बिजनेस स्टैंडर्ड - राज्यों को इस साल कम राजस्व की उम्मीद
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राज्यों को इस साल कम राजस्व की उम्मीद

ईशान बख्शी / नई दिल्ली March 03, 2019

पिछले कुछ हफ्तों में कई राज्य सरकारों ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए अपना बजट पेश किया है। बिजनेस स्टैंडर्ड ने 11 राज्यों के बजट का विश्लेषण कर पाया है कि इनमें चार बड़ी समानताएं नजर आ रही हैं। पहला, कुल मिलाकर राज्यों ने 2019-20 के बजट अनुमान में यह दिखाया है कि उनके अपने कर राजस्व की वृद्घि दर 2018-19 के संशोधित अनुमान के मुकाबले बहुत अधिक धीमी रहेगी। दूसरा, जहां इन राज्यों ने अपने गैर-कर राजस्व को लगभग पिछले वर्ष के स्तर पर ही रखा है वहीं केंद्र सरकार से मिलने वाली सहायता में अगले वित्त वर्ष के लिए अनुदान में मामूली कमी की गई है।    

तीसरा, वित्त वर्ष 2020 में राजस्व की कम प्राप्ति को देखते हुए राज्यों ने अपने कुल खर्च में वृद्घि को रोक दिया है। यहां तक कि वित्त वर्ष 2020 में पूंजीगत परिव्यय भी धीमी रफ्तार से बढऩा संभावित है। चौथा, ज्यादातर राज्यों ने आने वाले वर्षों में अपने राजकोषीय घाटे को नीचे लाने का प्रावधान किया है।

यह विश्लेषण 11 राज्यों के बजट पर आधारित है। ये 11 राज्य आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, ओडिशा, पंजाब, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल हैं। इनमें से कुछ राज्यों का आंकड़ा पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च से ली गई है वहीं अन्य राज्यों के आंकड़े सीधे राज्य बजट के कागजातों से लिए गए हैं। 

मोटे तौर पर, वित्त वर्ष 2020 में इन राज्यों का संयुक्त रूप से अपना कर राजस्व बढ़कर 6.12 लाख करोड़ रुपये अनुमानित है जो वित्त वर्ष 2019 के 5.54 लाख करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान से 10.5 फीसदी अधिक है। तुलनात्मक तौर पर देखें तो इन राज्यों का अपना कर राजस्व वित्त वर्ष 2019 के संशोधित अनुमान से 21.5 फीसदी की दर से बढ़ा है।

जहां आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों ने अगले वर्ष अपने कर संग्रह की वृद्घि दर में अच्छी खासी कमी आने की उम्मीद जताई है, यह स्थिति केवल इन्हीं राज्यों तक सीमित है। उदाहरण के लिए केरल को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2020 में उसके अपने कर संग्रह में 23.8 फीसदी का उछाल आएगा जो वित्त वर्ष 2019 के संशोधित अनुमान से 14.3 फीसदी अधिक है।

इन राज्यों के बजट में यह भी तथ्य सामने आया है कि इन्हें अगले वर्ष में गैर-कर राजस्वों में सकारात्मक वृद्घि की उम्मीद नहीं है। वित्त वर्ष 2020 के बजट अनुमान में इन राज्यों का गैर-कर राजस्व 1.2 लाख करोड़ रुपये रहने की संभावना है जो कि लगभग पिछले वर्ष के बराबर ही है। इतना ही नहीं, पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और पंजाब जैसे राज्यों को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2019 के मुकाबले वित्त वर्ष 2020 में उनका गैर-कर राजस्व कम रहेगा।   

जहां तक केंद्र से हस्तांतरण का सवाल है, इन राज्यों को उम्मीद है कि केंद्रीय करों में उनकी हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2020 में धीमी रफ्तार से बढ़ेगी। यह केंद्रीय बजट में दिखे रुझान के मुताबिक ही है जिसमें दिखाया गया था कि राज्यों की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2020 में 10.9 फीसदी बढ़ेगी जबकि वित्त वर्ष 2019 के संशोधित अनुमान में यह 13.1 फीसदी थी।
यह अपने आप में दिलचस्प है कि इन राज्यों को केंद्र से मिलने वाली अनुदान सहायता मौजूदा वित्त वर्ष के मुकाबले अगले वर्ष मामूली कम रहने की उम्मीद है। मसलन उत्तर प्रदेश को अनुदान सहायता वित्त वर्ष 2019 के संशोधित अनुमान 75,360 करोड़ रुपये से घटकर वित्त वर्ष 2020 के बजट अनुमान में 68,062 करोड़ रुपये रहने की उम्मीद है। वहीं असम को यह पिछले साल के 32,971 करोड़ रुपये के मुकाबले घटकर 22,248 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। हालांकि, इसमें आंध्र प्रदेश जैसा अपवाद भी है जिसे वित्त वर्ष 2020 में 60,722 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है जो कि पिछले साल के 50,696 करोड़ रुपये से अधिक है।    
राजस्व संग्रह की वृद्घि दर में कमी की आशंका को देखते हुए राज्य सरकारों ने अपने खर्चों में कटौती की है। वित्त वर्ष 2019 के संशोधित अनुमान में 26 फीसदी की विचलन दर से वृद्घि के बाद इन राज्यों का कुल खर्च वित्त वर्ष 2020 में महज 7.8 फीसदी बढ़कर 19.64 लाख करोड़ रुपये हो सकता है जो वित्त वर्ष 2019 के संशोधित अनुमान में 18.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। पूंजीगत व्यय में भी भारी कमी आने की उम्मीद है।
राजकोषीय घाटे के मोर्चे पर इनमें से ज्यादातर राज्यों ने आगामी वर्ष में या तो अपना राजकोषीय घाटा समान स्तर पर रहने या इसमें मामूली कमी आने की उम्मीद जताई है। मसलन पंजाब जिसका राकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2020 में जीएसडीपी का 3.4 फीसदी पर पहुंच सकता है, उसे 2020-21 में यह घटकर 2.4 फीसदी पर आने की उम्मीद है। इसी तरह छत्तीसगढ़ का राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2019 के संशोधित अनुमान में 6 फीसदी तक बढ़ गया है। इसे वित्त वर्ष 2020 में इसमें 3 फीसदी की कमी आने की उम्मीद है। 
Keyword: Punjab, West Bengal, State, Tamilnadu, Assam, Financial Year, Budget, Revenue,
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