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स्वास्थ्य बीमा खरीद रहे हैं तो इन आंकड़ों पर दें ध्यान

संजय कुमार सिंह /  March 04, 2019

यदि आप स्वास्थ्य बीमा खरीद रहे हैं तो विभिन्न कंपनियों की पॉलिसी की विशेषताओं की तुलना अवश्य करें। आंकड़ों के आधार पर चयन से आपको सही कंपनी और उत्पाद का चयन करने में मदद मिल सकती है। इसलिए यहां ऐसे कुछ आंकड़े पेश किए जा रहे हैं जिन पर आपको विचार करना चाहिए।

दावा अनुपात:  हाल में प्रकाशित आईआरडीए की सालाना रिपोर्ट जारी की गई जिसमें 2017-18 के लिए विभिन्न श्रेणियों की बीमा कंपनियों का औसत इनक्योर्ड क्लेम्स रेशियो (आईसीआर) बताया गया। आईसीआर कुल एकत्रित प्रीमियम के लिए चुकाई जाने वाली कुल क्लेम (दावा) पूंजी का प्रतिशत है। सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के लिए यह औसत 2017-18 में 109.86 प्रतिशत के साथ काफी अधिक था। इसके बाद निजी क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के लिए 71.32 प्रतिशत पर था। प्रमुख (स्टैंडएलॉन) स्वास्थ्य बीमा कंपनियों के संदर्भ में यह 59.58 प्रतिशत के साथ सबसे कम आंकड़ा था। सिक्योर नाउ इंश्योरेंस ब्रोकर के सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक कपिल मेहता ने कहा, 'सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों के लिए आईसीआर उनके उत्पाद मिश्रण की वजह से अधिक रहा है।

समूह स्वास्थ्य व्यवसाय में उनकी अच्छी भागीदारी है जिसमें अधिक दावे स्वीकार किए गए। दूसरी तरफ, स्टैंडएलॉन स्वास्थ्य बीमा कंपनियां रिटेल व्यवसाय अधिक करती हैं, यही वजह है कि उनका औसत आईसीआर काफी कम है।' कुछ अन्य कारकों की वजह से भी आईसीआर प्रभावित हुआ है। इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस के कार्यकारी निदेशक (क्लेम) आर कन्नन कहते हैं, 'कुछ कंपनियां मुख्य रूप से राजस्व-केंद्रित हैं। उन्हें जोखिम के संदर्भ में अधिक नरम मानकों को अपनाने की जरूरत है। अन्य कंपनियां मुनाफा-केंद्रित हैं और इसलिए उन्हें अधिक सख्त अंडरराइटिंग मानकों को अपनाने की जरूरत है। कुछ कंपनियों ने अपने प्रीमियम लेवल को अन्य की तुलना में कम बनाए रखा है क्योंकि वे अपना बहीखाता मजबूत बनाना चाहती हैं।'

विश्लेषकों का कहना है कि आईसीआर न तो बहुत ज्यादा होना चाहिए और न ही कम। यदि यह बहुत ज्यादा (जैसे 110 प्रतिशत) है तो इसका मतलब है कि व्यवसाय से जुड़ी कंपनी एकत्रित प्रीमियम की तुलना में क्लेम पर अधिक रकम चुकाती है। सेबी के साथ पंजीकृत निवेश सलाहकार पर्सनलफाइनैंसप्लान डॉट इन के संस्थापक दीपेश राघव कहते हैं, '100 प्रतिशत से ऊपर का आईसीआर बीमा कंपनी की ओर से कमजोर अंडरराइटिंग का संकेत माना जा सकता है। यह एक उपयुक्तस्थिति भी नहीं है। आप इस तरह की बीमा कंपनी से जल्द ही प्रीमियम बढ़ाने की आशंका का शिकार हो सकते हैं, क्योंकि वह 100 प्रतिशत से ऊपर के आईसीआर के साथ लंबे समय तक परिचालन बरकरार नहीं रख सकती।'

यदि आईसीआर 60 प्रतिशत से कम है तो यह सकारात्मक माना जा सकता है, क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि कंपनी के अंडरराइटिंग मानक अच्छे हैं। यदि वह सिर्फ स्वस्थ ग्राहकों का चयन करती है और उसकी पॉलिसी नई हैं तो ऐसी कंपनी को कुछ ही क्लेम प्राप्त होंगे। दूसरी तरफ, कम आईसीआर से यह भी संकेत मिलता है कि कंपनी की प्रीमियम दर अधिक रहती है और इसे नीचे लाए जाने की गुंजाइश मौजूद होती है। अन्य संभावना यह हो सकती है कि आईसीआर कम इसलिए हो सकता है क्योंकि कंपनी बड़ी तादाद में दावे ठुकराती है। मेहता ने कहा, 'मैं उन कंपनियों से परहेज करने की सलाह दूंगा जिनका आईसीआर 90 प्रतिशत से ज्याा या 60 प्रतिशत से कम है।' प्रत्येक बीमा कंपनी के रिटेल व्यवसाय के लिए आईसीआर का आंकड़ा आईआरडीए की सालाना रिपोर्ट में भी मौजूद है।

दावा निपटान अनुपात: यह अन्य ऐसा प्रमुख आंकड़ा है जिस पर संभावित खरीदार को विचार करना चाहिए। यह आपको चुकाए गए कुल क्लेम का प्रतिशत बताता है। मेहता कहते हैं, 'ऐसी बीमा कंपनी का चयन करें जिसका क्लेम निपटान अनुपात 90 प्रतिशत या इससे अधिक हो।'

हालांकि एक चेतावनी भी है। नई बीमा कंपनियों के मामले में निष्कर्ष निकालने को लेकर सतर्क रहें। प्रतीक्षा अवधि वाली स्वास्थ्य पॉलिसी तीन तरह की होती हैं। पहली, जिन्हें कूलिंग अवधि कहा जाता है और 30 दिन तक वैध होती हैं जिस दौरान कुछ भी (दुर्घटना को छोड़कर) कवर नहीं किया जाता है। दूसरी प्रतीक्षा अवधि दो साल तक की हो सकती है, जिस दौरान पॉलिसी में निर्धारित कुछ बीमारियों (जैसे मोतियाबिंद और घुटना प्रत्यारोपण) को कवर नहीं किया जाता है। तीसरी है पहले से मौजूद बीमारियों के लिए प्रतीक्षा अवधि, जो दो से चार साल तक रह सकती हैं। भारती अक्सा जनरल इंश्योरेंस के उपाध्यक्ष एवं प्रमुख (हेल्थ अंडरराइटिंग एंड प्रोडक्ट डेवलपमेंट) निकुंज घीवाला कहते हैं, 'अक्सर पॉलिसी के पहले दो या तीन वर्षों में, कई दावों को इसलिए खारिज कर दिया जाता है क्योंकि ग्राहक प्रतीक्षा अवधि के मानकों की अनदेखी कर क्लेम करते हैं।' बड़े अनुपात में दो या तीन वर्ष पुरानी पॉलिसी वाली कंपनियों के मामले में कम क्लेम निपटान अनुपात हो सकता है, लेकिन इससे कंपनी के इरादे या क्लेम निपटान के संदर्भ में पॉलिसी का सही ढंग से आकलन नहीं किया जा सकता।

शिकायत आधारित आंकड़े:  आपको जिस अन्य संकेतक पर ध्यान देने की जरूरत हो सकती है, वह है कंपनी उसके द्वारा जारी की गई पॉलिसी की तुलना में उसे मिलने वाली शिकायतों की संख्या। बीमा कंपनी की वेबसाइट पर 'पब्लिक डिस्क्लोजर' पर जाएं और फिर फॉर्म एनएल-41 देखें। सामान्य बीमा कंपनी के मामले में, कंपनी के लिए शिकायत आधारित संख्या पूरी कंपनी के तौर पर होगी, न कि सिर्फ स्वास्थ्य पॉलिसी के संदर्भ में। 

प्रीमियम की तुलना: विभिन्न कंपनियों के प्रीमियम की तुलना भी करें जिससे कि आप ज्यादा रकम न चुका दें। हालांकि सिर्फ किसी एक मामले में प्रीमियम की तुलना नहीं की जा सकती। आपको पेश किए जा रहे फायदों को भी ध्यान में रखने की जरूरत होगी। बीमा कंपनी अधिक प्रीमियम वसूल सकती है, लेकिन यह तभी उचित हो सकता है जब उसकी पॉलिसी में अच्छे फीचर हों।

जब आप संबद्घ मानकों को लेकर संतुष्टï महसूस करें तो पॉलिसी की विशेषताओं पर विचार करें। कन्नन कहते हैं, 'कुछ पॉलिसी व्यापक कवरेज मुहैया कराती हैं। वे अस्पताल में भर्ती होने से पहले औद बाद के दावों के लिए रकम चुकाने में अधिक उदार हैं। इनमें कुछ उप-सीमाएं और शर्तें होती हैं, जैसे कमरे का किराया, और इनमें कम या शून्य भुगतान की जरूरत होती है। कुछ पॉलिसी वेलनेस बेनीफिट के साथ भी पेश की गई हैं। ऐसी पॉलिसी को पसंद किया जाना चाहिए।' 
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