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छोटे का कर्ज खरीदेंगे बड़े ऋणदाता

अरिंदम मजूदार / नई दिल्ली 03 04, 2019

एसबीआई-पीएनबी खरीद सकते हैं अन्य बैंकों का कर्ज

राइट निर्गम का आकार 2,500 करोड़ रुपये से बढ़कर 3,500 करोड़ रुपये होगा

बिजनेस स्टैंडर्ड छोटे का कर्ज खरीदेंगे बड़े ऋणदातासंकट में फंसी जेट एयरवेज के प्रमुख ऋणदाता ऐसे छोटे कर्जदाताओं के कर्ज को खरीद सकते हैं जो कर्ज-इक्विटी पुनर्गठन प्रक्रिया में शामिल नहीं होना चाह रहे हैं। इसके साथ ही कंपनी के 2,500 करोड़ रुपये के प्रस्तावित राइट निर्गम का आकार बढ़कर करीब 3,500 करोड़ रुपये हो सकता है। नैशनल इन्वेस्टमेंट ऐंड इन्फ्रास्ट्रक्चर फंड (एनआईआईएफ) पहले के प्रस्तावित 19.5 फीसदी हिस्सेदारी से अब ज्यादा हिस्सा ले सकता है। हालांकि अभी इस सॉवरिन फंड ने इसके बारे में अंतिम निर्णय नहीं किया है। समाधान योजना के तहत इन दो पहलुओं को भी शामिल करने को अंतिम रूप दिया जा रहा है ताकि 8,500 करोड़ रुपये के वित्तपोषण के अंतर को पाटा जा सके। समाधान प्रक्रिया में देरी हो रही है क्योंकि कई शेयरधारकों ने अभी शर्तों पर अपनी सहमति नहीं दी है।

समाधान प्रक्रिया से वाकिफ एक बैंकर ने कहा, 'ऋणदाताओं के कंसोर्टियम के बीच बातचीत में यह बात सामने आई थी कि कम से कम तीन भारतीय कर्जदाता और एक विदेशी बैंक कर्ज-इक्विटी पुनर्गठन प्रक्रिया में भागीदारी करने को इच्छुक नहीं हैं। ऐसे में प्रमुख ऋणदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) अंतर-ऋणदाता करार का उपयोग कर सकते हैं जिससे छोटे कर्जदाता अपना कर्ज बेचकर कंपनी से निकल सकते हैं।' 

अंतर-ऋणदाता करार के अनुसार अगर 66 फीसदी कर्जदाता पुनर्गठन योजना से सहमत हैं तो वह अन्य सभी ऋणदाताओं के लिए बाध्यकारी होगा। ऐसे में असंतुष्ट कर्जदाताओं के पास अपने कर्ज को अन्य ऋणदाताओं के हाथों बेचने का विकल्प होगा।  एसबीआई और पीएनबी का जेट एयरवेज में 65 फीसदी से अधिक का कर्ज फंसा है, ऐसे में प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए उन्हें अंतर-ऋणदाता करार का उपयोग करने का अधिकार है। इनके कंसोर्टियम में आईडीबीआई बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक, सिंडिकेट बैंक के साथ ही सिटी बैंक, मशरेक बैंक और स्टैंडर्ड चार्टर्ड जैसे विदेशी बैंक शामिल हैं।

एसबीआई की योजना के अनुसार ऋणदाता कंपनी के कर्ज को संचयी भुनाने योग्य तरजीही शेयर (सीआरपीएस) में बदला जाएगा। ऐसे में कंपनी जब मुनाफे में आएगी तो ऋणदाताओं को इन शेयरों पर लाभांश मिलेगा। मामले के जानकार एक शख्स ने बताया, 'अन्य बैंक अपने कर्ज को सीआरपीएस में बदलने को लेकर सहज नहीं हैं। उन्हें डर है कि जेट एयरवेज घाटे वाली कंपनी है और आने वाले वर्षों में वह लाभांश देने में सक्षम नहीं होगी।'

समाधान प्रक्रिया में इक्विटी निवेश, कर्ज पुनर्गठन और संपत्तियों की बिक्री करने की योजना है। जेट की संपत्तियों की बिक्री के लिए बीएलआरपी ने विमानों की बिक्री, पट्टा वापस करने या उनके पुनर्वित्त का सुझाव दिया है। जेट के निदेशक मंडल ने समाधान योजना के मसौदे को मंजूरी दे दी है जिसमें कर्ज को 1.14 करोड़ शेयरों में बदला जाएगा। कर्जदाता राइट निर्गम के आकार को भी 2,500 करोड़ रुपये से बढ़ाकर करीब 3,500 करोड़ रुपये करने की संभावना तलाश रहे हैं। 

एक शख्स ने कहा, 'राइट निर्गम के आकार को पहले के 2,500 करोड़ रुपये से करीब 1,000 करोड़ रुपये और बढ़ाने का निर्णय इसलिए किया जा रहा है क्योंकि एतिहाद एयरवेज 1,450 करोड़ रुपये और निवेश करने पर सहमत नहीं है। इसके तहत ज्यादा शेयर खरीदने के लिए एनआईआईएफ से बातचीत चल रही है।' बैंक की अगुआई में जेट की पुनर्गठन योजना में देरी हो रही है क्योंकि एतिहाद एयरवेज सहित कुछ शेयरधारकों ने इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि सूत्रों ने बताया कि अबूधाबी की विमानन कंपनी 11 मार्च को इस प्रक्रिया को मंजूरी दे देगी। अभी जेट में एतिहाद एयरवेज की 24 फीसदी हिस्सेदारी है।

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