बिजनेस स्टैंडर्ड - हमारे वक्त के दो गड़बड़ मुल्क पाकिस्तान और उत्तर कोरिया
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, July 16, 2019 10:04 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

हमारे वक्त के दो गड़बड़ मुल्क पाकिस्तान और उत्तर कोरिया

टीसीए श्रीनिवास-राघवन /  March 03, 2019

मेरे मन में एक सवाल है जिसका उत्तर कतई आसान नहीं है। उत्तर कोरिया जो समूचे दक्षिण कोरिया पर दावा करता है, उसने पाकिस्तान की तरह व्यवहार क्यों नहीं किया? पाकिस्तान भारत के एक अत्यंत छोटे से भूभाग पर लगातार अपना दावा करता आ रहा है। क्योंकि तमाम अन्य क्षेत्रों में उत्तर कोरिया और पाकिस्तान के बीच अलग करने जैसी कोई बात ही नहीं है। दोनों एक ही थैली के चट्टेबट्टे नजर आते हैं। 

दोनों देश लगभग एक ही समय अपने औपनिवेशिक शासकों से आजाद हुए। कोरिया को 1945 में आजादी मिली और पाकिस्तान का निर्माण सन 1947 में हुआ। दोनों का जन्म बंटवारे की वजह से हुआ। एक विभाजन साझा लेकिन अनिच्छा भरी सहमति से हुआ। दूसरे के लिए अमेरिका और रूस ने मजबूर किया। 

ब्रिटिश शासकों को लगा कि भारत और पाकिस्तान दोनों अपना-अपना शासन संभाल सकते हैं जबकि रूस और अमेरिका को लगा कि कोरिया स्वशासन के लिए उपयुक्त नहीं है। ऐसे में ब्रिटिश शासक भारत और पाकिस्तान को तो उनके भरोसे छोड़ गए लेकिन रूस और अमेरिका ने उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया को अपने-अपने संरक्षण में ले लिया। बाद के दिनों में जहां भारत और दक्षिण कोरिया में स्वशासन की काबिलियत नजर आई, वहीं पाकिस्तान और उत्तर कोरिया में यह क्षमता उस कदर नहीं नजर आई। 

पाकिस्तान ने भारत से विभाजन के दो महीने के भीतर ही युद्घ का आगाज कर दिया। उत्तर कोरिया ने 1950 में दक्षिण कोरिया के साथ युद्घ शुरू कर दिया। सन 1953 में उसकी सेना को हार का सामना करना पड़ा और सन 1953 में ही कोरिया का औपचारिक विभाजन पूरा हुआ। ठीक यही बात पाकिस्तान के साथ घटित हुई और वह 1971 में दो टुकड़ों में बंट गया। 

दोनों कोरिया के बीच अब असैन्य क्षेत्र (डीएमजेड) है। भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा या एलओसी है। रूस ने उत्तर कोरियाई सेना को प्रशिक्षित किया और उसे हथियार दिए। उसने उन्हें परमाणु तकनीक भी उपलब्ध कराई। 
अमेरिका उस हद तक तो नहीं गया लेकिन उसने भी पाकिस्तान को हथियार मुहैया कराए। सन 1980 के दशक में जब पाकिस्तान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में बढ़ रहा था तब भी अमेरिका ने अपनी आंखें मूंदे रखीं। 

सन 1990 के दशक में रूस ने उत्तर कोरिया का साथ छोड़ दिया और सन 1990 के दशक में अमेरिका ने भी पाकिस्तान को त्याग दिया। दोनों की वजह एक ही थी। उन्हें ये देश मुसीबत नजर आने लगे थे। 

अमेरिकी दबाव से मुक्त होने के बाद पाकिस्तान ने सन 1998 में परमाणु परीक्षण किया। उत्तर कोरिया ने 2006 में यह परीक्षण पूरा किया। आज दोनों चीन के संरक्षण में हैं। इन दोनों देशों के खिलाफ किसी भी तरह के अंतरराष्ट्रीय सहयोग की स्थिति में चीन अपने वीटो अधिकार का प्रयोग करता है। उत्तर कोरिया की आर्थिक स्थिति बुरी तरह बिगड़ी हुई है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की हालत भी कोई अच्छी नहीं है।

परंतु दोनों के बीच समानताओं का सिलसिला वहीं समाप्त हो जाता है। उत्तर कोरिया ने शुरुआत में कुछ आतंकी गतिविधियों को अंजाम दिया लेकिन 1983 में उसने इनसे निजात पा ली। पाकिस्तान ने उसी साल अक्टूबर महीने में उसने इसका आगाज किया। उत्तर कोरिया के सैनिकों ने कुछ अवसरों पर असैन्यीकृत सीमा का उल्लंघन करने का प्रयास किया। उसने पश्चिमी सागर में उत्तरी सीमा का भी उल्लंघन किया। परंतु पाकिस्तान ने ऐसी हरकत कई बार की। उसने एक बार नहीं बल्कि चार अवसरों पर नियंत्रण रेखा पर लड़ाई तक छेड़ दी। इस मानक पर तो पाकिस्तान उत्तर कोरिया से मीलों आगे नजर आता है। 

उत्तर कोरिया की सेना को यह पता है कि उसकी सीमा क्या है और वही उसी अनुरूप व्यवहार करता है। पाकिस्तानी सेना किसी सीमा को नहीं मानती है और वह जहां अवसर मिलता है वहां खुराफात कर बैठती है। 

एक अंतर यह है कि पाकिस्तान अपनी सरकार के प्रमुखों का चुनाव निर्वाचन के माध्यम से करता है जबकि उत्तर कोरिया में यह आनुवांशिक तरीके से होता है। परंतु दोनों देशों की असली ताकत उनकी सेना में निहित है। पाकिस्तान में प्रधानमंत्री सेनाध्यक्ष को नियुक्त करता है लेकिन उस पर नियंत्रण उसी सेनाध्यक्ष का होता है। उत्तर कोरिया में सबकुछ वहां के शासक के हाथ में है लेकिन वहां भी सेना की ताकत ही सर्वोपरि है। अगर सेना चाहे तो उसे एक क्षण में हटा सकती है। 

पाकिस्तान में सक्रिय राजनीति है, जीवंत नागरिक समाज है, एक हद तक स्वतंत्र मीडिया और अच्छी न्यायपालिका भी है। उत्तर कोरिया में इसका ठीक उलट सच है। पाकिस्तान के लोगों में हास्यबोध है जबकि उत्तर कोरिया में तो किसी के नागरिक के हंसने तक पर उसके नेता का ही अधिकार है। 

एक वक्त था जब अमेरिका पाकिस्तान से लाड़ लड़ाता था और उत्तर कोरिया के साथ किसी उपद्रवी की तरह व्यवहार करता था। अब मामला एकदम उलटा हो चुका है। उत्तर कोरिया को अमेरिका समेत सभी देशों द्वारा उसके 65 साल के निर्वासन से उबारा जा रहा है। पाकिस्तान को अमेरिका समेत ये सारे देश पीछे धकेल रहे हैं। रूस अतीत में हमेशा पाकिस्तान की अनदेखी करता आया, अब वह उसे अलग-थलग करने की कोशिश का विरोध कर रहा है। वहीं चीन पुराने रिश्तों में नई जान फूंकने की कोशिश में लगा हुआ है। 

इन बातों को लेकर हर किसी के मन में बुरी भावना है पाकिस्तान और उत्तर कोरिया पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। कहा जा सकता है कि अन्य देशों में जहां देश के पास सेना होती है वहीं पाकिस्तान और उत्तर कोरिया में सेना के पास मुल्क है। 

Keyword: Pakistan, South Korea, Nation, Freedom, Country, Partition,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या डीएचएफएल समाधान में बढ़ेगी बैंकों की मुश्किल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.