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प्रवर्तकों के गिरवी शेयर 60 फीसदी बढ़े

जश कृपलानी / मुंबई February 19, 2019

भारतीय कंपनी जगत के प्रवर्तक अपनी प्रमुख व गैर-प्रमुख कारोबारी गतिविधियोंं के वित्त पोषण की खातिर कर्ज जुटाने के लिए शेयरों को गिरवी रखने पर लगातार भरोसा कर रहे हैं। कैपिटालाइन के आंकड़ों के मुताबिक, 2018-19 में प्रवर्तक 1.2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर गिरवी रख चुके हैं, जो पिछले साल के आंकड़े के मुकाबले 60 फीसदी ज्यादा है। साल 2019 में अब तक प्रवर्तकों ने 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर गिरवी रखे हैं। आंकड़ों के इस विश्लेषण में सूचीबद्ध कंपनियों की तरफ से गिरवी के बारे में एक्सचेंज को किए गए खुलासे में बताई गई कीमत को ध्यान में रखा गया है।
 
उद्योग पर नजर रखने वालों ने कहा, स्ट्रक्चर्ड सौदे (जिसमें शेयर के बदले कर्ज शामिल है) के चलते गिरवी शेयरोंं में बढ़ोतरी हुई है। ऐसे सौदे में देसी म्युचुअल फंड सक्रिय भागीदार हैं और इनका निवेश 25,000 करोड़ रुपये से लेकर 30,000 करोड़ रुपये के बीच है। सूत्रों ने कहा कि ऐसे सौदे बाजार नियामक सेबी की जांच के दायरे में हैं, जो बाजार के लिए व्यापक जोखिम के आकलन के लिए बाजार के प्रतिभागियों से बातचीत कर रहा है। प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा, रकम जुटाने के लिए शेयर गिरवी रखना आसान व त्वरित जरिया है, लेकिन यह आदर्श नहीं है। हम प्रवर्तकों के ज्यादा गिरवी शेयरों के जोखिम अभी देख सकते हैं, जिसने इस जरिये का इस्तेमाल कर उधार लेने वालोंं व लेनदारों के लिए संकट खड़ा किया है।
 
गिरवी शेयरों की कीमतों में बढ़ोतरी भी मार्जिन कॉल के चलते हुई होगी, क्योंकि शेयर गिरवी रखने वाली कंपनियों ने भारी बिकवाली देखी है। इक्विनॉमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के प्रबंध निदेशक जी चोकालिंगम ने कहा, कर्ज वाली ज्यादातर कंपनियों ने अपने शेयर की कीमतों में भारी गिरावट देखी है। साथ ही मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों में प्रवर्तकों का गिरवी काफी ज्यादा है। पिछले कुछ महीने में इन शेयरों में 30 से 50 फीसदी तक की गिरावट आई है, जिसमें मार्जिन कॉल निश्चित रूप से उठी होगी। 
 
ये आंकड़े बताते हैं कि मिडकैप व स्मॉलकैप कंपनियों के प्रवर्तकों ने वित्त वर्ष 2019 में 77,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर गिरवी रखे हैं, जो इस अवधि में प्रवर्तकों की तरफ से गिरवी रखे गए शेयरों की कुल कीमत का 62 फीसदी बैठता है। प्रवर्तकों के गिरवी शेयरों में बढ़ोतरी न सिर्फ लेनदारों व उधार लेने वालों के लिए जोखिम पैदा करता है बल्कि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इससे अल्पांश शेयरधारक भी नुकसान की स्थिति में होते हैं। इंस्टिट््यूशनल इन्वेस्टर एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक व प्रबंध निदेशक अमित टंडन ने कहा, प्रवर्तकों के गिरवी शेयरों में बढ़ोतरी से पता चलता है कि प्रवर्तकों की व्यक्तिगत संपत्ति और प्रवर्तकों की सूचीबद्ध कंपनियों में शेयरधारकों की संपत्ति का अंतर कितना धुंधला हो रहा है। भारतीय कंपनी जगत में प्रशासन के मानकों के लिहाज से यह चिंताजनक है।
Keyword: share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
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