बिजनेस स्टैंडर्ड - मकान खरीदारों को जीएसटी में राहत
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मकान खरीदारों को जीएसटी में राहत

अभिषेक वाघमारे / नई दिल्ली 02 24, 2019

वस्तु एवं सेवा कर परिषद की बैठक

परिषद की बैठक में निर्माणाधीन मकानों पर जीएसटी दर में कटौती का निर्णय
निर्माणाधीन मकानों पर जीएसटी 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया
किफायती मकानों पर जीएसटी दर 8 फीसदी से घटाकर 1 फीसदी किया
दोनों मामलों में बिल्डरों को नहीं मिलेगा इनपुट क्रेडिट का लाभ
किफायती श्रेणी के मकानों की परिभाषा में भी किया बदलाव
नई दरें 1 अप्रैल, 2019 से होंगी प्रभावी
लॉटरी पर जीएसटी का फैसला टला

बिजनेस स्टैंडर्ड मकान खरीदारों को जीएसटी में राहतवस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने निर्माणाधीन मकानों पर जीएसटी की दर घटाने का आज फैसला किया। सरकार के इस कदम से मकान खरीदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। परिषद की आज की बैठक में 45 लाख रुपये से अधिक कीमत वाले फ्लैटों पर जीएसटी मौजूदा 12 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया गया है। इसी तरह मध्य वर्ग या किफायती निर्माणाधीन मकानों पर भी जीएसटी की दर मौजूदा 8 फीसदी से घटाकर 1 फीसदी कर दी है। नई दरें 1 अप्रैल, 2019 से लागू होगी। हालांकि दोनों ही मामलों में बिल्डर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा नहीं कर सकेंगे।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि आगामी वित्त वर्ष में फ्लैटों के निर्माण की लागत कम होगी। इस फैसले से मकान खरीदारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अधिकांश विशेषज्ञों ने जीएसटी परिषद के इस निर्णय का स्वागत किया है। नाइट फ्रैंक इंडिया प्रॉपर्टी कंसल्टेंट्स के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शिशिर बैजल ने कहा, 'इस निर्णय से मकान खरीदारों को कुल लागत में करीब 4 से 6 फीसदी कम भुगतान करना होगा, जो मकान की श्रेणी पर निर्भर करेगा।'

जेटली ने कहा कि इस कदम से अगले तीन साल में सभी को घर के लक्ष्य को हासिल करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इससे देश में निर्माणाधीन मकानों के निर्माण को बढ़ावा मिलेगा और रियल एस्टेट क्षेत्र में नकदी के प्रवाह में सुधार होगा। जेटली ने कहा कि महानगरों में दो कमरों के मकान (2 बीएचके) को किफायती श्रेणी में रखा गया है, जबकि महानगरों से इतर क्षेत्र में तीन कमरों के मकान इस श्रेणी में आएंगे।

परिषद ने किफायती हाउसिंग की दो परिभाषा अपनाई हैं, जो कारपेट एरिया और लागत पर निर्भर करेंगी। महानगरों में 60 वर्ग मीटर क्षेत्रफल और 45 लाख रुपये से कम लागत वाले मकानों को किफायती मकान की श्रेणी में रखा गया है। महानगरों से इतर इलाकों में 90 वर्ग मीटर और 45 लाख रुपये लागत वाले मकान को किफायती श्रेणी के तौर पर परिभाषित किया गया है। परिभाषा में बिल्ट-अप एरिया या सुपर बिल्ट-अप एरिया को शामिल नहीं किया गया है।

वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'किफायती आवास को बेहद उदार ढंग से परिभाषित किया गया है। छोटे शहरों में करीब 95 फीसदी और महानगरों में करीब एक तिहाई फ्लैट किफायती आवास हैं। इसलिए छोटे शहरों में महत्त्वाकांक्षी वर्ग को निर्माणाधीन फ्लैटों को खरीदने पर केवल एक फीसदी जीएसटी देना होगा।' महानगरों में मुंबई महानगर क्षेत्र, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, बेंगलूरु, हैदराबाद और चेन्नई शामिल हैं। अलबत्ता उद्योग से जुड़े कुछ लोगों ने कहा कि इनपुट टैक्स क्रेडिट व्यवस्था जारी रखने चाहिए। 
Keyword: real estate, property, GST, RERA,,
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