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विश्व बैंक और सुरक्षा परिषद की शरण में पाक

भास्वर कुमार /  March 04, 2019

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को पानी की आपूर्ति रोकने की धमकी दी थी। इसमें नदियां भी शामिल हैं जो सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान में हिस्से में आई थीं। पाकिस्तान ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के मुताबिक पाकिस्तान उन देशों की सूची में तीसरे स्थान पर है जहां पानी की भारी कमी है। पाकिस्तान पहले भी कई बार कह चुका है कि अगर भारत ने उसका पानी रोकने की कोशिश की तो इसे 'युद्घ की हरकत' माना जाएगा।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने विश्व बैंक को भारत के इस बयान का संज्ञान लेने को कहा है। तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए थे। 

कुरैशी ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि भारत सरकार के वरिष्ठï मंत्री पानी को हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की धमकी दे रहे हैं। पत्र में कहा गया है कि इस समझौते के तहत लंबे समय से चली आ रही कानूनी व्यवस्थाओं का उल्लंघन किया जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र को भी इस समझौते को लेकर कुछ आशंकाएं हैं। 2017 की रिपोर्ट में उसने कहा था कि 1990 के दशक की शुरुआत से पानी की कमी के कारण सिंधु जल संधि पर दबाव है और इसका अस्तित्व खतरे में है। 

केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को कहा था कि पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को समर्थन देकर सिंधु जल संधि की भावना को मार दिया है। उन्होंने कहा कि लोग मांग कर रहे हैं कि पाकिस्तान को एक बूंद पानी भी नहीं दिया जाना चाहिए। अलबत्ता उन्होंने स्पष्टï किया कि इस बारे में कोई भी फैसला उनका विभाग नहीं ले सकता है बल्कि यह निर्णय सरकार और प्रधानमंत्री को करना है। सिंधु जल संधि के तहत तीन पूर्वी नदियां रावी, सतलज और ब्यास भारत के हिस्से आई थी जबकि तीन पश्चिमी नदियां सिंधु, झेलम और चेनाब पाकिस्तान को मिली थीं। अलबत्ता भारत को विशेष इस्तेमाल के लिए पश्चिमी नदियों के पानी का इस्तेमाल करने की अनुमति दी गई थी। गडकरी के बयान के कुछ घंटे बाद पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय के सचिव ख्वाजा शुमैल ने पत्रकारों से कहा कि अगर भारत पूर्वी नदियों के पानी का इस्तेमाल करता है तो उनके देश को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि में भारत को ऐसा करने का अधिकार दिया गया है। लेकिन अगर भारत ने पाकिस्तान को आवंटित पश्चिमी नदियों के पानी को मोडऩे की कोशिश तो पाकिस्तान इसका विरोध करेगा। 

पाकिस्तानी मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पाकिस्तान ने भारत को तनाव खत्म करने को कहा है। एक पाकिस्तानी अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इस्लामाबाद से कहा कि भारत पाकिस्तान का पानी नहीं रोक सकता है। पाकिस्तान ने भारत से कहा है कि इस तरह के बयान क्षेत्र के लिए खतरनाक हैं और इनसे बचा जाना चाहिए। 

भारत और पाकिस्तान के बीच तीन बार जंग हो चुकी है लेकिन इससे सिंधु जल संधि पर कभी आंच नहीं आई। इसे खत्म करने का दावा करना आसान है लेकिन ऐसा करना मुश्किल है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इससे भारत को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। वॉशिंगटन डीसी के थिंक टैंक वूडरॉ विल्सन सेंटर में दक्षिण एशिया मामलों के सीनियर एसोसिएट माइकल कूगलमैन ने कहा, 'सिंधु जल संधि को खत्म करने की धमकियों के बावजूद मुझे नहीं लगता है कि भारत ऐसा करेगा। अगर भारत ऐसा करता है तो उसे कई तरह के जोखिम झेलने पड़ेंगे। इस संधि पर विश्व बैंक ने भी हस्ताक्षर किए हैं और अगर भारत एकतरफा इसे खत्म करता है तो अंतरराष्ट्रीय आलोचना का सामना करना पड़ेगा। इतना ही नहीं अगर पाकिस्तान की जलापूर्ति बंद करता है तो पाकिस्तान का मित्र चीन अपने इलाके में बांध बनाकर भारत का पानी रोक सकता है। अगर भारत ने बड़े बांध बनाकर पानी के प्रवाह को रोका तो इससे भारत में भारी बाढ़ आ सकती है।'

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत की इस धमकी पर प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं करेगा क्योंकि अगर भारत ऐसा करता है तो इसके पाकिस्तान में विनाशकारी परिणाम होंगे। पाकिस्तान इसे केवल धमकी मानता है। 

2025 में पानी का संकट

जहां तक सिंधु जल संधि का सवाल है तो इस पर पाकिस्तान का बहुत कुछ दांव पर लगा है। आईएमएफ की 2015 की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान पानी के लिए सिंधु और उसकी सहायक नदियों पर निर्भर है। पाकिस्तान दुनिया के उन 36 देशों में शामिल है जहां पानी की बहुत कमी है। आजादी के समय पाकिस्तान में प्रति व्यक्ति पानी की उपलब्धता 5,600 घन मीटर थी जो 2015 में घटकर घटकर 1,017 घन मीटर रह गई है और आगे इसमें और कमी होने की आशंका है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 तक पाकिस्तान में पानी की मांग बढ़कर 27.4 करोड़ एकड़ फुट पहुंचने का अनुमान है जबकि आपूर्ति 19.1 करोड़ एकड़ फुट रहेगी। इस तरह मांग और आपूर्ति का अंतर करीब 8.3 करोड़ एकड़ फुट रहेगा। 

पाकिस्तान जल संसाधन शोध परिषद की रिपोर्ट और भी भयावह तस्वीर पेश करती है। इसमें कहा गया है कि 2025 तक देश में पानी की भारी कमी हो सकती है। पानी की कमी से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर सबसे ज्यादा मार पड़ सकती है। 2009 में पाकिस्तान का 90 फीसदी पानी सिंचाई और दूसरी कृषि गतिविधियों में इस्तेमाल होता था। पाकिस्तान सांख्यिकी विभाग के मुताबिक पाकिस्तान के सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी में कृषि की 24 फीसदी हिस्सेदारी है। देश का आधा श्रम बल इसी क्षेत्र में लगा है। इससे पाकिस्तान को सबसे ज्यादा विदेशी आय होती है। 

विश्व आर्थिक मंच की कारोबार करने के क्षेत्रीय खतरों के बारे में 2018 में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक पानी का संकट पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था के लिए आतंकी हमलों और अनियंत्रित महंगाई से भी बड़ा खतरा है। 
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