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म्युचुअल फंड का एयूएम तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य

निकहत हेटावकर और अभिजित लेले / मुंबई February 22, 2019

ऐक्सिस बैंक के नए मुख्य कार्याधिकारी अमिताभ चौधरी निकट भविष्य में अपनी म्युचुअल फंड इकाई की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में तीन गुने की बढ़ोतरी चाहते हैं। दिसंबर 2018 में ऐक्सिस ऐसेट मैनेजमेंट का औसत एयूएम 81,622 करोड़ रुपये था और नए सीईओ चाहते हैं कि यह बढ़कर 2.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच जाए।  बैंक ने इस बढ़ोतरी के लिए तीन से चार साल की समयसीमा तय की है। उन्होंने कहा, एयूएम के लिहाज से बैंक के एमएफ कारोबार का स्थान नौवां है। इस कारोबार में आप तब तक ज्यादा कमाई नहीं कर सकते जब तक कि आप अग्रणी पांच में शामिल न हों, खास तौर से सेबी की तरफ से किए गए बदलाव के बाद। चौधरी चाहते हैं कि यह बढ़ोतरी सतत तरीके से हो।
 
उद्योग की दिग्गज एचडीएफसी एमएफ और आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड का एयूएम क्रमश: 3.55 लाख करोड़ रुपये व 3.08 लाख करोड़ रुपये है। सितंबर में सेबी ने किसी फंड हाउस की तरफ से वसूले जाने वाले कुल खर्च अनुपात की सीमा में कमी की है। इसके चलते फंड कंपनियों की आय घटेगी। चौधरी ने पिछले महीने ऐक्सिस बैंक का दामन थामा है। उनकी योजना ऐक्सिस ऐसेट मैनेजमेंट के साथ-साथ ब्रोकिंग इकाई ऐक्सिस डायरेक्ट में बढ़ोतरी की है। ऐक्सिस एएमसी अपनी योजनाओं का विस्तार करेगी और बिक्री बढ़ाने व अच्छे ग्राहकों को लक्षित करने के लिए बैंक के वितरण चैनल का इस्तेमाल करेगी। चौधरी ने कहा कि बैंक की हर सहायक के पास अपनी तीन से चार साल की परिचालन योजना है।
 
ऐक्सिस एएमसी बैंक और स्कॉर्डर्स समूह का संयुक्त उद्यम है। इसमें ऐक्सिस बैंक की हिस्सेदारी 74.99 फीसदी है जबकि स्कॉर्डर्स की हिस्सेदारी 25 फीसदी है। इसका शुद्ध लाभ 2017-18 में 43.01 करोड़ रुपये रहा जबकि राजस्व 752.51 करोड़ रुपये। इससे पहले 2016-17 में इसका शुद्ध लाभ 56.96 करोड़ रुपये जबकि कुल राजस्व 530.97 करोड़ रुपये रहा था। चौधरी ने कहा, फंड का प्रदर्शन काफी अच्छा है, लेकिन लाभ में सुधार की दरकार है। उन्होंने कहा कि एएमसी का ध्यान फंडों के प्रदर्शन पर केंद्रित था, लेकिन अब इसने अपना ध्यान ज्यादा आक्रामक बनने पर लगाया है।
 
उन्होंने कहा, जब तक कि आप अग्रणी तीन या चार में शामिल नहीं होते, आपको मिलने वाला लाभ सीमित होता है क्योंकि आपको मिलने वाले ग्राहकों की गुणवत्ता थोड़ी कम होती है। इस वजह से लेनदेन भी कम होगा और अंतत: लाभ पर इसका असर दिखेगा।
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