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दोगुनी हुईं अग्रणी एफपीआई की परिसंपत्तियां

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई March 03, 2019

पिछले साल लगातार हुई निकासी के बावजूद लंबी अवधि में देश की प्रगति की क्षमता पर विदेशी निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। भारतीय शेयरों में 25 अग्रणी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश की कीमत दिसंबर 2013 से दिसंबर 2018 के बीच की अवधि (पांच साल) में दोगुनी से ज्यादा हो गई। यह जानकारी प्राइम डेटाबेस के आंकड़ों से मिली। यह ऐसे समय मेंं हुआ है जब देश के बेंचमार्क सूचकांकों में 70 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। इन विनेशकों में कई सॉवरिन वेल्थ फंड मसलन गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर, अबु धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड और नॉर्जेज शामिल हैं।

आंकडों से पता चलता है कि भारतीय शेयरों में फंडों का निवेश एक फीसदी से ज्यादा है। देसी इक्विटी को आगे बढ़ाने वालों में शामिल एफपीआई के पास भारतीय इक्विटी का करीब 25 फीसदी है। उधर, नियंत्रक हिस्सेदारों यानी प्रवर्तकों के पास करीब 50 फीसदी है।

पांच अग्रणी एफपीआई में से तीन कैपिटल, गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर और वेनगार्ड के निवेश की कीमत इस अवधि में तीन गुनी से ज्यादा हो गई। उदाहरण के तौर पर यूरो पैसिफिक ग्रोथ फंड की होल्डिंग दिसंबर 2018 के आखिर में बढ़कर 80,739 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। फंड की पांच वैश्विक होल्डिंग में 31 जनवरी 2019 तक भारतीय कंपनियां एचडीएफसी बैंक (2.7 फीसदी) और रिलायंस इंडस्ट्रीज (2.3 फीसदी) शामिल थी।

यूरोपैसिफिक ग्रोथ फंड (जो दुनिया भर में करीब 150 अरब डॉलर की परिसंपत्तियों का प्रबंधन करता है) एक ओपन ऐंडेड इक्विटी म्युचुअल फंड है और इसका प्रबंधन कैपिटल रिसर्च ऐंड मैनेजमेंट कंपनी करती है। यह फंड मुख्य रूप से यूरोप, एशिया और पैसिफिक बेसिन की कंपनियों में निवेश करता है। दिसंबर 2018 के आखिर में गवर्नमेंट ऑफ सिंगापुर की होल्डिंग 51,181 करोड़ रुपये थी जबकि वेनगार्ड की 25,163 करोड़ रुपये थी। विदेशी ब्रोकरेज गोल्डमैन सैक्स रणनीतिक तौर पर भारत को लेकर मार्च 2014 से ओवरवेट है और उम्मीद कर रही है कि सरकारी नीतियां व ढांचागत सुधार से आर्थिक रप्तार में इजाफा होगा और कंपनियों के लाभ में बढ़ोतरी होगी। सितंबर 2018 के नोट में सुनील कौल की अगुआई में गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने कहा, आय सुधरी है और भारतीय इक्विटी पिछले पांच वर्षो में दोगुनी हो गई है, लेकिन हमें लगता है कि चुनाव के चलते बाजार एकीकृत होगा और निफ्टी 12,000 पर पहुंचेगा।

पिछले पांच साल में सरकार ने कई नीतिगत बदलाव किए हैं मसलन जीएसटी, दिवालिया संहिता, एफडीआई की सीमा में नरमी, सब्सिडी का प्रत्यक्ष हस्तांतरण, वित्तीय समावेशन और डिजिटलीकरण के कदम, मेक इन इंडिया कार्यक्रम, उज्ज्वला योजना और उदय योजना। एफपीआई के लिए सरकार ने कर की व्यवस्था को और स्पष्ट किया है और मॉरीशस व सिंगापुर के साथ कर संधि को संशोधित किया है।

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