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आईपीओ में यूपीआई के इस्तेमाल में मुश्किल

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई February 26, 2019

सूचीबद्धता का समय घटाने के लिए बाजार नियामक सेबी की तरफ से भुगतान की नई व्यवस्था लागू करने में शुरुआती दिक्कतें हो रही हैं। जनवरी 2019 से सेबी ने खुदरा निवेशकों को आरंभिक सार्वजनिक निर्गम के लिए भुगतान यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस यानी यूपीआई से करने की अनुमति दी है। अभी यूपीआई से भुगतान का विकल्प अस्बा (ऐप्लिकेशन सर्पोर्टेड बाइ ब्लॉक्ड अमाउंट) के साथ-साथ स्वैच्छिक है। अभी करीब 60 बैंक अस्बा की सुविधा मुहैया करा रहे हैं, सिर्फ तीन बैंकों ने भुगतान के लिए यूपीआई को अपनाया है।
 
सूत्रों ने कहा कि आरंभिक सार्वजनिग निर्गम के लिए यूपीआई अपनाने में तेजी लाने की खातिर बाजार नियामक ने सभी बैंकों, निवेश बैंकरों और रजिस्ट्रार व ट्रांसफर एजेंटों से संपर्क किया है। लेकिन इस साल बाजार में सिर्फ एक बड़ा आईपीओ बाजार में पेश हुआ है और नई पेशकश आम चुनाव के नतीजे घोषित होने के बीच काफी कम आने की संभावना है। इस वजह से नई व्यवस्था की जांच में सेबी को मुश्किल होगी। शुरू में यूपीआई खुदरा निवेशकों को भुगतान की एक अतिरिक्त जरिये की पेशकश करेगा, जिसके तहत खुदरा आवेदन फॉर्म की सूचना ब्रोकर से बैंक को यूपीआई के जरिये इलेक्ट्रॉनिक तरीके से भेज दी जाएगी। प्रस्तावित प्रक्रिया कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद करेगी, मानवीय हस्तक्षेप की जरूरतें घटाएगी और इश्यू बंद होने व सूचीबद्धता के बीच का समय घटाकर तीन कार्यदिवस कर देगी।
 
उद्योग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, अस्बा की सुविधा वाले सभी 60 बैंक इसका हिस्सा बनने वाले हैं, अभी सिर्फ तीन को ही यूपीआई 2.0 के लिए प्रमाणीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था की प्रभावी जांच तब तक नहीं हो सकती जब तक कि बड़ा आईपीओ बाजार में नहीं उतरेगा। शाले होटल्स (1,641 करोड़ रुपये का आईपीओ) की खुदरा श्रेणी में महज 0.03 गुना आवेदन मिले थे और इस तरह से सिर्फ कुछ हजार आवेदन ही आए थे। सेबी नई व्यवस्था चरणबद्ध तरीके से ला रहा है। पहले चरण में खुदरा निवेशकोंं के लिए इंटरमीडियरीज के जरिए यूपीआई की व्यवस्था मौजूदा प्रक्रिया व मौजूदा टी+6 समयसीमा के साथ प्रभावी बनाई जाएगी (टी का मतलब आईपीओ के बंद होने की तारीख)। यह तीन महीने या बाजार में पांच मुख्य आईपीओ उतरने तक होगा। दूसरे चरण में रकम ब्लॉक करने के लिए इंटरमीडियरीज से स्व-प्रमाणित सिंडिकेट बैंकों तक फॉर्मों को भेजे जाने का काम बंद हो जाएगा और  मौजूदा समयसीमा (टी+6) के साथ सिर्फ यूपीआई की व्यवस्था जारी रहेगी। यह भी तीन महीने या पांच मुख्य आईपीओ पेश होने तक चलेगा। अंतिम चरण में सूचीबद्धता की समयसीमा घटकर तीन दिन रह जाएगी। प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा, आईपीओ बंद होने और सूचीबद्धता के बीच का समय घटाने से उतारचढ़ाव कम करने में मदद मिल सकती है।
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