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म्युचुअल फंडों से नियमित आय के ये हैं बेहतर विकल्प

सरबजीत सेन /  March 04, 2019

क्या आप म्युचुअल फंडों से नियमित आय के बारे में विचार कर रहे हैं? अगर ऐसा है तो सवाल यह है कि म्युचुअल फंडों में निवेश का सबसे बेहतर तरीका क्या है ताकि उनसे लगातार आमदनी मिलती रहे। निवेशकों ने कैलेंडर वर्ष 2017 में मासिक लाभांश देने वाली हाइब्रिड म्युचुअल फंड योजनाओं को हाथोंहाथ लिया था क्योंकि चढ़ते बाजारों और परंपरागत सावधि जमाओं की तुलना में ज्यादा लाभांश आय ने इन फंडों को नियमित आमदनी का अच्छा स्रोत बना दिया था। हालांकि निवेश विशेषज्ञों का मानना है कि फंडों से नियमित आमदनी के लिहाज से ये योजनाएं सबसे अच्छी नहीं हो सकतीं। 

हर सामान्य व्यक्ति के नजरिये से म्चुचुअल फंड उस लाभ में से लाभांश का भुगतान करते हैं, जो योजना ने अपने निवेश का एक हिस्से बेचकर अर्जित किया है। म्युचुअल फंड की नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) चुकाए गए लाभांश के बराबर घटती है। इसका सीधा मतलब है कि अगर आप लाभांश नहीं लेने का फैसला करते हैं तो आपके पूरे पैसे (नेट एसेट) का योजना में निवेश बना रहेगा। 

मात्रा और समय सुनिश्चित नहीं 

कोई भी योजना उस लाभ में से ही लाभांश का भुगतान कर सकती है, जो वह अपने निवेश को बेचकर कमाती है। इस तरह लाभांश का समय और मात्रा सुनिश्चित नहीं हैं। हालांकि ऐसी बहुत सी योजनाएं हैं, जिनमें मासिक लाभांश मिलता है। लेकिन लाभांश कब-कब मिलेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। लाभांश की मात्रा भी योजना को होने वाले लाभ पर निर्भर करता है। इन्वेस्टऑनलाइन डॉट इन के संस्थापक अभिनव अंगरीश ने कहा, 'लाभांश में घटत-बढ़त हो सकती है, विशेष रूप से इक्विटी म्युचुअल फंडों में। हाइब्रिड और बॉन्ड फंडों में निश्चित आय का एक हिस्सा होता है, इसलिए उनमें नियमित लाभांश चुकाने के लिए नकदी सृजन की बेहतर संभावना होती है। हालांकि यह जरूरी नहीं है कि लाभांश चुकाया ही जाए। यह इस बात पर निर्भर करता है कि कोई योजना कितनी सरप्लस नकदी सृजित करती है। हालांकि इक्विटी म्युचुअल फंडों में लुघ अवधि में उतार-चढ़ाव रहता है, लेकिन वे लंबी अवधि में आम तौर पर सालाना लाभांश का भुगतान करते हैं।'

जो योजनाएं इक्विटी में निवेश करती हैं, उनमें लाभांश की मात्रा में ज्यादा उतार-चढ़ाव रह सकता है। हालांकि निवेेशकों को तेजी के दौर में मोटा लाभांश मिल सकता है, लेकिन ये योजनाएं गिरावट के दौर में किसी लाभांश का भुगतान नहीं करतीं। ऐसा बीते वर्षों में साबित भी हो चुका है। 

मासिक आय योजनाएं 2008 में वैश्विक वित्तीय मंदी से पहले के वर्षों में काफी लोकप्रिय थीं। इन योजनाओं ने लगातार कई महीनों तक लाभांश को टाला था। अगर शेयर बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रहता है तो फंड प्रबंधकों के लिए नियमित रूप से लाभांश की घोषणा करना मुश्किल हो जाता है।  

कर का पहलू 

म्युचुअल फंडों से प्राप्त लाभांश का एक नकारात्मक पहलू यह है कि इस पर लाभांश वितरण कर (डीडीटी) लगता है। बहुत से वर्षों तक डेट म्युचुअल फंडों पर 29.12 फीसदी लाभांश वितरण कर (डीडीटी) लगता था। इससे बहुत से निवेशकों के लिए डेट फंडों से लाभांश लुभावना नहीं रह गया है। हालांकि पिछले साल इक्विटी म्युचुअल फंडों द्वारा घोषित लाभांश को कर मुक्त बना दिया गया। मगर 1 अप्रैल, 2018 से इक्विटी म्युचुअल फंडों पर 10 फीसदी की दर से डीडीटी लगा दिया गया है। इससे इक्विटी फंडों से लाभांश का आकर्षण कम हो गया है। कर के लिहाज से कोई इक्विटी फंड वह योजना है, जो अपना कम से कम 65 फीसदी पैसा भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों पर सूचीबद्ध इक्विटी या उससे संबंधित योजनाओं में निवेश करती है।  

एसडब्ल्यूपी अच्छा विकल्प 

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि म्युचुअल फंड आपको नियमित आय नहीं मुहैया करा सकते? आपको केवल लाभांश विकल्प से आगे सोचना होगा। आपको इसकी जगह नियमित निकासी योजना (एसडब्ल्यूपी) का विकल्प चुनना चाहिए। यह नियमित निवेश योजना के ठीक उलट है। निवेशक अपनी नियमित नकदी की आवक की जरूरत पूरी करने के लिए हर महीने पूर्व निर्धारित राशि के मूल्य की इकाइयों को भुनाने का विकल्प चुन सकता है। अगर कोई व्यक्ति किसी इक्विटी फंड या किसी एग्रेसिव हाइब्रिड (पहले बैलेंस्ड फंड) में अपने पैसे को बढऩे देता है और फिर एसडब्ल्यूपी के लिए पंजीकरण करता है तो बेची गई सभी इकाइयों पर होने वाले लाभ पर 10 फीसदी कर लगेगा।

महत्त्वपूर्ण बात यह है कि हर साल 1 लाख रुपये तक के दीर्घावधि लाभ को दीर्घावधि पूंजी लाभ कर से छूट दी गई है। आप किसी बॉन्ड फंड में भी एसडब्ल्यूपी का विकल्प चुन सकते हैं। पैसाबाजार डॉट कॉम के सीईओ और सह-संस्थापक नवीन कुकरेजा ने कहा, 'निवेशकों को नियमित आय की योजनाएं चुनते समय अपनी पूंजी की सुरक्षा, पूर्वानुमेयता, प्रतिफल की बारंबारता और प्रतिफल पर कर को ध्यान में रखना चाहिए। म्युचुअल फंडों से नियमित हासिल करने का सबसे अच्छा तरीका अल्पावधि डेट फंडों और आर्बिट्राज फंडों में एकमुश्त राशि का निवेश करें। अति लघु अवधि के डेट फंडों में नियमित निकासी योजना (एसडब्ल्यूपी) और आर्बिट्राज फंडों में लाभांश का विकल्प अनपाएं। एसडब्ल्यूपी का विकल्प अपनाने से आपके म्युचुुअल फंड से पूर्व निर्धारित राशि को भुनाकर नियमित समय अंतराल पर आपके बैंक खाते में डाला जाता है।' 

कुकरेजा ने कहा कि अति लघु अवधि फंड और आर्बिट्राज फंडों में काफी हद तक पूंजी सुरक्षित होती है। जहां तक आर्बिट्राज फंडों का सवाल है, लाभांश विकल्प एसडब्ल्यूपी विकल्प की तुलना में कर के लिहाज से ज्यादा किफायती है। बॉन्ड फंडों में निवेश को तीन साल से अधिक रखने पर प्राप्त होने वाले लाभ पर इंडेक्सेशन सहित 20 फीसदी की दर से दीर्घावधि पूंजी लाभ कर लगता है। इससे तीन साल के बाद निकासी पर कर का असर कम हो जाता है। अगर आप तीन साल पूरे होने से पहले एसडब्ल्यूपी को अपनाते हैं तो आपके लाभ पर सीमांत आयकर दर से कर लगेगा। 

कुकरेजा निवेशकों को यह सलाह भी देते हैं कि वे एसडब्ल्यूपी के बारे में विचार करते समय योजनाओं के एक्जिट लोड को भी ध्यान में रखें। वह कहते हैं, 'फंडों के एक्जिट लोड का पता लगाएं क्योंकि कुछ फंड निर्धारित समय से पहले निकासी पर 1 फीसदी लोड वसूल करते हैं। प्रत्यक्ष योजनाओं को चुनें क्योंकि उनका खर्च का अनुपात कम होता है। इसलिए उनमें प्रतिफल नियमित योजनाओं से अधिक होता है।'

Keyword: Mutual Fund, investment, Return, Deposit, Scheme, Net Asset, Equity,
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