बिजनेस स्टैंडर्ड - कृषि कंपनियों की बिक्री पर असर
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कृषि कंपनियों की बिक्री पर असर

दिलीप कुमार झा / मुंबई February 27, 2019

वर्तमान रबी सीजन खत्म होने जा रहा है, लेकिन कृषि इनपुट वितरकों के पास बड़ी मात्रा में स्टॉक है। इससे जून से शुरू होने वाले आगामी खरीफ सीजन में कृषि उत्पाद कंपनियों की बिक्री में वृद्धि पर असर पडऩे के आसार हैं।  विश्लेषकों का अनुमान है कि आपूर्ति शृंखला के वितरकों के पास स्टॉक में साल दर साल आधार पर 30 से 40 फीसदी बढ़ोतरी का अनुमान है। इसकी मुख्य वजह किसानों को खरीफ फसलों के दाम न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम मिलने के कारण ग्रामीण क्षेत्र में मंदी है। स्टॉक में इतनी भारी बढ़ोतरी से आगामी तिमाहियों में कृषि इनपुट कंपनियों की बिक्री और आमदनी पर दबाव बढ़ सकता है। इस साल रबी सीजन की फसलों के रकबे और उत्पादन में गिरावट का अनुमान है, इसलिए कृषि उत्पाद कंपनियों के पास अपने वितरकों की तरफ से बहुत सा माल वापस आया है। इस रबी सीजन की शेष अवधि के दौरान बहुत अधिक माल वापस नहीं होने के आसार हैं, इसलिए आगामी खरीफ सीजन के दौरान बिक्री कम रह सकती है। हालांकि बहुत कुछ 2019 सीजन में मॉनसून की बारिश पर निर्भर करेगा। 
 
एमके ग्लोबल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषक अमर मौर्य ने कहा, 'बिके माल की ज्यादा वापसी, कीमत में सीमित बढ़ोतरी (4 फीसदी) और बिक्री वृद्धि में 6 फीसदी गिरावट का तिमाही के दौरान प्रदर्शन पर असर पड़ेगा। कंपनी प्रबंधन ने वितरकों के पास स्टॉक सालाना आधार पर 30 से 40 फीसदी तक अधिक होने की बात कही है।' घरेलू बाजार पर केंद्रित कृषि उत्पाद कंपनियों का एबिटा मार्जिन आगामी कुछ तिमाहियों में कम रहने का अनुमान है। कृषि मंत्रालय के आंकड़े दर्शाते हैं कि 15 फरवरी, 2019 तक फसली रकबा 4 फीसदी घटकर 617.8 लाख हेक्टेयर रहा है, जो पिछले साल की इसी अवधि तक 643.6 लाख हेक्टेयर था। प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में मिट्टी में नमी के कारण गेहूं का रकबा 0.46 फीसदी घटकर 298.4 लाख हेक्टेयर रहा है। इसी तरह चालू सीजन में चावल और दलहन का रकबा क्रमश: 14.33 फीसदी और 5.91 फीसदी घटकर 36.4 लाख हेक्टेयर 166.1 लाख हेक्टेयर रहा है। यह पिछले साल रबी सीजन में 39.6 लाख हेक्टेयर और 166.1 लाख हेक्टेयर था। 
 
बेयर और मोनसैंटो जैसी कंपनियां अपने विविधीकृत उत्पादों के कारण बेहतर स्थिति में हैं। बेयर का हरियाणा और पंजाब में दांव बहुत अच्छा रहा है। कंपनी द्वारा दिसंबर तिमाही में पेश ब्रांडों- लुसीफर और एटलांटिस की सीजन के दौरान 100 फीसदी बिक्री हो गई। वहीं नाटिवो और सोलोमोन जैसे उत्पादों का स्टॉक 70 से 80 फीसदी बिकने का अनुमान है। कंपनी के सभी उत्पादों में से करीब 10 फीसदी माल के वापस आने का अनुमान है।  बाटलीवाला ऐंड कारानी सिक्योरिटीज के एक विश्लेषक रंजीत चिरुमल्ला ने कहा, 'पहले हर बाजार में बेयर के खुद के वितरक होते थे और इसलिए साझेदारों का पर्याप्त माल बिके बिना ही स्टॉक की डंपिंग करना आसान था। अब स्टॉकिस्ट सीधे डीलरों को माल की आपूर्ति करते हैं। इससे डंपिंग से बचने और बेहतर बिक्री करने में मदद मिली है।' इस बीच पंजाब और तमिलनाडु जैसे राज्यों में कपास में कृषि रसायनों का इस्तेमाल बढ़ा है। इसमें एक बार छिड़काव करने की लागत 600 से 700 रुपये प्रति एकड़ आती है। 
Keyword: agri, farmer, crop, monsoon,,
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