बिजनेस स्टैंडर्ड - बिजली क्षेत्र में निवेश के उपाय
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बिजली क्षेत्र में निवेश के उपाय

नई बिजली परियोजनाओं, सुधार योजना और पनबिजली नीति को मिली मंजूरी
श्रेया जय / नई दिल्ली 03 07, 2019

इन्हें मंजूरी

11,089.42 करोड़ रुपये की लागत वाली 1,320 मेगावॉट की खुर्जा सुपर ताप बिजली परियोजना
10,439.09 करोड़ रुपये की लागत वाली 1,320 मेगावॉट की बक्सर सुपर ताप बिजली परियोजना
4,287.59 करोड़ रुपये की लागत वाली किरू पनबिजली परियोजना
तीस्ता पनबिजली परियोजना के छठे चरण को मंजूरी

बिजनेस स्टैंडर्ड बिजली क्षेत्र में निवेश के उपायसंकटग्रस्त बिजली क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने कुल 31,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं और योजनाओं को आज मंजूरी दी। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली मौजूदा सरकार के मंत्रिमंडल की अंतिम बैठक में दो ताप बिजली और दो पनबिजली परियोजनाओं के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। साथ ही पनबिजली नीति एवं अटकी परियोजनाओं के पुनरुद्घार योजना को भी हरी झंडी दे दी। 

पिछले एक दशक से पनबिजली क्षेत्र में निवेश का टोटा है, ऐसे में लंबे समय में लंबित नीतिगत उपायों को मंजूरी मिलने से इस क्षेत्र में सुधार की संभावना देखी जा सकती है। 25 मेगावॉट से अधिक की क्षमता वाली पनबिजली परियोजनाएं अब अक्षय ऊर्जा की श्रेणी में आएंगी। इससे राज्यों को पनबिजली खरीदने की बाध्यता होगी और उसे प्राथमिकता मिलेगी। इससे भारत कार्बन उत्सर्जन के आईएनडीसी के अपने एक लक्ष्य - कुल ऊर्जा खपत का 40 फीसदी आपूर्ति अक्षय ऊर्जा स्रोतों से हासिल करने में सक्षम हो सकेगा।

केंद्रीय बिजली एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा कि लागत कम रखने के लिए पनबिजली इकाइयों के सहायक बुनियादी ढांचे के लिए बजट सहायता मुहैया कराई जाएगी। उन्होंने कहा, 'बाढ़ आधुनिकीकरण कंपोनेंट की लागत, सड़क तथा पुलों आदि के लिए बजट सहायता दी जा सकती है। यह 200 मेगावॉट की परियोजनाओं के लिए प्रति मेगावॉट 1.5 करोड़ रुपये तक और 200 मेगावॉट परियोजनाओं के लिए प्रति मेगावॉट 1 करोड़ रुपये तक सीमित होगी।'

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने हाल ही में खबर प्रकाशित की थी कि केंद्र सरकार बजट सहायता के माध्यम से निर्माण अवधि के दौरान पनबिजली परियोजनाओं की लागत कम करने की योजना बना रही है। पनबिजली क्षेत्र के लिए अन्य उपायों में परियोजना का जीवनकाल बढ़ाकर 40 साल किया गया है, वहीं कर्ज पुनर्भुगतान की अवधि बढ़ाकर 18 साल कर दी गई है। नीति में हर साल 2 फीसदी शुल्क बढ़ाने की अनुमति भी दी गई है।

सिंह ने कहा, 'हमने सभी बैंकों के साथ चर्चा की और उन्होंने कर्ज पुनर्भुगतान की अवधि बढ़ाने पर अपनी सहमति जताई। हम परिचालन के शुरुआती वर्षों में पनबिजली परियोजनाओं की लागत कम करना चाहते हैं।' मंत्रिमंडल ने पनबिजली इकाइयों में निवेश के दो प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। 624 मेगावॉट की किरू पनबिजली परियोजना की 4,287.59 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत को भी मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल गई। इस परियोजना का क्रियान्वयन चिनाब वैली पावर प्रोजेक्ट्स कर रही है। यह एनएचपीसी, जम्मू कश्मीर राज्य बिजली विकास निगम तथा पीटीसी इंडिया का संयुक्त उपक्रम है। सिक्कम में तीस्ता के छठे चरण को भी मंजूरी दे दी गई है।

यह परियोजना लैंको तीस्ता हाइड्रो पावर द्वारा विकसित की जा रही है। वित्तीय संकट के कारण परियोजना समय पर पूरी नहीं हो सकी। राष्टï्रीय कंपनी लॉ पंचाट में परियोजना के खिलाफ ऋणशोधन समाधान प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके लिए एनएचपीसी ने 907 करोड़ रुपये की सबसे बड़ी बोली लगाई है। 5,748.04 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के निवेश प्रस्ताव को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने आज मंजूरी दे दी।  

बिजली क्षेत्र में कुल 40,000 मेगावॉट क्षमता की परियोजनाएं अटकी हुई हैं। उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति के सुझावों के मूल्यांकन के लिए गठित मंत्रियों के समूह की सिफारिशों को भी मंजूरी मिल गई। बिजली क्षेत्र में अटकी परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक समाधान के लिए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति गठित की गई थी।इसके अलावा अल्पावधि के बिजली खरीद करार के लिए कोयले की आपूर्ति को मंजूरी देने तथा डिस्कॉम द्वारा भुगतान में चूक करने की स्थिति में बिजली खरीद करार निलंबित होने के मामले में मौजूदा कोयला लिंकेज का इस्तेमाल करने की अनुमति देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी गई।बिजली इकाइयों के लिए कोयले की उपलब्धता में सुधार के लिए बिजली क्षेत्र की खातिर विशेष ई-नीलामी में कोयले की मात्रा बढ़ाने की अनुमति दी गई।

मंत्रिमंडल ने नियमित अंतराल पर कोयले के लिंकेज की नीलामी कराने को भी मंजूरी दी गई।सरकार ने पूर्व-घोषित लिंकेज की जगह नोडल एजेंसी के माध्यम से थोक में बिजली खरीद करने की भी अनुमति दी है। उच्च स्तरीय अधिकार प्राप्त समिति ने एनटीपीसी को पारदर्शी प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिये बिजली खरीद के लिए एग्रीगेटर के तौर पर काम करने का सुझाव दिया था। सिंह ने कहा, 'एनसीएलटी के निर्णय के बाद किसी परियोजना के स्वामित्व में बदलाव होने के बाद भी बिजली खरीद करार, ईंधान आपूर्ति समझौते और नियामकीय मंजूरियों में किसी तरह का बदलाव नहीं होगा। हम उम्मीद करते हैं कि इन सिफारिशों से ताप बिजली क्षेत्र की कई समस्याओं का समाधान हो जाएगा।'

मंत्रिमंडल ने टीएचडीसी के उत्तर प्रदेश में खुर्जा में 1,320 मेगावॉट क्षमता के सुपर थर्मल पावर प्लांट के निर्माण को भी मंजूरी दी गई। इस संयंत्र के निर्माण की अनुमानित लागत 11,089.42 करोड़ रुपये है। बिहार के बक्सर में 10,439.09 करोड़ रुपये की ताप परियोजना को भी मंजूरी दे दी गई।

Keyword: Power Sector, Government, Project, Scheme, Approval, Hydro power, Investment, Renewable Energy, INDC, Energy Consumption, Carbon, Minister, R K Singh,
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