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फेम-2 योजना से घटेगा इलेक्ट्रिक दोपहिया के लिए प्रोत्साहन

शैली सेठ मोहिले / मुंबई February 20, 2019

इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए सरकार की बहुप्रतीक्षित प्रोत्साहन योजना फेम-2 (फास्टर एडॉप्शन ऐंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड ऐंड इलेक्ट्रिक व्हीकल) इलेक्ट्रिक दोपहिया के लिए बाधक हो सकती है। नई योजना में प्रोत्साहन का जुड़ाव बैटरी की पावर से हो सकता है यानी जितनी ज्यादा पावर, उतना ज्यादा प्रोत्साहन। भारतीय सड़कों पर दौड़ रही ज्यादातर इलेक्ट्रिक दोपहिया कम पावर और तेजी से बैटरी चार्जिंग का इस्तेमाल करती है। इसलिए इसे मिलने वाले प्रोत्साहन में तेजी से कमी आने की संभावना है।
 
सूत्रों ने कहा, इस योजना के लिए भारी उद्योग विभाग कैबिनेट नोट का मसौदा तैयार किया है और इसका प्रस्ताव किया है और इसे वित्त वर्ष समाप्त होने से पहले मंजूरी के लिए रखा जा सकता है। दूसरे चरण में 5,500 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ इस योजना में कई तरह के प्रोत्साहन की पेशकश होगी, मसलन विभिन्न तरह की इलेक्ट्रिक व मजबूत हाइब्रिड वाहनों की विभिन्न श्रेणियों के लिए रोड टैक्स, पंजीकरण और पार्किंग शुल्क मेंं छूट। भारी उद्योग विभाग के अधिकारी से इस मसले पर तत्काल टिप्पणी नहीं मिल पाई।
 
फेम योजना भारत सरकार की नैशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन प्लान का हिस्सा है, जिसमें परिकल्पना की गई है कि साल 2030 तक भारत में बिकने वाला एक तिहाई वाहन इलेक्ट्रिक होगा। इस महत्वाकांक्षा को पूरा करने के लिए सरकार विभिन्न योजनाएं व प्रोत्साहन पेश कर रही है ताकि मांग बढ़े। योजना के दूसरे चरण में हालांकि इलेक्ट्रिक दोपहिया के विनिर्माताओं को निराशा हो सकती है क्योंकि इसमें प्रोत्साहन का जुड़ाव बैटरी पावर से किए जाने की बात है। इनमें से ज्यादातर एक किलोवॉट एचआर यानी सिंगल बैटरी वाली है। 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार और करीब 60 किलोमीटर की रेंज वाले ऐसे दोपहिये के लिए प्रोत्साहन मौजूदा 22,000 से घटकर 10,000 रह जाएगी, यानी दोपहिया 12,000 रुपये महंगा हो जाएगा। यह जानकारी इलेक्ट्रिक दोपहिया बनाने वाली एक कंपनी के अधिकारी ने दी। मौजूदा प्रोत्साहन पाने के लिए इलेक्ट्रिक दोपहिया निर्माताओं को ज्यादा बैटरी लगानी होगी, जिससे लागत बढ़ेगी और खरीदारों को रोकेगी। बड़ी बैटरी को बदलने की लागत भी इलेक्ट्रिक वाहन की ओर बढऩे के बारे में सोचने वाले ग्राहकों के लिए भी बाधक होगी।
 
भारत में इलेक्ट्र्कि वाहनों में दोपहिया की काफी हिस्सेदारी है, जो अभी बैटरी परिचालित वाहन के विचार को आगे ही बढ़ा रहा है। वित्त वर्ष 2017-18 में इलेक्ट्रिक दोपहिया की बिक्री एक साल पहले के मुकाबले दोगुनी होकर 54,800 पर प हुंच गई, वहीं इलेक्ट्रिक कार की बिक्री इस अवधि में 2,000 के मुकाबले 1,200 रह गई। यह जानकारी वाहन निर्माताओं से संगठन सायम से मिली। इस बदलाव से चिंतित सायम ने भारी उद्योग विभाग और नीति आयोग को एक नोट भेजा है। नोट में कहा गया है, विनिर्माता और नीति निर्माता इलेक्ट्कि दोपहिया को अफोर्डेबल बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि इसे ज्यादा से ज्यादा लोग अपनाएं, हालांकि फेम-2 इसका उलटा कर सकता है।
 
इलेक्ट्रिक दोपहिया में सबसे ज्यादा लोकप्रिय और बढ़ता हुआ क्षेत्र सिटी स्पीड ई-दोपहिया है, जिसकी रफ्तार 40-45 किलोमीटर प्रति घंटा और दायरा 60-70 किलोमीटर का है। नोट में कहा गया है कि 90 फीसदी दोपहिया ग्राहकों के लिए यह रफ्तार और दायरा पर्याप्त है।
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