बिजनेस स्टैंडर्ड - निर्यात पर अमेरिका में छूट नहीं
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निर्यात पर अमेरिका में छूट नहीं

अमेरिका ने भारत से वापस लिया तरजीही दर्जा, नहीं मिलेगी शुल्क में छूट
शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 03 05, 2019

जीएसपी के आंकड़े

1974 में शुरू की गई व्यवस्था के तहत विकासशील देशों को मिलती है छूट
भारत सबसे बड़ा लाभार्थी, 2017-18 में 19 करोड़ डॉलर का फायदा
जीएसपी के तहत 5.6 अरब डॉलर का निर्यात, कुल निर्यात का 11 फीसदी
3,700 भारतीय उत्पादों को छूट पर भारत करता है केवल 1,900 का निर्यात

बिजनेस स्टैंडर्ड निर्यात पर अमेरिका में छूट नहींअमेरिका ने कई महीनों से चल रही अटकलों को खत्म करते हुए अपनी सबसे बड़ी तरजीही व्यापार व्यवस्था जेनरेलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफरेंस (जीएसपी) के तहत भारतीय उत्पादों को शुल्क में मिलने वाली छूट को समाप्त करने की घोषणा की है। जीएसपी दो महीने बाद खत्म हो जाएगी लेकिन भारत के इसका विरोध करने की संभावना नहीं हैं।  अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने सोमवार रात को घोषणा की कि भारत और तुर्की को जीएसपी के तहत शुल्क में मिलने वाली छूट का फायदा नहीं मिलेगा। भारत इसकी उम्मीद नहीं कर रहा था। इस बारे में कई महीनों से बातचीत चल रही थी लेकिन वाणिज्य विभाग मंगलवार सुबह हरकत में आया और उसने सुबह नौ बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। 

हालांकि वाणिज्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे यूएसटीआर के आदेश को चुनौती नहीं देना चाहते हैं क्योंकि इस बारे में लंबे समय तक चली बातचीत टूट गई थी। वाणिज्य सचिव अनूप वधावन ने कहा, 'जीएसपी के फायदे सीमित हैं। इसके लिए चल रही बातचीत में इसका समाधान शामिल था लेकिन दुर्भाग्य से इसका पटाक्षेप उस तरह नहीं हुआ जिसका अलग नतीजा निकल सकता था।'

वर्ष 2017-18 में भारत ने जीएसपी के तहत अमेरिका को 5.6 अरब डॉलर का निर्यात किया था जिसमें से केवल 19 करोड़ डॉलर मूल्य की वस्तुएं ही बिना किसी शुल्क वाली श्रेणी में शामिल थीं। जीएसपी के तहत निर्यात की हिस्सेदारी भारत के अमेरिका को कुल निर्यात के करीब 11 फीसदी है। वधावन ने कहा कि अमेरिका के इस कदम से भारत पर मामूली प्रभाव पड़ेगा।

जीएसपी का सबसे अधिक फायदा भारत को ही मिला है। इसके तहत भारत ने वर्ष 2017-18 में अमेरिका को 5.6 अरब डॉलर मूल्य का सामान निर्यात किया था। जीएसपी अमेरिका की सबसे बड़ी और सबसे पुरानी व्यापार तरजीही योजना है जिसका मकसद हजारों उत्पादों को आयात शुल्क में छूट देकर विकासशील देशों को आर्थिक विकास में मदद करना है। 

व्यापार पैकेज पर अनिश्चितता
हालांकि तुर्की को भी जीएसपी से बाहर किया गया है लेकिन यूएसटीआर ने भारत की कड़ी आलोचना की है। उसने कहा, 'भारत ने कई तरह की व्यापार अड़चनें खड़ी कर रखी हैं जिससे अमेरिकी कारोबार पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ रहा है।' माना जा रहा है कि इसका पहला असर दोनों देशों के बीच पारस्परिक रूप से स्वीकार्य व्यापार पैकेज पर पड़ेगा जिस पर कई महीनों से बातचीत चल रही है। इस बारे में पिछले एक साल से बातचीत चल रही है और दोनों देशों के अधिकारी इस बारे में कम से कम पांच बार मिल चुके हैं। सूत्रों ने पहले संकेत दिए थे कि भारत व्यापार मार्जिन नीति के पक्ष में कोरोनरी स्टेंट के मूल्य पर लगाई गई सीमा हटाने पर विचार कर रहा है। लेकिन अब सरकार का कहना है कि स्वास्थ्य क्षेत्र की वास्तविकताओं और विकासशील देश के रूप में भारत की स्थिति को देखते हुए स्टेंट जैसे जरूरी चिकित्सीय उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होगी।

वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि सरकार अमेरिका से आयात होने वाले महंगे मोबाइल और स्मार्टवॉच जैसे उत्पादों पर आयात शुल्क कम करने पर सहमत हो गई थी। लेकिन वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु इस पूरे पैकेज की समीक्षा कर सकते हैं। हालांकि अधिकारियों ने साफ नहीं किया कि भारत अमेरिका से आयात होने वाली 29 अहम वस्तुओं पर आयात शुल्क बढ़ाने की घोषणा को लागू करने में देर कर सकता है या नहीं। इसे रिकॉर्ड छह बार टाला जा चुका है। इसे पिछले साल जून में बढ़ाया जाना था लेकिन अब इसे पहली अप्रैल से लागू करने की योजना है।

वधावन ने कहा कि इस बारे में आंतरिक समीक्षा की जाएगी लेकिन दूसरे अधिकारियों ने कड़ा कदम उठाने की वकालत की। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) पहले के एक फैसले के मुताबिक जीएसपी के तहत छूट की प्रकृति गैर-पारस्परिक है।  भारत ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिका ने यह छूट वापस ली तो वह उसे डब्ल्यूटीओ में खींचेगा। चूंकि यह पूरी तरह एक एकतरफा कदम है, इसलिए अमेरिका के अपने फैसले से पलटने की कम ही उम्मीद है।

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