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तकनीक के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहे भारत के कदम

बीएस बातचीत
रोमिता मजूमदार और पवन लाल /  March 05, 2019

मैकिंजी ऐंड कंपनी में वरिष्ठ पार्टनर और वैश्विक लीडर (एनालिटिक्स) नोशीर काका और कंपनी में वरिष्ठ पार्टनर तथा वैश्विक सह-लीडर (डिजिटल ऐंड एनालिटिक्स) निकोलस हेंकी विश्व में तकनीक के क्षेत्र में दो प्रभावशील व्यक्ति हैं। रोमिता मजूमदार और पवन लाल के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि भारत न सिर्फ कृत्रिम मेधा (एआई) तकनीक का केंद्र बनने की राह पर है बल्कि यहां अधिक मात्रा में डिजिटल डेटा विकसित होने के चलते विशिष्ट लाभ भी हैं। पेश हैं बातचीत के संपादित अंश: 

उद्योगों में एआई तकनीक के अनुप्रयोग की क्या क्षमताएं हैं?

हेंकी: अगर हम सभी कारोबारी समस्याओं में एआई तकनीक का उपयोग करते हैं तो इसका आकार करीब 10-15 लाख करोड़ डॉलर होगा, जबकि विश्व की कुल अर्थव्यवस्था का आकार करीब 80 लाख करोड़ रुपये है। एआई के अनुप्रयोग के लिए मार्केटिंग, निजीकरण और प्रमोशन जैसे उपभोक्ता आधारित उद्योगों के अलावा कारोबारी और बिजनेस-टू-बिजनेस कंपनियां, विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला जैसे क्षेत्र प्रमुख हैं।  

आजकल एआई तकनीक सुर्खियों में क्यों है?

हेंकी: एआई तकनीक का विचार 1950 के दशक में पैदा हुआ था। 1980 के दशक में मशीन लर्निंग तकनीक अस्तित्व में आई और 2000 के दशक में डीप लर्निंग पर अनुप्रयोग शुरू हुए। आज के समय एआई तकनीक के अधिक लोकप्रिय होने का कारण यह है कि पिछले दो साल में विश्व का करीब 90 प्रतिशत डेटा तैयार हुआ है और अब एआई तकनीक में इसका उपयोग किया जा सकता है। साथ ही, क्लाउड कंप्यूटिंग की सहायता से डेटा लिंक करने की लागत कम हो गई है। एआई, मशीन लर्निंग तथा डीप लर्निंग की सहायता से अनुमान लगाना काफी आसान हुआ है। 

काका: टोरंटो विश्वविद्यालय के रोटमैन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में प्राध्यापक और प्रख्यात एआई शोधकर्ता अजय अग्रवाल कहते हैं कि जिस तरह इंटरनेट ने संचार की लागत कम की तथा अब ऐसे क्षेत्रों में इसका प्रयोग कर रहे हैं जिसका विचार पहले नहीं किया गया था और अब एआई तथा मशीन लर्निंग आधारित मॉडल अनुमान लगाने की लागत को काफी कम कर रहे हैं। आज के समय किसी तरह के बिक्री, ग्राहक व्यवहार जैसे अनुमान के लिए पारंपरिक मशीनों का उपयोग पेशेवर कदाचार कहलाएगा। मौजूदा समय में कंपनियां ऑर्डर बुक और हालिया परियोजनाओं में कर्मियों की आवश्यकता जैसे अनुमानों के लिए एआई आधारित मॉडल का उपयोग कर रही हैं।

वैश्विक एआई क्षेत्र में भारत किस पायदान पर खड़ा है?

काका: भारत में बड़ी मात्रा में डेटाबेस और तकनीकी क्षमताएं उपलब्ध हैं। एआई तकनीक का एक प्रमुख उपयोग डेटा का विश्लेषण करना है। हम डेटा और कंप्यूटिंग क्षमता का उपयोग कर रहे हैं। कह सकते हैं कि भारत के पास एआई क्षेत्र में बौद्धिक उत्पादन केंद्र बनने के लिए जरूरी सभी सामग्री मौजूद है। ऐसा कोई कारण नहीं दिखाई दे रहा है जिसके कारण भारत एआई क्षेत्र में आगे नहीं निकल सकता। अभी भी विभिन्न क्षेत्र की कंपनियां एआई तकनीक का लाभ ले रही हैं। 

अमेरिका, चीन और कनाडा जैसे देशों ने एआई शोध और विकास में भारी निवेश किया है। क्या आप मानते हैं कि भारत सरकार जरूरी सहायता उपलब्ध करा रही है?

 

हेंकी: सरकार इस तकनीक के लिए प्रशिक्षण और उपयोग को लेकर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा सकती है। अधिकांश देश इस क्षेत्र में अपने प्रयासों से ही आगे बढ़े हैं। 

काका: सरकार अभी भी काफी प्रयास कर रही है। हालांकि जब एआई क्षेत्र में नवोन्मेष की बात आती है तो स्थानीय डिजिटल कंपनियों ने कुछ उल्लेखनीय काम किए हैं। जैसे, फ्लिपकार्ट ने अपनी आपूर्ति शृंखला और लॉजिस्टिक ऑटोमेशन के लिए काफी काम किया है। बड़े बैंकों ने ग्राहकों के लिए डिजिटल इंटरफेस तैयार किया है। हम ग्रामीण क्षेत्रों में नवोन्मेष पर भी काफी काम कर रहे हैं। हमें दूसरे देशों में हो रहे काम के अलावा अपने यहां हो रहे प्रयासों से प्रेरणा लेनी चाहिए।  

वैश्विक स्तर पर कार्लाइल समूह और ओवरस्टॉक जैसी कंपनियों का मानना है कि एआई बाजार के लिए जोखिम है। मैकिंजी इसके बारे में क्या अनुमान लगा रही है?

हेंकी: प्रत्येक तकनीक के अनपेक्षित परिणाम होते हैं। जैसे, डीप लर्निंग की सहायता से कॉल सेंटर की प्रणाली पूरी तरह बदल गई है और वे भावनात्मक तौर पर बुद्धिमान रोबोट की सहायता से कई प्रक्रियाओं को स्वचालित कर चुके हैं। हालांकि यह बदलाव काफी असमान रहा। कॉल सेंटर में स्वचालित प्रक्रिया के कारण बहुत सी नौकरियां खत्म हो गई, लेकिन उस अनुपात में नई भूमिकाएं पैदा नहीं हुईं। इसके अलावा, इन एल्गोरिद्म को प्रशिक्षित करने के लिए उपलब्ध डेटा में पक्षपात भी बड़ी चुनौती है। अगर हम चिकित्सकों को मशीन की सहायता उपलब्ध करा रहे हैं तो यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सभी अनुशंसाएं सुरक्षित रहें। रक्षा क्षेत्र में एआई के प्रयोग में भी चुनौतियां मौजूद हैं। 

इससे नौकरियां प्रभावित होंगी। लेकिन क्या एआई तकनीक आधारित नई भूमिकाएं भी विकसित होंगी?

काका: प्रगतिशील कंपनियां अपने प्रबंधन के लिए एआई तकनीक को जरूरी बना  रही हैं। इसका अर्थ यह है कि वे एआई के प्रभाव को समझ रही हैं और उसके अनुसार सिस्टम की कार्य प्रणाली बदल रही हैं। हमने पाया कि भले ही कंपनियों के पास डेटा वैज्ञानिक और इंजानियर हैं लेकिन 'डेटा ट्रांसलेटर' का काफी अभाव है। डेटा ट्रांसलेटर कंपनियों की कारोबारी समस्याओं को इस तरह से परिवर्तित करते हैं जिससे डेटा वैज्ञानिक उसे आसानी से समझ सकें। एक डेटा वैज्ञानिक के लिए आपके पास 5-7 डेटा इंजीनयर और 10-15 डेटा ट्रांसलेटर होने चाहिए। इस भूमिका के लिए गणित या सांख्यिकी में किसा बड़ी डिग्री की आवश्यकता नहीं होगी।  

क्या आप मानते हैं कि आगामी समय में मुख्य एआई अधिकारी जैसी नई भूमिकाओं की संख्या बढ़ेगी?

हेंकी: अधिकांश कंपनियों में अभी भी मुख्य एनालिटिक्स अधिकारी (सीएओ), मुख्य डिजिटल अधिकारी (सीडीओ) या मुख्य तकनीकी अधिकारी (सीटीओ) जैसे पद मौजूद हैं जो सीआईओ जैसी भूमिकाओं से काफी अलग हैं।
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