बिजनेस स्टैंडर्ड - तलाक के साथ कर्ज का भी करें हिसाब
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तलाक के साथ कर्ज का भी करें हिसाब

स्वर्णमी मंडल /  February 24, 2019

अभिषेक और जयिता आम युवा शहरी दंपती की तरह थे। अभी उनके कोई संतान नहीं थी और दोनों अपनी नौकरी में अच्छा कमा रहे थे। लेकिन पांच साल की शादीशुदा जिंदगी के बाद जब उन्होंने अलग होने का फैसला किया तो परेशान करने वाले कई सवाल उनके सामने थे। संपत्तियों का बंटवारा कैसे किया जाए? संपत्तियों के नाम पर अभिषेक और जयिता के पास एक फ्लैट था, एक संयुक्त खाता था और दोनों ने साथ मिलकर कुछ निवेश किया था। उनके सामने जो सवाल था, वह आजकल कई जोड़ों के सामने खड़ा हो जाता है। इसकी वजह तलाक के बढ़ते मामले हैं। खबरों के मुताबिक भारत में पिछले कुछ साल में तलाक के मामले बढ़े हैं। 1980 के दशक में सालाना 5 फीसदी जोड़े अलग होते थे, लेकिन हाल के वर्षों में आंकड़ा 14 फीसदी तक पहुंच गया है।

 
जायदाद का बंटवारा
 
चूंकि अभिषेक और जयिता  का फ्लैट उन दोनों के ही नाम था और दोनों ही होम लोन की मासिक किस्त (ईएमआई) में आधा-आधा योगदान कर रहे थे, इसलिए जॉयीता का भी फ्लैट पर आधा अधिकार था। कलकत्ता उच्च न्यायालय में वकील सुप्रतिम रॉय कहते हैं, 'ऐसे मामलों में यह फैसला करना अहम होता है और किसे संपत्ति का कितना हिस्सा मिलेगा और कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी आपस में कैसे बांटी जाएगी।' सबसे अच्छा तरीका तो यह है कि संपत्ति को बेच दिया जाए, बैंक का बकाया चुका दिया जाए और बचा हुआ पैसा दोनों आपस में बांट लें। दूसरा तरीका यह भी हो सकता है कि अभिषेक पूरा कर्ज अपने सिर पर लें और जॉयीता को फ्लैट के बाजार मूल्य का आधा दे दें। लेकिन इसके लिए कर्ज नए सिरे से लेना यानी रीफाइनैंस कराना पड़ेगा। अगर बैंक के मुताबिक पति यानी अभिषेक की आय के मुताबिक कर्ज की राशि कम होनी चाहिए तो कर्ज चुकाने की अवधि भी बढ़ानी पड़ सकती है।
 
दीपावली और प्रमीत का मामला कुछ अलग है। वे शादी के तीन साल बाद ही अलग हो गए। लेकिन उन्होंने जो मकान खरीदा था, उसकी रजिस्ट्री दीपावली के नाम कराई गई थी ताकि रजिस्ट्री में कम खर्च आए क्योंकि महिलाओं के नाम रजिस्ट्री कराने पर कम शुल्क लगता है। रॉय कहते हैं, 'संपत्ति प्रमीत ने खरीदी है और उसकी पूरी कीमत भी उन्हीं ने चुकाई है, लेकिन कागजों में संपत्ति दीपावली के नाम है। इस मामले में दीपावली ही मालकिन कहलाएंगी और पूरी जायदाद पर उन्हीं का हक होगा। लेकिन अगर प्रमीत अदालत में साबित कर देते हैं कि जायदाद चाहे पत्नी के नाम हो, उसे खरीदा खुद उनकी रकम से गया है तो वह जायदाद पर दावा कर सकते हैं।' इसके लिए अदालत के सामने बैंक के स्टेटमेंट पेश किए जा सकते हैं, जिनमें दिख रहा हो कि मूलधन या किस्तें उन्होंने ही चुकाई हैं। लेकिन अगर जायदाद प्रमीत के नाम होती तो भी उस पर दीपावली का बराबर का हक होता। पत्नी का तो विरासत में मिली जायदाद पर भी बराबर का हक होता है। लेकिन अगर जायदाद पत्नी के नाम नहीं है तो पत्नी को उसमें से कुछ भी नहीं मिलेगा। तीन साल तक मकान अपने पास रखने के बाद अगर उसे बेचा जाता है तो बिक्री से होने वाले पूंजीगत लाभ पर दीर्घकालिक कर लगता है, जो इंडेक्सेशन के बगैर 10 फीसदी और इंडेक्सेशन के साथ 20 फीसदी होता है।
 
संपत्तियों का बंटवारा
 
कई दंपती बचत और निवेश को भी साझा संपत्ति मानते हैं। इसलिए उनके खाते भी संयुक्त होते हैं और निवेश भी संयुक्त होता है। ऐसे निवेश को दोनों के बीच बराबर बांटना होता है। जब पैसे का बंटवारा करना हो तो दिक्कत, झंझट और विवाद से बचने के लिए कुछ उपाय अपनाए जा सकते हैं। सबसे सटीक उपाय शादी के वक्त किया जाने वाला करार है, जिसमें आप सभी शर्तें पहले से तय कर सकते हैं। विवाद के बगैर तलाक की सूरत में इस करार के जरिये दंपती की संपत्तियों और कर्ज का बंटवारा किया जाता है। वित्तीय योजनाकार माणिक सरकार कहते हैं, 'नकद बचत को छोड़ दें तो शेयरों, म्युचुअल फंडों, सावधि जमा तथा एसआईपी में निवेश को आपस में बांटने में कुछ मशक्कत करनी पड़ सकती है। इसका सबसे आसान तरीका तो यही है कि उन्हें भुना लिया जाए और मिली रकम को पति-पत्नी के बीच बांट दिया जाए। जिसने जितना निवेश किया है, उसे उतनी ही रकम दी जा सकती है। लेकिन मियाद पूरी होने से पहले योजना भुनाने या बंद करने का मतलब यह भी है कि आपको प्रतिफल में चोट झेलनी पड़ेगी।'
 
कर्ज का बंटवारा भी जरूरी
 
कर्ज भी बहुत अहम है क्योंकि दंपती की हैसियत या कुल नेट वर्थ में इसे भी शामिल किया जाता है। कई बार ऐसा भी होता है कि तलाक के मामले में अदालत ने पति या पत्नी को जो भी कर्ज निपटाने के लिए कहा है, वह उसमें नाकाम रहता या रहती है। उस सूरत में कर्ज देने वाली संस्था पति या पत्नी में उसे शख्स के पास पहुंच सकती है, जिस पर कर्ज निपटाने की जिम्मेदारी है। संस्था यह नहीं देखती कि कर्ज दोनों ने मिलकर लिया था। अगर आपका जीवनसाथी तलाक के बाद अपने क्रेडिट कार्ड का बकाया नहीं चुकाता/चुकाती है और कार्ड कंपनी आपसे तकादा करती है तो आप क्या करेंगे? आप अदालत का रुख कर सकते हैं और तलाकनामे की शर्तें पूरी करवाने का अनुरोध कर सकते हैं। अगर आपकी कुव्वत है तो कर्ज चुका दीजिए और उसका सबूत अपने पास रखिए। उसके बाद पारिवारिक अदालत के पास जाइए और कर्ज की रकम अपने पति/पत्नी से वापस दिलाने की मांग करिए। कलकत्ता उच्च न्यायालय में वकील आशिक हुसैन की राय है, 'तलाक के कागज तैयार होने से पहले ही ज्यादा से ज्यादा कर्ज चुका दीजिए। इससे धन, कर्ज और संपत्ति का बंटवारा आसान हो जाएगा।' ध्यान रखिए कि बैंक क्रेडिट कार्ड के वास्तविक करारनामे या कर्ज के समझौते को अदालत के आदेश से ज्यादा तवज्जो देते हैं। खुद को कर्ज के बोझ से बचाने के लिए आप सभी कार्ड रद्द करा दीजिए या सभी को अपने नाम पर करा लीजिए। हुसैन कहते हैं, 'अपने जीवनसाथी को कर्ज लेकर आपके मत्थे मढऩे से रोकना है तो संयुक्त क्रेडिट कार्ड और उन पर चढ़े बकाया का पूरा दस्तावेजी ब्योरा अदालत के सामने पेश करें।'
 
संयुक्त ऋण से पीछा छुड़ाएं
 
आवास ऋण और कार ऋण जैसे बड़े कर्ज ज्यादा पेचीदा होते हैं और अक्सर उन्हें बदलकर उस व्यक्ति के नाम कराना पड़ता है, जिसके हिस्से वह संपत्ति आई है। तलाक लेने वाले कई जोड़ों पर संयुक्त ऋण होता है। उन्हें बातचीत के जरिये इसे सुलझाना चाहिए ताकि दोनों में से किसी एक के ही नाम कर्ज रहे। इसके कई फायदे होंगे। जिसका नाम कर्ज से हटेगा, वह खुद कर्ज लेकर नया मकान ले सकेगा। जिसके नाम पर कर्ज रहेगा, उसे अपने पूर्व जीवनसाथी पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। दोनों उस कड़ी को तोड़ सकते हैं, जो उनके क्रेडिट प्रोफाइल को एक साथ जोड़ती है। इसके बाद किसी एक के कर्ज का दूसरे पर बिल्कुल भी असर नहीं पड़ेगा। अगर आपकी हैसियत इतनी नहीं है कि कर्ज आपके नाम हो जाए तो आप 'गारंटर मॉर्गेज' का विकल्प चुन सकते हैं। इसमें आपका कोई करीबी संबंधी गारंटी देता है कि अगर आप कर्ज नहीं चुका पाए तो आपके बदले वह चुकाएगा।
 
धन का बंटवारा
 
विवाह पर महिला को मिले तोहफों का क्या होगा? महिला को तोहफा माता-पिता से मिला हो, ससुराल से मिला हो, दोस्तों से मिला हो या परिचितों से मिला हो, वह उसके 'स्त्रीधन' में शामिल होता है। वित्तीय योजनाकार पंकज मालडे कहते हैं, 'स्त्रीधन हिंदू विवाह अधिनियम का हिस्सा है। पति भी विरासत में मिली संपत्ति विवाह के दौरान पत्नी को स्त्रीधन के रूप में दे सकता है। उसके बाद उस संपत्ति को अदालत में नहीं घसीटा जा सकता क्योंकि उसका मालिकाना हक बदल चुका है और वह केवल पत्नी की हो गई है।' 
 
स्त्रीधन को अक्सर दहेज मान लिया जाता है। लेकिन रॉय बताते हैं, 'इस मामले में दो अलग-अलग मुकदमे देखे जा सकते हैं। भाई शेर जंग सिंह बनाम विरिंदर कौर मामले में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने वर पक्ष से कहा था कि विवाह के दौरान दुल्हन के पक्ष से मिला समूचा सामान उसे लौटाना होगा। रतिभा रानी बनाम सूरज सिंह मामले में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि शिकायतकर्ता का ससुराल पक्ष उस पर अत्याचार कर रहा है और पति के परिवार ने उसका स्त्रीधन देने से इनकार कर दिया है। इस मामले में महिला के पक्ष में फैसला आया था।' उच्चतम न्यायालय ने रश्मि कुमार बनाम महेश कुमार भाड़ा मामले में फैसला किया कि यदि स्त्री बतौर स्त्रीधन मिली संपत्ति अपने पति के भरोसे छोड़ती है और पति बेईमानी से उसमें गड़बड़ करता है तो यह भरोसा तोडऩा माना जाएगा और भारतीय दंड संहिता की धारा 405 के तहत आएगा।
 
विवाह के पहले और उसके दौरान तोहफे में मिली कार, पेंटिंग, कलाकृति, फर्नीचर, बिजली के उपकरण आदि स्त्रीधन में आते हैं। स्टेप अहेड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स के उत्तम कुमार सेन कहते हैं, 'विवाद होने पर दो गवाहों के दस्तखत के साथ तोहफे में मिले सामान की फेहरिस्त पेश कर दावा किया जा सकता है।' पत्नी या पति को विरासत में मिले गहने उसी के होते हैं और दूसरा उन पर दावा नहीं कर सकता। लेकिन पत्नी को सास से मिले गहने उसी के कहलाएंगे। सेन का कहना है, 'मगर पति यदि पत्नी के नाम पर कोई चल संपत्ति खरीदता है और उसे तोहफे में नहीं देता है तो उस पर पत्नी का अधिकार नही ंहोता। इसी तरह वह घर चलाने में हुए खर्च पर दावा नहीं कर सकती।' इसी तरह अगर महिला के माता-पिता विवाह से पहले या बाद में दूल्हे को कोई तोहफा देते हैं तो तोहफा तलाक के बाद वापस नही मांगा जा सकता। यदि महिला तलाक के बाद स्त्रीधन का एक हिस्सा बेचती है तो उससे हुए मुनाफे पर पूंजीगत लाभ कर लगेगा। पति को मिले तोहफों पर भी यही नियम लागू होता है। आप शादी करते समय यह नहीं सोचते हैं कि तलाक भी हो सकता है। लेकिन कुछ साल बाद अगर रिश्ता ठीक से नहीं चल रहा है तो आप तलाक के बारे में सोच सकते हैं। ऐसे में अच्छा यही है कि दंपती वित्तीय योजनाकार से मशविरा करें और अपनी संपत्तियों तथा देनदारियों की सही तस्वीर समझ लें।
Keyword: property, divorce,,
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