बिजनेस स्टैंडर्ड - लक्ष्य हासिल करने के लिए विनिवेश की बढ़ेगी रफ्तार
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लक्ष्य हासिल करने के लिए विनिवेश की बढ़ेगी रफ्तार

अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 03 05, 2019

विनिवेश लक्ष्य हासिल करने पर नजर

सूटी एलऐंडटी में अपनी हिस्सेदारी करीब 2,000 करोड़ रुपये में बेचेगी 

पीएफसी-आरईसी सौदे से करीब 15,000 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे 

ड्रेजिंग कॉर्प में सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री से 1,000 करोड़ रुपये मिलेंगे 

कोल इंडिया, ऑयल इंडिया, एनएमडीसी के बायबैक से सरकार को 3,000 करोड़ रुपये प्राप्त होने की संभावना

बिजनेस स्टैंडर्ड लक्ष्य हासिल करने के लिए विनिवेश की बढ़ेगी रफ्तारसरकार लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) में अपनी पूरी हिस्सेदारी बेचने की तैयार कर रही है। वह यह कदम आगामी कुछ सप्ताह में उठाएगी क्योंकि सरकार 2018-19 के लिए 80,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य हासिल करना चाहती है। सरकार की एलऐंडटी में अंडरटेकिंग ऑफ दी यूनिट ट्रस्ट ऑफ इंडिया (सूटी) के जरिये हिस्सेदारी है। केंद्र की इस दिग्गज विनिर्माण एवं इंजीनियरिंग कंपनी (एलऐंडटी) में सूटी के जरिये 1.8 फीसदी हिस्सेदारी है। सरकार की इस हिस्सेदारी का मूल्य एलऐंडटी की शुक्रवार को बंद कीमत के हिसाब से 3,300 करोड़ रुपये अधिक है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को वरिष्ठ सरकारी सूत्रों से जानकारी मिली है कि  निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम)  ने 31 मार्च से पहले करीब 2,000 करोड़ रुपये के शेयर बेचने की योजना बनाई है। इस वित्त वर्ष में यह सुट्टी हिस्सेदारी की दूसरी बिक्री होगी। इससे पहले पिछले महीने ऐक्सिस बैंक में 3 फीसदी हिस्सेदारी बेची गई थी। दीपम फरवरी के अंत तक पहले ही विनिवेश प्रक्रिया के जरिये 56,473.32 करोड़ रुपये जुटा चुका है। लक्ष्य पूरा करने के लिए आगामी कुछ सप्ताह के दौरान कुछ और सौदे होने की संभावना है। 

इनमें कोल इंडिया, एनएमडीसी और ऑयल इंडिया द्वारा शेयर बॉयबैक भी शामिल हैं, जिनसे सरकार को करीब 3,000 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। इसके अलावा ड्रेजिंग कॉर्प में केंद्र की 73.4 फीसदी हिस्सेदारी 4 बंदरगाहों के कंसोर्टियम को बेचने की योजना है, जिससे करीब 1,000 रुपये प्राप्त होंगे। पीएफसी द्वारा आरईसी लिमिटेड में केंद्र की हिस्सेदारी खरीदने की प्रक्रिया अंतिम पड़ाव पर है। इससे केंद्र को करीब 15,000 रुपये मिलने के आसार हैं। वहीं इस साल मझगांव डॉकयार्ड और एमएसटीसी लिमिटेड के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भी आने के आसार हैं, जिनसे सरकार को करीब 1,200 रुपये की कमाई हो सकती है। 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नवंबर में 996 कंपनियों में 'शत्रु शेयरों' की बिक्री को मंजूरी दी है, जिससे सरकार को करीब 2,000 करोड़ रुपये की आमदनी हो सकती है। ये शेयर भारत में शत्रु संपत्ति के संरक्षक के पास हैं। दीपक को अब भी उम्मीद है कि वह तीन कंपनियों में से दो में रणनीतिक बिक्री पूरी करने में सफल रहेगा, जिससे 1,000 से 1,500 करोड़ रुपये की आमदनी मिलेगी। ये तीन कंपनियां- पवन हंस, स्कूटर्स इंडिया और सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड हैं। इसके अलावा निर्माण सलाहकार कंपनी एनपीसीसी का एक अन्य सरकारी कंपनी वाप्कोस अधिग्रहण कर रही है। हालांकि यह छोटा सौदा है जिससे करीब 100 करोड़ रुपये की आमदनी हो सकती है। 

सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इस साल ये विनिवेश होंगे। अन्य बहुत सी कंपनियों के आईपीओ या ओएफएस अगले साल में लाए जाएंगे क्योंकि दीपम 2019-20 में 90,000 करोड़ रुपये के विनिवेश लक्ष्य के लिए अच्छे सौदों को रखना चाहता है। वर्ष 2018-19 में ज्यादा विनिवेश आमदनी केंद्र के दो एक्सचेंज ट्रेडेड फंडों- भारत 22 ईटीएफ और सीपीएसई ईटीएफ से हुई है। 

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