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ई-ट्रेडिंग की आफत, मंडी से मुंह मोड़ रहे व्यापारी

बीएस संवाददाता / जगदलपुर March 05, 2019

कृषि उपज मंडी में पिछले साल से ई-ट्रेडिंग की व्यवस्था लागू होने के बाद परिसर की रौनक ही गायब हो गई है। लंबे समय से उपज की आवक का अकाल झेल रहे व्यापारियों के सब्र का बांध टूट गया। व्यापारी संघ का आरोप है कि यदि इस व्यवस्था में परिवर्तन या सुधार न हुआ तो वह दिन दूर नहीं, जब मंडी परिसर से व्यापारी और संग्राहक दूरी बना लेंगे।  

बीते लंबे समय से मंडी में आवक नहीं होने से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। कामकाज के अभाव में कर्मचारी परेशान हो रहे हैंं, वहीं मंडी में पसरा सन्नाटा व्यापारियों को परिसर का रुख करने से रोक रहा है। बताया गया है कि आवक न होने के चलते हमाल भी मंडी से पलायन कर रहे हैं और रोजी-रोटी की तलाश में संजय बाजार सहित अन्य ठिकानों पर रोजगार की तलाश करते नजर आ रहे हैं। ठंड के दिनों में सरकारी स्तर पर हुई धान की खरीदी की वजह से मंडी में आवक नहीं हो रही थी। हालांकि सरकारी खरीदी बंद होने के बाद कुछ समय के लिए धान सहित अन्य कुछ उपजों की आवक हुई, लेकिन मंडी की रौनक लौटाने के लिए यह नाकाफी सिद्ध हुआ। कहा जा रहा है कि मंडी में खरीद-फरोख्त के लिए लागू की गई ई-ट्रेडिंग की व्यवस्था इसके लिए दोषी है।  

नहीं आई इमली

मंडी के व्यापारियों ने बताया कि इमली का सीजन शुरू हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन अब तक एक भी संग्राहक इमली लेकर मंडी नहीं पहुंचा है। व्यापारी ई-ट्रेडिंग की व्यवस्था को इसके लिए दोष दे रहे हैं। मंडी प्रशासन को पहले मंडी शुल्क के रूप में  अच्छी-खासी आमदनी हुआ करती थी। मंडी सूत्र बताते हैं कि तीन-चार महीने के इमली सीजन में मिलने वाले शुल्क से मंडी का पूरे साल भर का खर्च निकल जाया करता था। पिछले साल शासन ने तय किया कि अब मंडी में इमली का शुल्क नहीं वसूल किया जाएगा। संग्राहक जो उपज लेकर मंडी आएंगे, उसकी बोली और नीलामी की प्रक्रिया के बीच केवल सफाई शुल्क ही मंडी प्रशासन वसूल सकेगा। एक समय तक मंडी के लिए कमाई का जरिया रही इमली अब चंद रुपये ही दे रही है। एेसे में  मंडी प्रशासन की इस पूरे मसले पर अरुचि समझी जा सकती है। 

विदेशों में खासी डिमांड

बस्तर की मंडी से इमली विदेशों तक भेजी जाती रही है। बीते साल भी पानी जहाज से इमली पाकिस्तान, सऊदी अरब, श्रीलंका सहित कई मुल्कों तक भिजवाई गई थी। पाकिस्तान में भारत, खासकर बस्तर की इमली की खासी मांग रहती है। यहां से हर साल थोक में  इमली का निर्यात होने की वजह से जगदलपुर मंडी को एशिया की सबसे बड़ी इमली मंडी का दर्जा प्राप्त है। हालांकि अब बदली हुई परिस्थितियों में संग्राहक और व्यापारी दोनों ही परेशान नजर आ रहे हैं। 

ई-ट्रेडिंग का विरोध क्यों?

संग्राहक जब मंडी में पहुंचता है तो उसके द्वारा लाए गए माल की ऑनलाइन नीलामी और खरीदी करनी पड़ती है। नीलाम की गई उपज की रकम तत्काल संग्राहक को नहीं मिलती। बाद में संग्राहक के अकाउंट में पैसे ऑनलाइन ट्रांसफर किए जाते हैं। चूंकि आवक लेकर पहुंचने वालों को हाथ में पैसे नहीं मिलते, इसलिए ई-ट्रेडिंग की व्यवस्था को लेकर उसका असंतोष स्वाभाविक माना जा सकता है। वैसे भी बस्तर में अशिक्षा-अज्ञानता की वजह से प्लास्टिक मनी, ऑनलाइन ट्रांजेक्शन तथा ऑनलाइन बैंकिंग व्यवस्था सरकार के काफी प्रयासों के बावजूद अब तक पटरी पर नहीं आ पाई है। ऐसे में मंडी में ई-ट्रेडिंग को लेकर असंतोष स्वाभाविक माना जा सकता है। 

इस बारे में मंडी व्यापारी संघ के सचिव कोमल महावर का कहना है कि जब से ई-ट्रेडिंग की व्यवस्था लागू हुई है, तब से खरीदारों और विक्रेताओं को काफी दिक्कत  हो रही है। इसका विकल्प शीघ्र तलाशा जाना चाहिए। मंडी सचिव सुरेश चौरे कहते हैं कि मंडी के निरीक्षक और उपनिरीक्षकों से कहा गया है कि वे आय बढ़ाने प्रयास करें। विक्रेताओं से अपील की जा रही है कि वे अपनी उपज मंडी तक लेकर आएं। 

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