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रक्षा, रेल, पुलिस विभाग को खरीदना होगा स्पेक्ट्रम

मेघा मनचंदा / नई दिल्ली March 03, 2019

रक्षा, पुलिस, रेलवे और सरकारी प्रसारणकर्ता जैसे स्पेक्ट्रम के गैर वाणिज्यिक इस्तेमाल करने वालों को इसे 'बाजार द्वारा तय' मूल्य पर खरीदना होगा। मंत्रिमंडल द्वारा सितंबर 2018 में मंजूर की गई नई दूरसंचार नीति के मुताबिक स्पेक्ट्रम के गैर वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए आवंटन पर विचार हो रहा है, जिसमें बाजार मूल्य का तरीका इस्तेमाल हो सकता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि स्पेक्ट्रम पर कोई कब्जा करके नहीं बैठ सकता, कोई भी इसे अकुशल तरीके से इस्तेमाल नहीं कर सकता और इसका इस्तेमाल जन उद्देश्यों के लिए होगा। 

व्यापक रूप से देखें तो स्पेक्ट्रम का आवंटन गैर वाणिज्यिक निजी इस्तेमाल और गैर वाणिज्यिक सार्वजनिक इस्तेमाल जैसे कुछ सिद्धांतों के आधार पर होगा। पहली श्रेणी के स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल मुख्य रूप से रक्षा या पुलिस द्वारा आंतरिक सेवाओं के लिए किया जाता है। दूसरी श्रेणी में आने वाले स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल सरकारी प्रसारक दूरदर्शन करता है। 

इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, 'हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कोई स्पेक्ट्रम पर कब्जा जमाकर न बैठे, इसका अकुशल तरीके से इस्तेमाल न हो और इसे आम लोगो के मकसद से इस्तेमाल किया जाए।' उन्होंने कहा कि स्पेक्ट्रम की बिक्री मामूली दरों पर होगी, मामूली कीमत यह सुनिश्चित करने के लिए ली जाएगी कि यह बगैर इस्तेमाल न पड़ा रह जाए। 

रेलवे के मामले मे यह उपरोक्त उल्लिखित दोनों श्रेणियों में आता है। अगर स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल आंतरिक संचार जैसे सिगनलिंग के काम में किया जाता है तो इसे गैर वाणिज्यिक निजी इस्तेमाल की श्रेणी में माना जाएगा। 

यह नीति भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) की सिफारिशों के आधार पर बेहतरीन वैश्विक प्रचलन के मुताबिक तैयार की जाएगी। सितंबर 2018 में कैबिनेट ने नई दूरसंचार नीति 'नैशनल डिजिटल कम्युनिकेशंस पॉलिसी 2018' को मंजूरी दी थी। इसका मकसद 40 लाख नौकरियों का सृजन और 2022 तक दूरसंचार उद्योग में 100 अरब डॉलर निवेश आकर्षित करना, इस क्षेत्र की जीडीपी में हिस्सेदारी 2017 के 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 8 प्रतिशत करने के अलावा नेट न्यूट्रलिटी के सिद्धांतों को बढ़ावा देना है। 

इस क्षेत्र में वैश्विक बदलावों को देखते हुए नई दूरसंचार नीति की जरूरत महसूस की गई, जिससे उभरती तकनीकों जैसे 5जी और आईओटी (इंटरनेट आफ थिंग्स), उपभोक्ताओं के अनुरूप और ऐप्लिकेशन के मुताबिक काम हो सके। जहां तक माइक्रोवेव या बैकहॉल स्पेक्ट्रम का सवाल है, दूरसंचार विभाग बैकबोन एयरवेब्स के आवंटन की नीति पर काम कर रहा है। 

माइक्रोवेव एक्सेस या एमडब्ल्यूए स्पेक्ट्रम का आवंटन कम दूरी की मोबाइल सेवाएं मुहैया कराने के लिए दूरसंचार ऑपरेटरों को किया जाता है। जनवरी में नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट मे कहा गया था कि एमडब्ल्यूए स्पेक्ट्रम का आवंटन 2015 में टेलीकॉम ऑपरेटर को पहले आओ पहले पाओ के आधार पर किया गया था, जो दिसंबर की 2012 की डीओटी समिति की सिफारिशों के खिलाफ था। 
Keyword: Defence, Rail, Railway, Police, Government Broadcaster, Market Value, Spectrum, Mobile, Doordarshan, Television,
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