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रिश्वत के खुलासे के बाद धीमी पड़ी कॉग्निजेंट

टी ई नरसिम्हन और गिरीश बाबू / चेन्नई February 19, 2019

आईटी सेवा कंपनी कॉग्निजेंट भारत में अपने आगामी क्षमता विस्तार को लेकर सतर्कता बरत रही है। खासकर फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज ऐक्ट (एफसीपीए) के उल्लंघन पर अमेरिकी न्याय विभाग और सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) द्वारा किए गए खुलासे के बाद कंपनी अपनी स्वयं की इकाइयां स्थापित करने के संदर्भ में सतर्कता के साथ कदम उठा रही है। हालांकि नैसडैक में सूचीबद्घ कंपनी देश में किसी नए विस्तार पर विचार नहीं कर रही है और इसके बजाय वह नई मांग को देखते हुए इकाइयों को किराए पर लेने पर ध्यान दे रही है। माना जा रहा है कि वर्ष 2016 में हुए इस रिश्वत घटनाक्रम की वजह से कंपनी में प्रशासन, कानून और संवद्र्घन जैसे क्षेत्रों में लगभग 200-300 लोग नौकरी छोड़कर भी जा चुके हैं। इस बीच, तमिलनाडु में मुख्य विपक्षी पार्टी द्रमुक ने देश के अंदर ही मामले की जांच की मांग कर इसे राजनीतिक मुद्दा बना दिया है।

 
पिछले शुक्रवार को कॉग्निजेंट ने कहा था कि कंपनी एफसीपीए के उल्लंघन के आरोपों की वजह से अमेरिकी न्याय विभाग को लगभग 2.8 करोड़ डॉलर का भुगतान करेगी। कंपनी के दो पूर्व अधिकारियों पर कुछ खास रियल एस्टेट परियोजनाओं की मंजूरी प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए एक निर्माण कंपनी के जरिये भारत में सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने का आरोप है। इस घटनाक्रम से अवगत कुछ सूत्रों का कहना है कि इंजीनियरिंग कंपनी एलऐंडटी के जरिये 36.4 लाख डॉलर की रिश्वत चुकाई गई। एलऐंडटी ने एक ईमेल के जवाब में कहा, हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि लंबे समय तक एलऐंडटी की ग्राहक रही कॉग्निजेंट अमेरिकी न्याय विभाग और सिक्योरिटीज ऐंड एक्सचेंज कमीशन (एसईसी) के साथ मामले के निपटान पर पहुंच चुकी है, जिसमें कंपनी ने भारत की कुछ परियोजनाओं में पीसीपीए के उल्लंघन की बात स्वीकारी थी।
 
हालांकि हम मामला निपटाने के कॉग्निजेंट के फैसले पर टिप्पणी नहीं कर सकते, लेकिन ऐसे किसी सबूत से हम वाकिफ नहीं हैं जो रिश्वत के कथित भुगतान में हमारी भागीदारी का समर्थन करता हो। हम इस बात की पुष्टि करना चाहते हैं कि न तो हम और न ही हमारे कोई कर्मचारी अमेरिकी कार्यवाही में पक्षकार हैं। इस मसले पर हमारे पास टिप्पणी के लिए और कुछ नहीं है। एक सवाल के जवाब में कॉग्निजेंट के प्रवक्ता ने कहा कि इस मामले से संबंधित कोई भी अधिकारी कंपनी से लंबे समय से जुड़ा नहीं रहा है।  कंपनी ने एक बयान में कहा है, 'बोर्ड को इस संभावित गड़बड़ी का पता चलने के दो सप्ताह के अंदर हमने अमेरिकी अधिकारियों को स्वयं इस मामले की जानकारी दी। अमेरिकी अधिकारियों के लिए स्वत:-रिपोर्टिंग लगभग दो साल पहले दी गई थी और हम तब से सरकार के साथ लगातार सहयोग किया है। हमारी ऑडिट समिति जांच के लिए बाहरी वकील से जुड़ी रही। जांच में काफी समय और संसाधन खर्च हुआ।' हालांकि कंपनी ने इसे लेकर कोई बयान देने से इनकार कर दिया है कि रिश्वत मामले की वजह से वह भारत में किसी नई परियोजना पर फिलहाल विचार नहीं कर रही है। इस बीच, द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन ने राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार-निरोधक निदेशालय (डीवीएसी) से कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने सीबीआई, इंटरपोल और अन्य एजेंसियों से भी इस मामले में डीवीएसी की मदद करने को कहा है।
 
कर्मचारियों के लिए कॉग्निजेंट का पत्र
 
आईटी दिग्गज कॉग्निजेंट टेक्नोलॉजी सॉल्युशंस कॉरपोरेशन के वाइस चेयरमैन एवं मुख्य कार्याधिकारी फ्रांसिस्को डिसूजा ने कर्मचारियों को बताया है कि फॉरेन करप्ट प्रैक्टिसेज ऐक्ट (एफसीपीए) के उल्लंघन पर अमेरिकी नियामक के साथ समस्या का निपटान एक सकारात्मक परिणाम है और कंपनी में किसी अवैध और अनुचित कार्रवाई के लिए कोई गुंजाइश नहीं है। एफसीपीए उल्लंघन के आरोपों के निपटान के लिए 2.5 करोड़ डॉलर चुकाने पर कंपनी द्वारा सहमति जताए जाने के तुरंत बाद कर्मचारियों को भेजे गए पत्र में डिसूजा ने कहा कि मामला उसके ग्राहकों के साथ कार्यों से जुड़ा हुआ नहीं है और सेवा गुणवत्ता को लेकर ग्राहकों की उम्मीदों पर प्रभाव नहीं पड़ेगा। घोषणा के दिन ही उन्होंने कहा, 'आज का निर्णय हमारी कंपनी के लिए सकारात्मक है। इन घोषणाओं से हमने इस तरह की समस्या से दूर रहने की दिशा में एक प्रमुख कदम उठाया है। हमने इससे सबक लिया है और आगे भी इसका ध्यान रखेंगे।' 
Keyword: Cognizant, digital, IT,,
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