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मुश्किल दौर से गुजर रही पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था

शुभमय भट्टाचार्य /  March 07, 2019

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को तुरंत विदेशी मदद की जरूरत है लेकिन भारत के साथ जारी टकराव ने उसकी कठिनाइयां बढ़ा दी हैं। विदेशी मदद के लिए उसके पास मुख्य तौर पर दो रास्ते हैं। पहला चीन और दूसरा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ)। पाकिस्तान को 2017-18 में कुल जितना विदेशी कर्ज मिला था, उसका 40 फीसदी से अधिक हिस्सा चीन और आईएमएफ से आया था। पाकिस्तान विदेशों से लगभग इतना ही व्यावसायिक ऋण लेता है। इस तरह दोनों माध्यमों से मिलने वाला विदेशी कर्ज पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का करीब 30 फीसदी है। 

प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद इमरान खान ने पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ द्वारा चीन के साथ किए गए सौदों को फिर से खोलने का फैसला किया था। शरीफ ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपैक) के तहत चीन के साथ 62 अरब डॉलर का सौदा किया था। इससे चीन असहज हो गया है क्योंकि इमरान की ज्यादा दिलचस्पी आईएमएफ के राहत पैकेज में है। 

यह एक राहत पैकेज होगा क्योंकि रेटिंग एजेंसी एसऐंडपी के आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान के पास केवल एक महीने के आयात के लिए ही विदेशी मुद्रा भंडार है। हालांकि पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय इन आंकड़ों से इत्तफाक नहीं रखता है। नवंबर में एसऐंडपी ने पाकिस्तान की दीर्घावधि सॉवरिन क्रेडिट रेटिंग घटाकर बी से बी माइनस कर दी थी। एजेंसी का कहना था कि पाकिस्तान में आर्थिक विकास की भविष्य लचर है और साथ ही विदेशी और राजकोषीय दबाव भी बढ़ गया है। इस रेटिंग का मतलब है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था चिंताजनक स्थिति में है। 

पिछले सप्ताह पूरे पाकिस्तान में हवाई अड्डे एक दिन से अधिक समय तक बंद रहे। इसके कारण देश को काफी नुकसान उठाना पड़ा और उसकी हालत बद से बदतर हो गई। दूसरे आंकड़े और भी खराब स्थिति बयां करते हैं। पाकिस्तान सरकार ने 2017-18 में चालू कीमतों पर आधारित जीडीपी विकास दर के 7.61 फीसदी रहने का अनुमान जताया है लेकिन रेटिंग एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तानी रुपये में गिरावट के कारण अमेरिकी डॉलर में मापी गई जीडीपी 2019 और 2020 में वास्तव में और सिकुड़ सकती है। 

आंकड़ों में इस तरह के बदलाव आईएमएफ ने पाकिस्तान को सख्त सांख्यिकी प्रणाली में डाल दिया है। आईएमएफ द्वारा इस साल जनवरी में जारी एक प्रेस नोट के मुताबिक पाकिस्तान ने आखिरकार नैशनल समरी डेटा पेज के जरिये वर्धित सामान्य डेटा प्रसार प्रणाली (ई-जीडीडीएस) की सिफारिशों को लागू कर दिया है। 

आईएमएफ ने इससे पहले अंतिम बार जून 2017 में पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था का सालाना लेखाजोखा खंगाला था। यह एक असामान्य बात थी क्योंकि यह आईएमएफ चार्टर के तहत एक सालाना प्रक्रिया है। सच्चाई यह है कि अधिकांश देशों को तो यह सालाना अनुष्ठान भी गवारा नहीं है। लेकिन पाकिस्तान अलग मिट्टी का बना है। पिछले 30 साल से उसे करीब-करीब हर साल आईएमएफ और विश्व बैंक ने निगरानी की सालाना अनुमति के दायरे से परे जाकर पाकिस्तान की गहराई से पड़ताल की। आईएमएफ ने पाकिस्तान को 12 राहत पैकेज दिए हैं जो एशिया में किसी भी देश को दिए गए सर्वाधिक पैकेज हैं। यही वजह है कि आईएमएफ को पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति की गहराई से जांच करनी पड़ी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह संतोषजनक ढंग से काम कर रहा है। 

लेकिन गहन जांच के बावजूद पाकिस्तान की 13वीं बार राहत पैकेज लेने की कोशिश कामयाब नहीं हो पा रही है। पाकिस्तान इस साल जनवरी से इसके लिए आईएमएफ से बातचीत कर रहा है। उसकी नाकामी के दो कारण हैं। इसमें एक चिंता यह है कि पाकिस्तान इन पैसों का इस्तेमाल चीन के ऋण के भुगतान में कर सकता है। देश के बजट दस्तावेजों के मुताबिक यह राशि 10.8 अरब डॉलर है। कार्यकारी बोर्ड के आकलन में कहा गया है, 'बाहरी दबावों, समायोजन मौद्रिक रुख और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से जुड़ी परियोजनाओं के लिए ज्यादा आयात के कारण पिछले वित्त वर्ष के दौरान पाकिस्तान की राजकोषीय स्थिति डांवाडोल हुई।' दूसरे शब्दों में आईएमएफ ने इस बात की गारंटी मांगी है कि उसके और चीन के कर्ज को आपस में नहीं मिलाया जाएगा। पाकिस्तान ने 27 देशों से कर्ज ले रखा है।

दूसरा कारण यह है कि आईएमएफ पाकिस्तान पर दबाव डाल रहा है कि वह अतिरिक्त राजस्व उपायों से राजकोषीय अनुशासन को मजबूत करे और खर्चों पर लगाम लगाने की कोशिश करे। लेकिन वह सामाजिक योजनाओं के लिए खर्च जारी रख सकता है। दूसरे शब्दों में कहें तो उसे रक्षा खर्च में कटौती करने को कहा गया है जो उसके सालाना बजट का 20 फीसदी से भी अधिक है। भारत में रक्षा खर्च बजट का 11 फीसदी है। पिछले सप्ताह भारत के साथ तनातनी के बाद पाकिस्तानी सेना ने अपने बजट में से एक निश्चित राशि निकाली है। 

आईएमएफ ने साथ ही पाकिस्तान स्टेट बैंक को मुद्रास्फीति के जोखिमों और व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए उपाय करने को कहा है लेकिन ऐसा करना मुश्किल है। विदेशी मुद्रा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में अतिरिक्त तरलता पैदा करती है जिससे कीमतें ऊंची बनी रहती हैं। चूंकि पाकिस्तान को 50 फीसदी बाहरी कर्ज बाजारों से जुटाना है, इसलिए उसे कर्जदाताओं को ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ेगा ताकि उनकी पाकिस्तान में दिलचस्पी बनी रहे। 

पाकिस्तान में विदेशी मुद्रा की भारी कमी है और यही वजह है कि उसने इसे बढ़ाने के लिए नए-नए उपाय करने शुरू कर दिए हैं। वह उन गिने चुने देशों में से एक है जहां मजदूरों को बाहर भेजने के लिए एक अलग मंत्रालय है। सरकार मजदूरों को खाड़ी सहित विभिन्न देशों में रोजगार के अवसरों को तलाशने में मदद करती है। इसके लिए अलग से बने मंत्रालय के पास 600,000 से अधिक लोगों के आंकड़े हैं। पाकिस्तान की एक और नीति तंबाकू को बढ़ावा देने की है। उसके वित्त मंत्रालय द्वारा इस सप्ताह जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि उसने तंबाकू के बीजों के निर्यात और विश्लेषण के लिए फिलिप मॉरिस पाकिस्तान लिमिटेड के एक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। मंत्रालय ने कहा कि विश्लेषण रिपोर्ट से भविष्य में देश में अच्छी गुणवत्ता के तंबाकू के उत्पादन में मदद मिलेगी और इसका निर्यात किया जा सकेगा।

बजट में विदेशों में रह रहे पाकिस्तानियों के लिए एक लॉटरी का प्रस्ताव है। इसके तहत अगर वे वैध माध्यमों से स्वदेश पैसा भेजते हैं तो मासिक लकी ड्रॉ में हिस्सा ले सकते हैं। 
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