बिजनेस स्टैंडर्ड - अमेरिका-चीन वार्ता से चढ़ेगा रुपया
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अमेरिका-चीन वार्ता से चढ़ेगा रुपया

अनूप रॉय / मुंबई 02 25, 2019

कारोबारी बात पटरी पर रहने से युआन मजबूत, रुपये को भी लाभ

बिजनेस स्टैंडर्ड अमेरिका-चीन वार्ता से चढ़ेगा रुपया

सुधरेगी अर्थव्यवस्था 

200 अरब डॉलर के चीनी सामान पर शुल्क लगाने की तिथि अमेरिका ने बढ़ाई 

6.68 प्रति डॉलर हो गई है चीन की मुद्रा युआन, मजबूत हुई

युवान की मजबूती से रुपये की मजबूती को लेकर दबाव बन रहा है 

भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 400 अरब डॉलर की ओर बढ़ रहा है

केंद्रीय बैंक रुपये में मजबूती आने पर डॉलर खरीद रहा है 

कारोबारी वार्ता को आधार मिलने के साथ चीन की मुद्रा मजबूत हुई है। इससेे क्षेत्र के उभरते बाजारों में जोखिम कम होने की धारणा बनेगी

अमेरिका और चीन के बीच कारोबारी बातचीत पटरी पर आने के साथ उभरते बाजारों की मुद्रा में मजबूती आने की संभावना है। इससे सबसे ज्यादा फायदा रुपये को हो सकता है। हालांकि आगामी आम चुनावों को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक रुपये की विनिमय दर स्थिर रखने का रुख अपनाया है।  अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने चीन के 200 अरब डॉलर के सामानों पर शुल्क लगाने की अंतिम तिथि बढ़ा दी है और कहा गया है कि दोनों देशों के बीच कारोबारी बातचीत में 'उल्लेखनीय प्रगति' हो रही है। इससे चीन का स्टॉक ऊपर चढ़ा है और वहां की मुद्रा युआन में मजबूती आई है। चीन की स्थिर मुद्रा है, जो डॉलर के मुकाबले 6.68 हो गई है, जो 11 फरवरी को 6.79 प्रति डॉलर थी। 

 

फॉरेक्ससर्व के सीईओ और प्रबंध निदेशक सत्यजित कांजीलाल ने कहा, 'अमेरिका-चीन के बीच कारोबारी वार्ता को आधार मिलने से उभरते बाजारों में जोखिम कम होने की धारणा बनेगी। युआन की मजबूती से भी रुपये की मजबूती को लेकर दबाव बन रहा है।' बहरहाल कांजीलाल ने कहा कि मौजूदा 71 रुपये के स्तर से रुपये की मजबूती 2-3 प्रतिशत तक सीमित रहेगी, क्योंकि चुनाव होने वाले हैं। साथ ही रुपये की मजबूती से भारत को मध्यावधि के हिसाब से फायदा नहीं होगा।

कांजीलाल ने कहा, 'इस सरकार का मकसद विनिमय दर में स्थिरता बनाए रखने का लग रहा है, रुपये की मजबूती नहीं। इससे कारोबार को मदद मिलती है और प्रतिस्पर्धा क्षमता आती है। अगर कोई बदलाव होता है तो उसका इस्तेमाल भंडार बनाने में किया जा सकता है।' भारत का विदेशी मुद्रा भंडार धीरे धीरे 400 अरब डॉलर की ओर बढ़ रहा है, लेकिन यह पिछले साल के अप्रैल के मध्य के 426.08 अरब रुपये की तुलना में अभी भी 26 अरब डॉलर कम है। वहीं करेंसी डीलरों का कहना है कि रिजर्व बैंक रुपये को मौजूदा स्तर के आसपास बनाए रखने के लिए हस्तक्षेप कर रहा है। केंद्रीय बैंक रुपये में मजबूती आने पर डॉलर खरीद रहा है और यह रणनीति सोमवार को अपनाई गई साथ ही स्थानीय मुद्रा को मजबूदी देने के डॉलर बेच रहा है, जब विदेशी पोर्टफोलियो फंडों की निकासी हो रही है। आईएफए ग्लोबल के सीईओ और प्रबंध निदेशक अभिषेक गोयनका ने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि रुपया इस स्तर से ज्यादा मजबूत होगा। यह 70.50 से 72 के बीच में रहेगा, क्योंकि रिजर्व बैंक दोनों हिसाब से काम कर रहा है।'  

गोयनका ने कहा कि आगामी चुनाव के अलावा तेल की कीमतों में फिर से तेजी शुरू हो गई है और यह रुपये की मजबूती के हिसाब से नुकसानदेह है। इसके अलावा पाकिस्तान को लेकर तनाव का भी बाजार पर असर पड़ रहा है। एक अन्य महत्त्वपूर्ण मसला, जिसपर करेंसी डीलर नजर रख रहे हैं, अमेरिका और चीन के बीच सकारात्मक बातचीत है। इसका असर भारत के रुपये के अलावा अन्य क्षेत्रीय मुद्राओं पर भी पड़ेगा। मेकलई फाइनैंशियल्स में करेंसी डीलर रितेश भंसाली ने कहा, 'इंडोनेशिया में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश हो रहा है, जिससे रुपिया को मजबूती मिल रही है। चुनाव खत्म होने के पहले रुपया अन्य देशों की मुद्रा से बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सकता।' 

भंसाली ने कहा कि रुपये में ज्यादा बदलाव हो सकता था लेकिन तेल के दाम में तेजी इसमें व्यवधान बन रहा है। अमेरिका-चीन बातचीत के बाद ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स पहले की बंदी की तुलना में 0.2 प्रतिशत बढ़कर 67.26 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। इसके साथ ही चीन और अन्य उभरते बाजार वैश्विक वृद्धि में अहम भूमिका निभा सकते हैं और भारत को इसका लाभ मिलेगा। मॉर्गन स्टैनली के मुताबिक पहली तिमाही से वैश्विक वृद्धि में सुधार शुरू होगा, जिसका नेतृत्व उभरते बाजार करेंगे। मॉर्गन स्टैनली ने कहा, 'फेड की सख्ती, कारोबारी तनाव बढऩे और चीन की वृद्धि सुस्त होने का हाल के छोटे दौर पर असर पड़ा है। बहरहाल अब सही दिशा में बदलाव हो रहा है।' 

उभरते बाजारों में रुपये का प्रदर्शन खराब रहा है, लेकिन धीरे धीरे रिकवरी शुरू हो गई है। दिसंबर तिमाही में जब अन्य उभरते बाजारों की मुद्रा मजबूत हो रही थी तो भारत की मुद्रा में गिरावट आई। 28 सितंबर से अब तक रुपया 2.1 प्रतिशत मजबूत हुआ है जबकि तुर्की की मुद्रा लीरा में 14 प्रतिशत की मजबूती आई है। वहीं इंडोनेशियाई रुपिया 6.3 प्रतिशत मजबूत हुआ है। बहरहाल इसी अवधि के दौरान दक्षिण कोरिया की मुद्रा एक प्रतिशत गिरी है। 

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