बिजनेस स्टैंडर्ड - फिसल रहा देश का मक्का निर्यात
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फिसल रहा देश का मक्का निर्यात

वीरेंद्र सिंह रावत / लखनऊ February 22, 2019

मक्के के दामों में तीव्र वृद्धि के कारण भारत के निर्यात पर असर पड़ रहा है। पिछले एक साल के दौरान मक्के के दामों में 75-80 प्रतिशत का इजाफा हो चुका है और दाम 12 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 20-21 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच चुके हैं। इसके परिणामस्वरूप स्टार्च और द्रव्य ग्लूकोज की कीमतें भी बढ़ चुकी हैं। स्टार्च तकरीबन 31-32 रुपये प्रति किलोग्राम पर बिक रहा है। भारत में स्टार्च और मूल्य संवर्धित उत्पादों की मांग बहुत अच्छी है, खासकर फार्मा और कपड़ा क्षेत्र में।
 
ऊंची उत्पादन लागत निर्यात को प्रभावित कर रही है। कुछ साल पहले यह फसल के 15 प्रतिशत यानी करीब 20-30 लाख टन हुआ करता था। अब इसमें गिरावट आ गई है। भारतीय स्टार्च के लिए प्रमुख कच्चा माल बिना आनुवंशिक रूप से संशोधित (जीएम) मक्का है। हालांकि आलू का इस्तेमाल भी स्टार्च निर्माण में किया जाता है लेकिन यह सीमित रूप में होता है। वर्ष 2018-19 में मक्का फसल 2.9 करोड़ टन रहने का अनुमान है जो 2015-16 में केवल 2.26 करोड़ टन थी। पोल्ट्री क्षेत्र मक्के का बड़ा उपभोक्ता है। लगभग 60 प्रतिशत मक्का पोल्ट्री और पशु आहार खंड में जाता है तथा 20-25 प्रतिशत भाग औद्योगिक क्षेत्र में मक्का स्टार्च उत्पादन में इस्तेमाल किया जाता है।
 
पिछले साल सामान्य से कम बारिश होने के कारण मक्के के दामों में इजाफा हुआ जिससे निर्यात पर भी असर पड़ा। सह्याद्री स्टार्च ऐंड इंडस्ट्रीज केप्रबंध निदेशक विशाल मजीठिया ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि कम बारिश की वजह से फसल को हुई क्षति और इस सीजन में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) अधिक होने के कारण पिछले 3-4 महीनों में मक्के की कीमतों में लगभग 40 प्रतिशत तक की तेजी आई है। महत्त्वपूर्ण चुनावी वर्ष में किसानों की आमदनी के लिए पिछले साल केंद्र ने 2018-19 के लिए खरीफ वाले मक्के के एमएसपी में 275 रुपये प्रति क्विंटल या 20 प्रतिशत तक इजाफा करते हुए इसे 1,425 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 1,700 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया था। उनका दावा है कि मक्के के अधिक दामों के कारण इसका निर्यात खासतौर पर चीन और तुर्की के साथ प्रतिस्पर्धी नहीं रह गया है। निर्यात में पहले ही 40-50 प्रतिशत तक की गिरावट आ चुकी है। इससे स्थानीय बाजार की अवधारणा प्रभावित हो रही है।
 
अमेरिकी अनाज परिषद के दक्षिण एशिया (भारत, बांग्लादेश और श्रीलंका) के प्रतिनिधि अमित सचदेव ने बताया कि भारतीय पोल्ट्री और स्टार्च उद्योग घरेलू मांग को पूरा करने के लिए शुल्क मुक्त मक्का आयात की अनुमति का इंतजार कर रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र की एमएमटीसी मक्का आयात काआवेदन करने के लिए स्टार्च निर्माताओं समेत स्थानीय भागीदारों को पहले ही परिपत्र जारी कर चुकी है। पिछली बार 2016 में टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) के अंतर्गत शून्य शुल्क दर पर 2,25,000 टन मक्का आयात की अनुमति दी गई थी। हालांकि देश विदेशी मक्का खरीद पर 60 प्रतिशत कर लगाता है और इसकी मक्का निर्यातक के रूप में पहचान है। भारत के मक्का उत्पादन में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात का योगदान 85 प्रतिशत रहता है।
 
हालांकि बड़े भागीदार मूल्य संवर्धित उत्पादों को ध्यान में रखते हुए क्षमता विस्तार कर रहे हैं लेकिन स्टार्च पूंजी प्रधान व्यवसाय नहीं है। उदाहरण के लिए मक्का स्टार्च और इससे निर्मित उत्पादों की बढ़ती मांग पूरी करने के लिए मक्के के प्रमुख स्टार्च निर्माताओं में शुमार सुखजीत स्टार्च ऐंड केमिकल्स एक नए संयंत्र में 125 करोड़ रुपये का निवेश कर रही है। उम्मीद है कि यह इस कैलेंडर वर्ष के भीतर काम करना शुरू कर देगा। देश के विभिन्न स्थानों पर पहले ही इसकी चार उत्पादन इकाइयों का परिचालन हो रहा है। सुखजीत के प्रबंध निदेशक आईके सरदाना ने कहा कि मक्का स्टार्च के बाजार में प्रतिस्पर्धा है लेकिन यह क्षेत्र बढ़ रहा है। घरेलू एफएमसीजी क्षेत्र में बढ़ते समेकन से भी इस क्षेत्र को बढ़ावा मिल रहा है।
Keyword: agri, farmer, crop, maze,,
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