 2 अप्रैल को सुनवाई होगी।
Keyword: Sterling Biotech, Offering, Banker, Bank, Corporate Insolvency, Resolution Process, ACG, Stock Exchange, Public Sector Bank, PSB, NCLT,
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