बिजनेस स्टैंडर्ड - 'तिमाही आधार पर नहीं हो सकता सामान्य बीमा क्षेत्र का आकलन'
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, September 24, 2020 05:19 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम जिरह खबर

'तिमाही आधार पर नहीं हो सकता सामान्य बीमा क्षेत्र का आकलन'

बीएस संवाददाता /  March 08, 2019

सामान्य बीमा क्षेत्र की पांच कंपनियों के प्रमुख इस उद्योग के भविष्य को लेकर आशान्वित हैं और उन्हें हालात सुधरने की भी उम्मीद है।

सरकारी स्वामित्व वाली सामान्य (जनरल) बीमा कंपनियों की हालत में सुधार 

एलिस वैद्यन: आपको यह देखना होगा कि सरकारी नियंत्रण वाली सामान्य बीमा कंपनियों ने देश की सेवा किस तरह की है और समय के साथ किस तरह उनका विकास हुआ है? हां, मैं इस बात से सहमत हूं कि सार्वजनिक बीमा कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 55 फीसदी से घटकर 45 फीसदी पर आ चुकी है। शायद तीन कंपनियों के विलय की घोषणा से लोगों के बीच अधिक भरोसा नहीं पैदा हुआ। जहां तक हमें पता है, विलय की प्रक्रिया जारी है। 

वरुण दुआ: भारत करीब 20-30 दस्तों से बना हुआ है। इस देश में ऐसे इलाके हैं जहां सार्वजनिक बीमा कंपनियां अपनी सेवाएं दे सकती हैं जबकि निजी बीमा कंपनियां या तो वहां कभी नहीं जाएंगी या बहुत देर से जाएंगी। ऐसे में यह हो सकता है कि हमारी तरह की कंपनियां डिजिटल इंडिया और नई सदी के ग्राहकों पर ध्यान केंद्रित करेंगी। लेकिन देश के ग्रामीण इलाकों या टियर-3 शहरों में एक बड़ी आबादी ऐसी है जिसे केवल सार्वजनिक बीमा कंपनियां ही सेवाएं दे सकती हैं।

अनुज गुलाटी: अर्थव्यवस्था के साथ बीमा क्षेत्र भी बढ़ा है। इसमें प्रतिस्पद्र्धा भी बढ़ गई है। सार्वजनिक बीमा कंपनियों के पास मौजूद ज्ञान उन्हें अलग मुकाम देता है और निजी क्षेत्र की कंपनियां उनसे सीख रही हैं। हालांकि खुदरा बाजार बढऩे के साथ तकनीक आने से उनकी क्षमता में भी बदलाव आया है। निजी बीमा कंपनियों की तुलना में उनकी डिलीवरी की प्रक्रिया धीमी रही है।

नीलेश गर्ग: निजी क्षेत्र ने बाजार में नई मांग पैदा कर और संतुष्ट ग्राहकों के दम पर बाजार हिस्सेदारी हासिल की है। ऐसा नहीं है कि सार्वजनिक बीमा कंपनियों की जगह कम हुई है। तीन तरह के ग्राहक हैं- कॉर्पोरेट ग्राहक, शहरी खुदरा ग्राहक और ग्रामीण खुदरा ग्राहक। पहले और तीसरे तरह के ग्राहकों के मामले में सार्वजनिक बीमा कंपनियां अपनी क्षमता, ज्ञान और ग्रामीण पहुंच के चलते बेहद मजबूत स्थिति में हैं। लेकिन नई सदी के डिजिटल ग्राहकों के मामले में निजी बीमा कंपनियों को अपनी तेजी एवं तकनीक के चलते बढ़त मिली हुई है।

भार्गव दासगुप्ता: सार्वजनिक बीमा कंपनियों का कुछ समय तक  ध्यान बाजार हिस्सेदारी पर ही था लेकिन अंडरराइटिंग की कीमत पर बाजार हिस्सेदारी से हमेशा ही नुकसान होता है। अब हम उस मोर्चे पर सुधार देख रहे हैं। सभी सरकारी बीमा कंपनियां कीमत निर्धारण एवं अंडरराइटिंग में सुधार कर रही हैं। उनके पास अधिक भविष्योन्मुख पहलुओं में निवेश के लिए पूंजी होगी।

घाटे की अंडरराइटिंग

वैद्यन: बीमा कंपनियों का तिमाही आधार पर आकलन नहीं किया जा सकता है। दुनिया भर में बीमा कंपनियों का सालाना प्रदर्शन के आधार पर आंका जाता है। सामान्य बीमा बाजार वर्ष 2007 में प्रॉपर्टी एवं आगजनी को शुल्क-मुक्त किए जाने के बाद से ही अंडरराइटिंग घाटा उठा रहा है। इसने सभी कंपनियों को नुकसान पहुंचाया है। लेकिन निवेश आय का परिवेश काफी अच्छा है और यह अंडरराइटिंग से हो रहे नुकसान को कम कर रहा है।

दासगुप्ता: भारत के लेखा मानक अंतरराष्ट्रीय मानकों की तुलना में अधिक रूढि़वादी हैं। भारत की सामान्य बीमा कंपनियों का साझा अनुपात उतना बुरा नहीं है जितना नजर आता है। बीमा, खासकर सामान्य बीमा का कारोबार अस्थिर है। कुछ तिमाहियों में हम निवेश पर नुकसान उठा रहे होंगे क्योंकि हम निवेश को दीर्घावधि नजरिये से देखते हैं। मैं निवेशकों से बीमा उद्योग को तिमाही के बजाय दीर्घावधि परिप्रेक्ष्य से देखने का अनुरोध करूंगा।

वैद्यन: हम 13-15 फीसदी वृद्धि देख रहे हैं और यह दर बनी रहने वाली है। केवल समय की बात है कि भारत दुनिया में सर्वाधिक तेजी से बढ़ता बीमा बाजार बन जाए। अभी हम जीवन बीमा में 10वां बड़ा बाजार हैं और सामान्य बीमा में हम दुनिया में 15वें स्थान पर हैं। वक्त बीतने के साथ यह लाभप्रद भी हो जाएगा।
Keyword: life insurance, General insurance, Company, Share, Economy, Corporate Customer, Digital,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या अर्थव्यवस्था में तेजी लाने के लिए एक और प्रोत्साहन की है जरूरत?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.