बिजनेस स्टैंडर्ड - फोक्सवैगन पर लगा जुर्माना
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फोक्सवैगन पर लगा जुर्माना

आशिष आर्यन / नई दिल्ली March 07, 2019

भारत में फोक्सवैगन की डीजल कारों में उत्सर्जन मानदंडों में हेराफेरी के लिए उपकरण लगाए जाने के मामले में नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने आज जर्मनी की इस कार कंपनी पर 500 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया। कंपनी को यह रकम 2 महीने के भीतर केंद्रीय प्रदूषण नियामक बोर्ड (सीपीसीबी) के पास जमा कराने का निर्देश दिया गया है। एनजीटी ने कहा है कि सीपीसीबी इस रकम का इस्तेमालदिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता में सुधार लाने पर खर्च कर सकता है।

हालांकि इस कार कंपनी ने कहा है कि डीजल कारों के परीक्षण परिणाम 'ऑन रोड परीक्षण' शर्तों पर आधारित थे जिसके लिए कोई निर्धारित मानदंड नहीं था। जबकि एनजीटी ने कहा है कि इस मामले में हुई प्रगति को ध्यान में रखते हुए जुर्माना लगाया गया है।

न्यायमूर्ति आदर्श गोयल की अध्यक्षता वाले पीठ ने कहा, 'इस मामले में हुई प्रगति पर मुख्य रूप से गौर किया गया। हम इस रिपोर्ट में विनिर्माता की आपत्तियों को स्वीकार करने में असमर्थ हैं।' एनजीटी के आदेश पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए फोक्सवैगन ने कहा है कि वह एनजीटी के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती देगी। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा, 'फोक्सवैगन ग्रुप ने बार-बार कहा है कि समूह की सभी कारें भारत में निर्धारित उत्सर्जन मानदंडों का अनुपालन करती हैं। समूह फिलहाल एनजीटी के आदेश की प्रति मिलने का इंतजार कर रहा है।'

इसी साल 17 जनवरी को एनजीटी ने फोक्सवैगन को 24 घंटे के भीतर 100 करोड़ रुपये जमा करने अथवा भारत में उसके प्रबंध निदेशक की गिरफ्तारी और भारतीय परिसंपत्तियों की जब्ती के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया था। एनजीटी ने 16 नवंबर को अपने एक आदेश के तहत ऐसा करने के लिए कहा था लेकिन रकम जमा कराने में कंपनी के विफल रहने पर यह आदेश दिया गया है। 

पिछले साल 16 नवंबर को एनजीटी ने फोक्सवैगन को 100 करोड़ रुपये की अंतरिम रकम सीपीसीबी के पास जमा कराने का आदेश दिया था। भारत में उत्सर्जन मानदंडों पर खरा उतरने के लिए कंपनी की डीजल कारों में हेराफेरी वाले उपकरण के पाए जाने के बाद एनजीटी ने यह आदेश दिया था। हेराफेरी वाला उपकरण एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो कार कंपनियों को इंजन के प्रदर्शन में बदलाव करते हुए उत्सर्जन परीक्षण को प्रभावित करने में समर्थ बनाता है।

ट्रिब्यूनल ने पाया था कि हेराफेरी वाले इस उपकरण के खुलासे के बाद फोक्सवैगन ने इस सॉफ्टवेयर को हटाने के लिए बाजार से अपनी कारों को वापस मंगाया था। लेकिन वास्तविकता यह है कि इस प्रकार के उपकरण लगे होने पर उत्सर्जन मानदंडों को प्रभावित किया गया जिससे पर्यावरण को नुकसान हुआ। उस समय एनजीटी ने कहा था, 'वास्तव में इस विनिर्माता ने अपनी कारों में हेराफेरी वाले उपकरणों को स्थापित किया जिससे प्रथम दृष्टïया पर्यावरण नियमों का उल्लंघन होने का पता चलता है।' नवंबर में एनजीटी ने इस मामले में चार सदस्यीय समिति गठित की थी जिसमें सीपीसीबी, भारी उद्योग मंत्रालय, ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया और नैशनल एन्वायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रतिनिधियों को शामिल किया गया था। इस समिति का उद्देश्य यह पता लगाना था कि फोक्सवैगन के डीजल कारों के कारण पर्यावरण को कितना नुकसान हुआ। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि फोक्सवैगन को भारत में आम लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण को उसकी कारों के कारण हुए नुकसान के लिए कम से कम 171.34 करोड़ रुपये का जुर्माना भरना चाहिए।

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