बिजनेस स्टैंडर्ड - सीमा पार ऋणशोधन के लिए अध्यादेश
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सीमा पार ऋणशोधन के लिए अध्यादेश

वीणा मणि / नई दिल्ली 03 04, 2019

आएगा अध्यादेश

आईबीसी में जोड़ा जाएगा अलग अध्याय
विदेशी निवेशकों की राह होगी आसान
भारत में अपने कर्ज का कर सकेंगे दावा
मॉडल कानून पर होगा आधारित

बिजनेस स्टैंडर्ड सीमा पार ऋणशोधन के लिए अध्यादेशविदेशी निवेशकों को भारत में राहत देने के लिए सरकार ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) में संशोधन के लिए जल्दी ही एक अध्यादेश ला सकती है। इस संशोधन के तहत सीमा पार ऋणशोधन के लिए आईबीसी में एक अलग अध्याय जोड़ा जाएगा। इससे विदेशी निवेशकों के साथ ही भारतीय निवेशकों को भी विदेशी स्थित इकाई से कर्ज वसूली का दावा करने में सहूलियत होगी। एक सूत्र ने कहा, 'हमारी योजना इस प्रस्ताव को मंत्रिमंडल में रखने की है ताकि इस पर अध्यादेश लाया जा सके।'

यह अध्यादेश सीमा पार ऋणशोधन के लिए यूएनसीआईटीआरएएल मॉडल कानून पर आधारित होगा। इस संबंध में अगली सरकार ही संसद में विधेयक पेश कर पाएगी। सीमा पार ऋणशोधन के तहत विदेशी निवेशक भारतीय कंपनियों से अपने निवेश का दावा कर सकते हैं। साथ ही अगर विदेशी कंपनियों ने भुगतान में चूक की तो भारतीय निवेशक भी उनके खिलाफ अपने कर्ज का दावा कर सकते हैं।

अभी सीमा पार ऋणशोधन के प्रावधान आईबीसी की धारा 234 और 235 में शामिल हैं। अभी तक इन्हें अधिसूचित नहीं किया गया है और यही वजह है कि ये लागू नहीं हुए हैं। अलबत्ता इन प्रावधानों की अपनी सीमा है। कंपनी मामलों के मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि आईबीसी के तहत सीमा पार ऋणशोधन भारत के विदेशी सरकारों के साथ द्विपक्षीय संधियों पर आधारित है। इन संधियों को अंतिम रूप देने में लंबा समय लगेगा। इतना ही नहीं, हर संधि अलग तरह की होगी जिससे विदेशी निवेशकों में अनिश्चितता की स्थिति पैदा होगी।  

इससे भारतीय अदालतों और राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) आदि में भ्रम पैदा होगा जिन्हें हर संधि की अलग व्याख्या करनी होगी। अधिकारियों का कहना है कि इसी वजह से सरकार सीमा पार ऋणशोधन पर एक अलग अध्याय लाना चाहती है जो दुनियाभर में मान्य होगा और अच्छी तरह संगठित होगा। इसके पीछे सरकार का मकसद देश में कारोबार के माहौल को और सुगम बनाना है क्योंकि इससे दो देशों के बीच सूचना के आदान प्रदान में कम समय लगेगा। 

अधिकारियों का कहना है कि इससे विदेशी निवेशकों और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं के बीच यह संदेश जाएगा कि भारत वित्तीय क्षेत्र में सुधारों की दिशा में मजबूती के साथ आगे बढ़ रहा है। विश्व बैंक की आसान कारोबार वाले देशों की सूची में भारत 2017 में 100वें स्थान पर था जबकि 2018 में वह 77वें स्थान पर पहुंच गया। कंपनी मामलों के मंत्रालय में सचिव इंजेटी श्रीनिवास की अगुआई वाली एक समिति ने सीमा पार ऋणशोधन के लिए यूएनसीआईटीआरएएल मॉडल कानून अपनाने की सिफारिश की थी। अमेरिका, ब्रिटेन और सिंगापुर सहित 44 देशों ने इस कानून को अपने यहां लागू किया है।
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