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ट्रिब्यूनल की इजाजत के बिना आईएलऐंडएफएस एनपीए नहीं

आशिष आर्यन / नई दिल्ली February 25, 2019

नैशनल कंपनी लॉ अपीली ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) ने सोमवार को कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस) और उसकी सहायक इकाइयों के खातों को बैंकों द्वारा अब ट्रिब्यूनल की मंजूरी लिए बगैर गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के तौर पर घोषित नहीं किया जा सकेगा। न्यायमूर्ति एस जे मुखोपाध्याय के नेतृत्व वाले दो न्यायाधीशों के पीठ ने अपने आदेश में कहा, 'हमने यह स्पष्टï कर दिया है कि इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंए ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज या उसकी इकाइयों (एंबर कंपनियां शामिल) पर बकाया ऋणों को अब कोई भी बैंक या वित्तीय संस्थान इस अपीली ट्रिब्यूनल की पूर्व मंजूरी लिए बगैर 'एनपीए' में नहीं डाल सकेगा।' 
 
एंबर श्रेणी के तहत कुछ खास कंपनियों के ऋणदाताओं द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए दो न्यायाधीशों के पीठ ने पाया कि यह कदम आईएलऐंडएफएस के नए बोर्ड द्वारा पेश समाधान योजना के हित में है।  11 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और आईएलऐंडएफएस के नए बोर्ड ने तीन श्रेणियों के विवरण वाला हलफनामा सौंपा था, जिनमें ग्रीन, एंबर और रेड श्रेणियां शामिल थीं। आईएलऐंडएफएस और उसकी घरेलू सहायक कंपनियों को इन तीन श्रेणियों के तहत रखा गया है। भारत में आईएलऐंडएफएस समूह की 169 में से 69 कंपनियों को ऋण चुकाने की उनकी क्षमता के आधार पर इन तीन श्रेणियों में रखा गया है। 
 
जो कंपनियां मौजूदा समय में मजबूत निवेश पूंजी से संपन्न है और उनके पास अपनी ऋण देनदारियों के लिए पर्याप्त नकद प्रवाह है, उन्हें ग्रीन श्रेणी में, जबकि वित्तीय लेनदारों को कर्ज अदायगी में विफल रहने वाली कंपनियों को रेड श्रेणी में शामिल किया गया है। तीसरी श्रेणी एंबर कंपनियों की है जिनमें सुरक्षित लेनदारों के कर्ज लौटाने के लिए पर्याप्त नकदी प्रवाह से संपन्न, लेकिन असुरक्षित लेनदारों की शर्तों को पूरा करने में विफल रहने वाली कंपनियां शामिल हैं।  ग्रीन श्रेणी में शामिल कंपनियों को एनसीएलएटी द्वारा अपने ऋण चुकाने की अनुमति दी गई है। ट्रिब्यूनल ने 11 फरवरी की सुनवाई के दौरान समाधान प्रक्रिया की निगरानी के लिए सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व जज डी के जैन की नियुक्ति को भी सहमति प्रदान की थी। 
 
आईएलऐंडएफएस की सहायक कंपनियों में जहां 170 घरेलू कंपनियां हैं, वहीं लगभग 133 कंपनियां भारत से बाहर स्थित हैं। पिछली सुनवाई में एनसीएलएटी ने इन कंपनियों की समाधान योजना को अनुमति दी थी।  कंपनी मामलों के मंत्रालय द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए 15 अक्टूबर को एनसीएलएटी ने आईएलऐंडएफएस और उसकी 348 समूह कंपनियों के खिलाफ सभी तरह की कार्यवाही पर नए आदेश तक रोक लगा दी थी।  अपीली ट्रिब्यूनल ने आईएलऐंडएफएस और उसकी समूह कंपनियों द्वारा किसी तरह के आवधिक ऋण, कॉरपोरेट ऋण, ब्रिज लोन, वाणिज्यिक पत्र, डिबेंचर, सावधि जमा जैसी गतिविधि से अस्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया। 
Keyword: IL&FS, fund, share, LIC, sidbi, इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंस सर्विसेज,
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