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सरकारी बैंकों के पुनरुद्धार में लगेगा समय

अभिजित लेले/एजेंसियां / मुंबई February 22, 2019

सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंकों में पूंजी निवेश से उनके प्रमुख पूंजी आधार में भले ही सुधार होगा और नियामकीय मानदंडों पर खरा उतरना उनके काफी महत्त्वपूर्ण है। लेकिन पूंजी निवेश के बावजूद सरकारी बैंकों के पुनरुद्धार और लाभप्रदता हासिल करने में तीन से पांच तिमाहियों का वक्त लग सकता है। सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बैंक अपने ऋण खाते में विस्तार करना चाहते हैं लेकिन वे काफी सतर्क भी हैं। वे मुख्य तौर पर खुदरा, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रम (कुल मिलाकर आरएएम)क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करेंगे जहां मांग जबरदस्त है और ऋण लेने वालों की तादाद अधिक होने के कारण जोखिम का असर भी सीमित है।
 
सरकार ने घोषणा इस वित्त वर्ष के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के 12 बैंकों में 48,239 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश की घोषणा की है ताकि उन्हें नियामकीय पूंजी जरूरतों को पूरा करने और वृद्धि योजनाओं के वित्त पोषण में मदद मिल सके। ऐसे ही एक ऋणदाता कॉरपोरेशन बैंक मध्यम अवधि में अपने कारोबार (जमा एवं अग्रिम) को बढ़ाकर 4 लाख करोड़ रुपये करने की उम्मीद कर रहा है। कॉरपोरेशन बैंक मार्च के अंत तक भारतीय रिजर्व बैंक की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) की सूची से बाहर हो सकता है। इस बैंक का कारोबार घटकर दिसंबर 2018 के अंत तक 2.95 लाख करोड़ रुपये रह गया जो दिसंबर 2017 में 3.27 लाख करोड़ रुपये रहा था। फिलहाल उसका उधारी बनाम जमा अनुपात 66 फीसदी है।
 
कॉरपोरेशन बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बहीखाते में गिरावट की मुख्य वजह उधारी पर लगाई गई पाबंदियां रहीं। अब ऋण खाते में विस्तार की गुंजाइश होगी और खुदरा, कृषि और सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रम बैंक के प्राथमिकता बरकरार रहेंगे। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने गुरुवार को कहा कि सरकारी बैंकों में पूंजी निवेश में मूल योजना के मुकाबले इजाफा हुआ है क्योंकि बैंकों के पूंजी आधार में गिरावट शुरुआती अनुमानों मुकाबले कहीं अधिक रही है। मूडीज ने एक रिपोर्ट में कहा, 'हालांकि ये बैंक फिलहाल अपने पूर्ण पुनरुद्धार से कोसो दूर हैं क्योंकि बड़े पैमाने पर संकटग्रस्त ऋण बरकरार रहने से लाभप्रदता एवं पूंजी आधार में सुधार की रफ्तार सुस्त रहेगी और उनका ऋण पोर्टफोलियो सीमित रहेगा।' इन बैंकों के पुनरुद्धार में तेजी की राह में सबसे बड़ी बाधा डूबते ऋण के समाधान में सुस्ती और उन परिसंपत्तियों के लिए प्रावधान की रकम है।
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA, PSB,,
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