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कृषि क्षेत्र के समग्र सुधार के लिए कर्ज माफी नाकाफी

सुरिंदर सूद /  March 07, 2019

किसानों को कर्ज माफी या आय समर्थन जैसी चैरिटी की जरूरत नहीं है। किसानों के राष्ट्रीय संगठन भारतीय कृषक संघ कंसोर्टियम (सीफा) का कहना है कि 'किसानों को सम्मान के साथ जीने के लिए अपनी उपज पर वाजिब प्रतिफल से होने वाली कमाई की जरूरत है।' यह संगठन अन्य कृषि समूहों की तुलना में अलग राय रखता है। अलग-अलग राजनीतिक दलों से जुड़े कृषक संगठनों की तरह यह समूह किसानों का कर्ज माफ करने और दूसरे वित्तीय अनुदानों की मांग नहीं कर रहा है।

सीफा की मांगें गैर-राजनीतिक होने के साथ ही कृषि को अपने आप में सक्षम बनाने वाली नीतियां बनाने से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा सीफा दूसरे कृषि संगठनों की तरह जीन-संवद्र्धित (जीएम) फसलों का विरोध करने के बजाय कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के इस्तेमाल का पक्षधर है। वह कृषि कार्य को लाभदायक बनाने के लिए नैनो, अंतरिक्ष, नाभिकीय, सूचना एवं जैव-प्रौद्योगिकी जैसी आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल के पक्ष में है। इस तरह सीफा का अभियान मूलत: तकनीक एवं ज्ञान पर आधारित कृषि विकास को लेकर है जिसमें कारगर मार्केटिंग हो और किसानों को केंद्र में रखते हुए नीतियां बनाई जाएं।

इस परिप्रेक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सीफा ने विस्तृत राष्ट्रीय कृषि एजेंडा तैयार किया है और अगले 10 वर्षों तक सरकार से इस पर चलने का अनुरोध करता है। इसका व्यापक उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सालाना 4 फीसदी की वृद्धि दर हासिल करना है जो फिलहाल 2-3 फीसदी ही है। ऐसा होने पर कृषि एवं अन्य क्षेत्रों के बीच वृद्धिï दर का फासला कम हो सकेगा। इसके लिए कृषि को आर्थिक विकास के केंद्र में रखने की जरूरत है। कुछ उसी तरह जिस तरह आर्थिक सुधारों की शुरुआत से ही उद्योग, व्यापार, सेवाएं एवं दूसरे क्षेत्रों को अहमियत दी जाती रही है। सीफा कृषि मंत्री को उप प्रधानमंत्री का दर्जा देने के साथ ही कृषि क्षेत्र के लिए अलग बजट लाने की भी बात करता है। इस एजेंडे में कृषि की जिम्मेदारी उन अधिकारियों को सौंपने की बात कही गई है जो खेती के बारे में थोड़ी-बहुत समझ रखते हों।

सीफा के इस एजेंडे में उन बिंदुओं पर भी ध्यान दिया गया है जिन्हें अभी तक वाजिब तवज्जो नहीं मिलती थी। इनमें जमीन एवं पट्टे पर खेती करने से संबंधित नियम, कृषि मार्केटिंग को नई धार देने, खेती कार्यों में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ाने और ढांचागत क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ाने, कृषि प्रसंस्करण और कृषि अनुसंधान जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं। महात्मा गांधी रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत रोजगार पाने वाले श्रमिकों को किसानों के खेतों में भी काम करने की मंजूरी दी जानी चाहिए। यह लागत साझा कर कृषि श्रम की बढ़ती किल्लत दूर की जा सकेगी।

इसके अलावा सीफा किसानों के आर्थिक हितों को सुरक्षित करने के लिए दीर्घावधि नजरिये से टिकाऊ कृषि नीतियों का पक्षधर है। मुद्रास्फीति नियंत्रण पर केंद्रित नीतियों के चलते विपरीत हालात में औचक प्रतिक्रिया देखने को मिलती है। आयात-निर्यात शुल्क में बार-बार होने वाले बदलाव और कृषि उत्पादों के विदेशी एवं घरेलू कारोबार पर लगने वाली तमाम बंदिशें कृषि उत्पादकों की कीमत पर उपभोक्ताओं के हितों को संरक्षित करने पर केंद्रित होती हैं। कृषि उत्पादों के विदेशी कारोबार पर लगने वाले शुल्क का ढांचा ऐसा हो कि निर्यात को प्रोत्साहन मिले और केवल आवश्यक वस्तुओं का ही आयात किया जाए। आयातित उत्पादों की भारत आने के बाद लागत घरेलू उत्पादों के लिए तय न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम-से-कम 10 फीसदी अधिक हो ताकि स्थानीय उपज पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े। आवश्यक वस्तु अधिनियम को भी संशोधित करने की जरूरत है ताकि व्यापक उपभोग वाले कृषि उत्पादों के व्यापार पर कुछ पाबंदियां लगाई जा सकें।

सीफा का एक और उल्लेखनीय प्रस्ताव यह है कि कृषि एवं सिंचाई को संविधान की राज्य सूची से हटाकर समवर्ती सूची में डाल दिया जाए जिससे केंद्र सरकार को इन क्षेत्रों के विकास में अधिक सार्थक भूमिका निभाने का मौका मिले। वैसे इस प्रस्ताव पर अमल कर पाना काफी मुश्किल है। कृषि क्षेत्र को ऋण आवंटन, फसल बीमा, आपदा राहत, विदेश व्यापार और तकनीक प्रोत्साहन जैसे कई अहम मुद्दों को केंद्र सरकार ही काफी हद तक देख रही है। राज्य सरकारें तो बीज, बिजली, सहकारी समितियों और कृषि संबद्ध सेवाओं की ही देखभाल करती हैं। लेकिन इनमें से अधिकांश क्षेत्रों की हालत खस्ता है। राज्यों की खराब आर्थिक सेहत के चलते सिंचाई क्षेत्र में फंड का अभाव रहता है। ऐसे में अगर सिंचाई को समवर्ती सूची में डाल दिया जाता है तो केंद्र की सीधी निगरानी में रहने से उसे भी काफी लाभ होगा।

आम चुनावों को करीब आते देख सीफा विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है। खासकर क्षेत्रीय दलों से उसे अधिक उम्मीदें हैं। भविष्य में क्षेत्रीय दलों की भूमिका काफी अहम होने की संभावना के चलते सीफा उनसे अपने चुनावी घोषणापत्र में इन बिंदुओं को जगह देने का अनुरोध कर रहा है। ये दल अगर ऐसा करते हैं तो उन्हें इससे फायदा ही होगा क्योंकि सीफा के अधिकांश सुझाव न केवल सोचे-समझे हुए हैं बल्कि वे नतीजों को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं।
Keyword: agri, farmer, crop, election, income, Crop Insurance, Agriculture, CIFA, GM, Crop, MNREGA, Policy,
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