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सोशल मीडिया पर अंकुश

श्रीजा सेन /  February 24, 2019

पिछले महीने न्यूयॉर्क टाइम्स ने यह खबर प्रकाशित की थी कि फेसबुक अपनी मेसेजिंग ऐप्लीकेशन- फेसबुक मेसेंजर, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम डायरेक्ट की तकनीक को आपस में जोडऩे पर काम कर रही है। इस खबर से निजता और प्रतिस्पर्धा को लेकर चिंताएं सामने आई हैं। भारतीय संदर्भ में देखें तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर फर्जी खबरों की वजह से निगरानी बढ़ी है। फर्जी खबरों के कारण भीड़ की हिंसा और राजनीतिक झुकाव के आधार पक्षपात बढ़ा है। केंद्र सरकार नए नियम बनाने की कोशिश कर रही है, जिनमें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसी मध्यस्थ कंपनियों को सामग्री को पूरी सक्रियता से रोकने के लिए ज्यादा जिम्मेदार बनाया गया है। इन प्रारूप नियमों पर 31 जनवरी, 2019 पर प्रतिक्रियाएं आमंत्रित की गई थीं। विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह के तकनीकी जुड़ाव से निजता और प्रतिस्पर्धा पर गलत असर पड़ेंगे। 

 
बड़ा, मगर नहीं बेहतर
 
फेसबुक के स्वामित्व वाली कंपनियों के मेसेजिंग ऐप्लीकेशंस को तकनीकी रूप से आपस में जोडऩे का मतलब उनके 2.6 अरब वैश्विक ग्राहकों को एकजुट करना होगा। भारत में अकेले व्हाट्सऐप पर ही 20 करोड़ से अधिक सक्रिय मासिक यूजर हैं। तकनीक को आपस में जोड़े जाने से फेसबुक के ग्राहकों की विशाल तादाद न केवल भारत बल्कि पूरे विश्व में होगी। नैशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनैंस ऐंड पॉलिसी में सलाहकार स्मृति पारशीरा ने कहा कि इस समय तीनों मेसेजिंग ऐप्लीकेशन अलग-अलग हैं और हर ऐप्लीकेशन का यूजर केवल उसी प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों से संवाद कर सकता है। हालांकि आपसी जुड़ाव से नेटवर्क के प्रभावों में बढ़ोतरी होगी। उदाहरण के लिए व्हाट्सऐप प्लेटफॉर्म के नए यूजर को यह सेवा इसलिए लुभाएगी क्योंकि इस पर पहले ही बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं। वहीं वर्तमान यूजर को नए यूजर बनने से फायदा होगा। उन्होंने कहा, 'इस प्रस्तावित जुड़ाव से पूरे फेसबुक समूह में इन नेटवर्क का प्रभाव बढ़ेगा, जिसका बाजार में प्रतिस्पर्धा पर असर होगा।'
 
प्रतिस्पर्धा पर असर 
 
भारत में विलय को नियंत्रित करने वाले वर्तमान नियम फेसबुक मेसेंजर, व्हाट्सऐप और इंस्टाग्राम डायरेक्ट के तकनीकी बुनियादी ढांचे के विलय पर लागू होने के आसार नहीं हैं। ट्राईलीगल में पार्टनर और प्रतिस्पर्धी कानून की राष्ट्रीय प्रमुख निशा कौर ओबेराय ने कहा, 'उनकी भारत में कमाई बहुत कम है, इसलिए वे विलय को नियंत्रित करने वाली जांच से बच सकते हैं।' उन्होंने कहा, 'इसके बावजूद भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) संयुक्त कंपनी के खिलाफ दबदबे वाली स्थिति के संभावित दुरुपयोग को लेकर जांच शुरू कर सकता है।' परशीरा ने कहा कि सीसीआई ने अपने 2016 के आदेश में भी उपभोक्ता संवाद ऐप बाजार में व्हाट्सऐप को दबदबे वाली कंपनी पाया था। उन्होंने कहा, 'इससे दबदबे वाली स्थिति के दुरुपयोग जैसे यूजर्स पर अनुचित शर्तें थोपना, विशेष रूप से डेटा संग्रह, उपयोग और साझा नीति को लेकर सवाल भी पैदा होता है। जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूूल में प्रतिस्पर्धा कानून के सहायक प्रोफेसर अविरूप बोस ने कहा, 'प्रतिस्पर्धा और निजता आपस में जुड़े हुए हैं। ऐसे में इस सवाल पर बहस चल रही है कि क्या सीसीआई को निजता का नियामक होना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'डिजिटल बाजार की अहम हिस्सेदारी हासिल करने के लिए डेटा कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है, यह प्रतिस्पर्धा की चिंता है और इसे सीसीआई को हल करना चाहिए।'
 
डेटा सुरक्षा और निजता 
 
निजता को नुकसान एक अन्य मसला है, जिस पर ऐसे जुड़ाव का असर पड़ेगा। विशेष रूप से उस स्थिति में, जब सरकार लोगों की जानकारी मांगेगी। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक अपार गुप्ता ने कहा, 'यह सभी निजी डेटा की एक मास्टर चाबी की तरह है। अगर सभी डेटा को आपस में जोड़ दिया जाता है और सरकार किसी एक स्रोत से सूचनाएं मांगती है तो इससे पूरे देश में बड़ी तादाद में जनता की गिनरानी का तंत्र विकसित होगा।' परशीरा ने कहा, 'व्हाट्सऐप की तरह पूरी एनक्रिप्शन के कारण उस मेटाडेटा से काफी जानकारियां हासिल की जा सकती हैं, जिस तक पहुंचा जा सकता है।' गुप्ता ने कहा कि इस स्तर की एग्रीगेशन से गहरी सूचनाएं और व्यक्तिगत ब्योरा हासिल किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि इस समय यूजर के डेटा और निजता को सुरक्षित बनाने की नियामकीय प्रणाली बहुत सीमित है। गुप्ता ने कहा कि इस समय बहुत बड़ी नियामकीय खाई मौजूद है। डेटा सुरक्षा प्राधिकरण या निजता आयुक्तालय जैसी कोई विशेषज्ञ संस्था नहीं है, जो सूचनाएं मांग सके और पर्याप्त सुरक्षा नियमों को लागू कर सके। गुप्ता ने कहा, 'डेटा सुरक्षा और सूचना निजता से जुड़ी बहुत सी चीजों को अभी वैधानिक नहीं बनाया गया है।' 
Keyword: social media, twitter, facebook,,
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