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आलू किसान फिर परेशान

बीएस संवाददाता / लखनऊ March 04, 2019

उत्तर प्रदेश में एक बार फिर आलू की भारी पैदावार के बाद किसान वाजिब कीमतें न मिलने से निराश हैं। प्रदेश में इस साल आलू का उत्पादन 162 लाख टन से अधिक रहने का अनुमान है जबकि बीते साल पैदावार 155 लाख टन के आसपास रही थी। पैदावार को देखते हुए कीमतें न गिरने का हवाला देते हुए प्रदेश सरकार ने आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं बढ़ाया है।

थोक बाजार में जहां इस समय किसानों के आलू की खरीद 500 रुपये प्रति क्विंटल पर हो रही है, वहीं ज्यादातर छोटे व मझोले किसान अपना आलू खेतों से 300-350 रुपये क्विंटल के भाव बेच रहे हैं। लागत से डेढ़ गुना ज्यादा कीमत की मांग करते हुए प्रदेश के किसान इस बार सरकार से आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य 750 रुपये क्विंटल मांग रहे हैं।

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के प्रवक्ता आलोक वर्मा का कहना है कि बीते साल आलू का न्यूनतम समर्थन मूल्य 487 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया था। इस साल नई फसल की आवक के समय बाजार में गिरी हुई कीमतों को देखते हुए प्रदेश सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य 600 रुपये क्विंटल रखने की सिफारिश केंद्र सरकार के पास भेजी थी। हालांकि केंद्र सरकार ने उत्पादन और बाजार मूल्यों का हवाला देते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि प्रति हेक्टेयर उत्पादन 10 फीसदी से कम होने व बाजार के भाव में बीते साल से 10 फीसदी से ज्यादा गिरावट होने पर ही न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया जा सकता है और फिलहाल दोनों परिस्थितियां नहीं हैं।

बाजार में इस बार नई फसल आने के साथ ही आलू की कीमतों में गिरावट का सिलसिला शुरू हो गया था। कीमतें न मिलने के विरोध में किसानों ने बाराबंकी सहित कई जगहों पर आलू सड़क पर फेंके। किसानों ने आलू का समर्थन मूल्य जल्द से जल्द घोषित करने और शत प्रतिशत सरकारी खरीद की मांग की है।

भाकियू प्रवक्ता वर्मा का कहना है अभी आलू की निकासी का काम चल रहा है। लगभग 30 फीसदी आलू निकाला जा चुका है जबकि ओलावृष्टि, बारिश के चलते अब जो आलू निकल रहा उसमें काफी तादाद या तो खराब है या कमजोर किस्म का है। उनके मुताबिक खराब मौसम के चलते किसान पहले से घाटे में आ चुके हैं और ऐसे में सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य भी नहीं बढ़ाया तो नुकसान बढ़ेगा। वर्मा का कहना है कि खाद, सिंचाई और मजदूरी की बढ़ी कीमतों के चलते आलू की लागत मंडी तक लाते लाते 350 रुपये से कम नही पड़ रही और भाड़ा वगैरह मिलाकर वर्तमान न्यूनतम समर्थन मूल्य में किसान को कुछ भी नहीं बच रहा है।

गौरतलब है प्रदेश सरकार ने बीते साल की तरह इस बार भी जरूरत पडऩे पर आलू की सरकारी खरीद करने का ऐलान किया है। हालांकि अभी इसकी मात्रा नहीं तय की गई है।

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