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ऋण माफी, आईएलऐंडएफएस को कर्ज से एसबीआई पर दबाव

श्रीपाद ऑटे /  February 24, 2019

दिसंबर तिमाही में परिसंपत्ति गुणवत्ता और मुनाफे के संदर्भ में प्रगति के बावजूद निवेशकों ने भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के शेयर में कम दिलचस्पी दिखाई है। एसबीआई के तीसरी तिमाही के नतीजों की घोषणा के बाद यह शेयर 1 फरवरी को 10.5 प्रतिशत लुढ़क गया था। इसने निफ्टी बैंक सूचकांक की तुलना में भी कमजोर प्रदर्शन किया। उस दिन बैंक सूचकांक में 2.3 प्रतिशत की कमजोरी आई थी। पिछली दो लगातार तिमाहियों में सुधार दर्ज किए जाने के बावजूद निवेशक ठोस प्रदर्शन की संभावना तलाश रहे हैं।

 
बैंक के प्रबंधन को आगामी महीनों में आठ खातों से 34,000 करोड़ रुपये की वसूली के साथ फंसे कर्ज में कमी आने का अनुमान है। उसे मार्च 2019 तक सकल एनपीए  दिसंबर 2018 तक के 9 प्रतिशत और 4 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत से नीचे और शुद्घ एनपीए 3 प्रतिशत से नीचे पहुंच जाने का अनुमान है। लेकिन कुछ खातों से दबाव पड़ सकता है और इससे बैंक की अल्पावधि वृद्घि प्रभावित हो सकती है। मैक्वेरी के विश्लेषकों ने संकेत दिया है कि उन्हें आक्रामक परिसंपत्ति गुणवत्ता अनुमान को लेकर एसबीआई की क्षमता पर विश्वास नहीं है क्योंकि बैंक पर उसके कृषि ऋण माफी, डीएचएफएल आईएलऐंडएफएस के एसपीवी के लिए कर्ज जोखिम का पूरा प्रभाव नहीं दिखा है। 
 
कई राज्य सरकारों द्वारा हाल में कृषि ऋण माफी की घोषणा किए जाने से बाजार एसबीआई के बड़े कृषि पोर्टफोलियो को देखते हुए उसके परिसंपत्ति गुणवत्ता दबाव को लेकर चिंतित है। दिसंबर 2018 को, एसबीआई की कृषिगत ऋण बुक कृषि (सहायक गतिविधियां शामिल) क्षेत्र के लिए पूरे बैंकिंग क्षेत्र के कर्ज के 18 प्रतिशत से अधिक थी। इसके अलावा जून 2017 की तिमाही से एसबीआई के कुल सकल एनपीए में कृषि का योगदान 10-12 प्रतिशत रहा है।  इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवायजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम का कहना है कि जैसा कि पहले देखा गया, कृषि ऋण बैंकों के लिए दबाव का कारण नहीं हैं, लेकिन सरकारों द्वारा ऋण पूंजी की प्रतिपूर्ति में विलंब से अस्थायी तौर पर परिसंपत्ति गुणवत्ता दबाव जरूर देखा जा सकता है। 
 
हालांकि बैंक का कहना है कि उसका कृषि संबंधी एनपीए 9-11 प्रतिशत के दायरे में बना रहेगा।  एसबीआई ने दीवान हाउसिंग फाइनैंस (डीएचएफएल) को लगभग 11,000 करोड़ रुपये और आईएलऐंडएफएस एसपीवी को 2,200 करोड़ रुपये का कर्ज दे रखा है। ये दोनों खाते दिसंबर 2018 की तिमाही तक एसबीआई के बहीखाते में शामिल थे। लेकिन डीएचएफएल और आईएलऐंडएफएस की कुछ एसपीवी में समस्याओं को निजी ऋणदाताओं द्वारा एनपीए के तौर पर माना गया। क्रिसिल ने हाल में आईएलऐंडएफएस की कुछ एसपीवी की रेटिंग घटाई है। हालांकि राहत की बात यह है कि एसपीवी चालू हैं और उनके पास नकदी मौजूद है, लेकिन कानूनी सख्ती को देखते हुए उन्होंने भुगतान बंद कर दिया है। एसबीआई के प्रवक्ता ने व्यक्तिगत खातों पर कोई प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है।
 
इसके अलावा, एसबीआई का दिसंबर 2018 तक 31,000 करोड़ रुपये से अधिक का संभावित फंसा कर्ज था। इन सभी उपर्युक्त कारकों का निकट भविष्य में बैंक की पूंजी पर्याप्तता और वृद्घि पर प्रभाव देखा जा सकता है। डीएचएफएल  और कृषि बहीखाते से संभावित एनपीए को छोड़कर, दिसंबर 2018 को शुद्घ एनपीए के समायोजन के साथ दबाव का अन्य संभावित स्रोत एसबीआई की नेटवर्थ का 22 प्रतिशत से अधिक हो सकता है। उसका टियर-1 पूंजी और कुल पूंजी पर्याप्तता अनुपात 10.54 और 12.77 प्रतिशत पर है। इसके अलावा, जमाओं की धीमी वृद्घि पूरे बैंकिंग सेक्टर के लिए एक अन्य चुनौती है। 
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