बिजनेस स्टैंडर्ड - गिरवी शेयरों पर करार, आरबीआई सख्त
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गिरवी शेयरों पर करार, आरबीआई सख्त

सोमेश झा / नई दिल्ली 02 21, 2019

आपसी समझौते पर टेढ़ी नजर

गिरवी शेयरों की बिकवाली में देरी करने के लिए कुछ फर्मों ने किए हैं ऋणदाताओं के साथ करार
एडीएजी समूह और एस्सेल समूह ने हाल में किए हैं ऐसे समझौते
आरबीआई इस मामले में नियमों को बना सकता है सख्त

बिजनेस स्टैंडर्ड गिरवी शेयरों पर करार, आरबीआई सख्तभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने गिरवी शेयरों की बिकवाली में देरी करने की खातिर ऋणदाताओं के साथ कंपनियों द्वारा आपसी समझौता करने के हालिया मामलों पर गंभीर आपत्ति जताई है। आरबीआई सूत्रों ने कहा कि केंद्रीय बैंक इस पर करीबी नजर रख रहा है और जरूरत पडऩे पर ऋणदाताओं को कंपनियों के साथ इस तरह के करार करने से रोकने के लिए नियमों को सख्त बना सकता है। सूत्रों ने कहा, 'आरबीआई ने इस तरह के हालिया मामले को गंभीरता से लिया है। केेंद्रीय बैंक इसके नियमों को सख्त बना सकता है जिससे ऋणदाता खास तौर पर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) इस तरह का करार करने के लिए हतोत्साहित होंगी।'

अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले एडीएजी समूह की प्रवर्तक इकाइयों ने हाल ही में ऋणदाताओं के साथ कम से कम 90 फीसदी गिरवी शेयरों को सितंबर तक नहीं बेचने का करार किया था। इससे पहले सुभाष चंद्रा के नेतृत्व वाले एस्सेल समूह ने भी ऋणदाताओं, म्युचुअल फंडों और एनबीएफसी के साथ 30 सितंबर तक के लिए इसी तरह का करार किया था।

सूत्रों ने बताया, 'इमामी के प्रवर्तकों ने समूह की अन्य कंपनियों के कर्ज को कम करने की दिशा में सही तरीके से काम किया जिससे वित्तीय कंपनियों में प्रवर्तकों के गिरवी शेयरों को कम करने में मदद मिली।' इमामी के मामले में इसके प्रवर्तक अग्रवाल और गोयनका परिवार ने अपनी 10 फीसदी हिस्सेदारी 1,600 करोड़ रुपये में बेचकर इमामी सीमेंट, इमामी पावर और समूह की अन्य कंपनियों के कर्ज कम किया। 

अनिल अंबानी समूह ऋणदाताओं को कर्ज अनुबंधन के मुताबिक निर्धारित समय पर मूलधन और ब्याज चुकाएगी। कंपनी ने कहा कि प्रवर्तक स्तर पर नौ ऋणदाता हैं, जिनमें इंडसइंड बैंक, येस बैंक, टेंपलटन एमएफ और डीएचएफएल प्रामेरिका एमएफ शामिल हैं। एडीएजी समूह के प्रवक्ता ने 17 फरवरी को कहा था, 'समझौते के मुताबिक 90 फीसदी ऋणदाता प्रवर्तकों के गिरवी शेयरों की 30 सितंबर तक बिकवाली नहीं करेंगे क्योंकि कंपनी के शेयरों में हाल के दिनों में अप्रत्याशित गिरावट आई है।' एस्सेल समूह ने 3 फरवरी को एक बयान में कहा था कि ऋणदाताओं ने 30 सितंबर तक चूककर्ता घोषित नहीं करने पर औपचारिक सहमति जताई है। 
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