बिजनेस स्टैंडर्ड - चाय की चुस्की में एआई का स्वाद
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चाय की चुस्की में एआई का स्वाद

अभिषेक रक्षित /  March 05, 2019

भारत का चाय उद्योग एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में आपकी सुबह की चाय की प्याली अधिक सुगंधित और स्वाद भरी होगी। एफएमसीजी, विनिर्माण, बैंकिंग और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में नई प्रौद्योगिकियों से गुणवत्ता में सुधार की वजह  से भारतीय चाय बोर्ड और दूसरे चाय संगठन अपनी प्रणाली में कृत्रिम मेधा (एआई), बिग डेटा, एनालिटिक्स और मशीन लर्निंग जैसी नई तकनीकों का प्रयोग करने पर विचार कर रहे हैं जिससे चाय की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके और वैश्विक बाजार में अधिक दाम मिल सकें।

चाय श्रमिक केंद्रित क्षेत्र है जहां कुल उत्पादन लागत का करीब 50 प्रतिशत केवल वेतन देने में खर्च हो जाता है। पारंपरिक रूप से चाय उद्योग तकनीकी परिवर्तनों से दूरी बनाकर रहता है। हालांकि यह उद्योग पिछले कुछ समय से वित्तीय परेशानियों से जूझ रहा है। 

कुछ बड़ी चाय उत्पादक कंपनियां इसके लिए सरकारी नीतियों पर दोष लगा रही हैं तो कुछ दूसरी कंपनियां का कहना है कि उद्योग के सिकुड़ते आकार तथा भारतीय चाय की कम कीमत के चलते यह स्थिति आई है। भारतीय चाय बोर्ड समेत कई दूसरे निर्यातक और नीलामीकर्ताओं को लगता है कि चाय उद्योग के सामने आ रही हालिया समस्याओं के निदान के लिए सबसे पहले चाय की गुणवत्ता को बेहतर बनाना होगा। इससे न सिर्फ उत्पादकों को चाय की अच्छी कीमत मिलेगी बल्कि वैश्विक बाजारों में भारतीय चाय की साख भी बढ़ेगी।  श्रीलंका और केन्या जैसे देशों से प्रतिस्पर्धी कीमतों में बेहतर गुणवत्ता की चाय उपलब्ध होने के बाद से वैश्विक बाजारों में भारत के चाय कारोबार में काफी गिरावट आई है। 

अब भारतीय चाय उद्योग गुणवत्ता की समस्या के समाधान के लिए तकनीक का उपयोग करने की योजना बना रहा है। चाय उद्योग की तकनीकी शाखा चाय अनुसंधान संघ (टीआरए) ने आईआईटी खडग़पुर और स्टार्टअप एगनेक्स्ट टेक्नोलॉजीज के साथ साझेदारी की है जिसके तहत एआई, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स समर्थित सिस्टम विकसित किया जाएगा। यह तकनीक प्रसंस्करण के लिए भेजने से पहले तोड़ी गई सभी पत्तियों में से पतली और साफ पत्तियों के प्रतिशत की गणना करेगी। पतली और साफ पत्तियां कली की शीर्ष दो छोटी पत्तियां होती हैं और चाय की गुणवत्ता इन पर ही निर्भर करती है। इनका प्रतिशत बढऩे से चाय की गुणवत्ता बढ़ेगी और उत्पादकों को अधिक कीमत मिलेगी। 

इस सिस्टम में एक बॉक्स जैसा उपकरण और मोबाइल ऐप होता है और प्रायोगिक परियोजना के तौर पर इसका उपयोग हो रहा है। इसमें विविध प्रकार के सेंसर और कैमरा लगे हैं जो सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म के जरिये इंटरनेट से जुड़े हैं। इसके शुरू होने पर चाय प्रसंस्करण कंपनियों में ये उपकरण लगा दिए जाएंगे, जो पतली और साफ पत्तियों के प्रतिशत की गणना करेंगी। मोबाइल ऐप की सहायता से लोग सीधे चाय की पत्ती की फोटो खींचकर टीआरए को भेज सकते हैं। इन दोनों प्रक्रियाओं में ऐप और उपकरण द्वारा भेजे गए आंकड़े बैक एंड पर विजन तकनीक और एआई की मदद से आईआईटी खडग़पुर और टीआए द्वारा प्रसंस्कृत किए जाते हैं। इसका परिणाम ना सिर्फ पत्तियों की गणना करता है बल्कि पौधे के प्रकार, स्वास्थ्य और कई दूसरे संकेतकों के बारे में बताती है।

टीआरए के सचिव जयदीप फुकन कहते हैं, 'इसके जरिये उपयोगकर्ता को पता होता है कि क्या इस फसल में गुणवत्तापूर्ण चाय तैयार करने के लिए सही मात्रा में अच्छी पत्तियां हैं।' उन्होंने बताया कि मोबाइल ऐप में दो इंटरफेस हैं। एक उत्पादक के लिए और दूसरा चाय फैक्ट्रियों के लिए। 

टीआरए ने तय किया है कि चाय में कम से कम 60 प्रतिशत अच्छी गुणवत्ता वाली पत्तियां होनी चाहिए लेकिन चाय कंपनियां इस मानक को बरकरार रखने में विफल हो जाती हैं। हालांकि एक बार ऐप और ये उपकरण काम करने लगेंगे तो इससे चाय बोर्ड इंस्पेक्टरों को भी निगरानी रखने में आसानी होगी और चाय की गुणवत्ता बरकरार रहेगी। फिलहाल हाथों से ही पत्तियों की गणना होती है और इस प्रक्रिया में हेरफेर और धोखाधड़ी की काफी संभावनाएं होती हैं। फुकन कहते हैं, 'एक बार स्वचालित प्रक्रिया शुरू होने पर नई तकनीक पत्तियों का गणना में होने वाली किसी भी विसंगति को दूर कर देगी।'

फिलहाल ऐप ने 55 प्रतिशत सटीकता प्राप्त कर ली है। टीआरए चाहता है कि 85 प्रतिशत सटीकता के स्तर पर आने के बाद इसे लॉन्च किया जाए। विशेषज्ञ उद्योग द्वारा तकनीक को अपनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों को सकारात्मक मान रहे हैं। चाय बोर्ड के उपाध्यक्ष ए के रॉय कहते हैं, 'चाय उद्योग अपनी समस्याओं को सुलझाने के लिए तकनीक का प्रयोग करने लगा है।' टीआरए की इंजीनियरिंग समिति के प्रमुख अतुल अस्थाना कहते हैं कि अलग अलग चाय बागानों में स्मार्ट उपकरणों का उपयोग किया जा सकता है जिससे उनकी गुणवत्ता की जांच हो सके और कारोबार में पारदर्शिता लाई जा सके। वह कहते हैं, 'इसके जरिये हमें विभिन्न बागानों के बारे में पता होगा जिससे कारोबारी गतिविधियों में सुधार ला सकेंगे।'

भारतीय चाय की गुणवत्ता में सुधार से उसकी कीमतें भी बढ़ेंगी। यह देखना होगा कि अगर ऐसा होता है और चाय के क्षेत्र में डिजिटलीकरण सफल रहता है तो क्या आपके कप में आई चाय का स्वाद बदल जाएगा। 
Keyword: Tea, Indian Tea, AI, Big Data, analytics, Banking, Telecom, FMCG, Construction,
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