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लघु बचत योजनाओं, ईंधन कर से राजकोषीय घाटे को 3.4 फीसदी रखने में मिली मदद

अभिषेक वाघमारे / नई दिल्ली 02 19, 2019

एनएसएसएफ अपने राजकोषीय घाटे का 19.7 फीसदी प्रदान करेगा

कार का इस्तेमाल करने वाले सीएस से लेकर ट्रैक्टर का उपयोग करने वाले किसान तक, हर कोई पेट्रोल या डीजल के रूप में ईंधन का इस्तेमाल करता है

ऐसा करते हुए उन्होंने हर साल सरकार को करीब 2 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व दिया है

यह उपाय राजकोषीय घाटे को कम करने, खर्च और राजस्व में अंतर को 2013-14 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.5 फीसदी से कम कर वित्त वर्ष 2019 में जीडीपी के 3.4 फीसदी पर लाने में कारगर रहा

बिजनेस स्टैंडर्ड लघु बचत योजनाओं, ईंधन कर से राजकोषीय घाटे को 3.4 फीसदी रखने में मिली मददकार उपयोग करने वाला कोई कंपनी सेक्रेटरी, ट्रैक्टर इस्तेमाल करने वाला छोटा किसान, डाकघर में बचत करने वाली नर्स, सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) में खाताधारक एक इंजीनियर किस प्रकार से सरकार को राजकोषीय घाटा कम करने और अतिरिक्त खर्च हेतु उधार लेने के लिए धन मुहैया कराते हैं? ये सभी ईंधन खरीदकर या छोटी बचत योजनाओं में निवेश कर ऐसा करते हैं। कार का इस्तेमाल करने वाले सीएस से लेकर ट्रैक्टर का उपयोग करने वाले किसान तक, हर कोई पेट्रोल या डीजल के रूप में ईंधन का इस्तेमाल करता है। ऐसा करते हुए उन्होंने हर साल सरकार को करीब 2 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व दिया है।

यह उपाय राजकोषीय घाटे को कम करने, खर्च और राजस्व में अंतर को 2013-14 में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 4.5 फीसदी से कम कर वित्त वर्ष 2019 में जीडीपी के 3.4 फीसदी पर लाने में कारगर रहा। साथ ही जो लोग डाकघरों या राष्ट्रीय बचत पत्रों में छोटी बचत करते हैं वे सरकार को आसान, सस्ता ऋण स्रोत प्रदान करते हैं। इसकी सहायता से सरकार को खुले बाजार से रकम उधार लेने की जरूरत कम पड़ती है।

विभिन्न छोटी बचत योजनाओं का समुच्चय राष्ट्रीय लघु बचत कोष (एनएसएसएफ) इस साल सरकार को अपने राजकोषीय घाटे का पांचवां भाग (19.7 फीसदी) प्रदान करेगा, जो कोष की शुरुआत के बाद से अधिकतम राशि है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2019 के अप्रैल से नवंबर के बीच एनएसएसएफ में जमा 40 फीसदी बढ़कर वित्त वर्ष 2018 के 1.5 लाख करोड़ के मुकाबले 2.1 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया।

राजकोषीय घाटे की भरपाई में एनएसएसएफ की हिस्सेदारी साल 2016-17 से 10 फीसदी रही है। अंतरिम बजट के मुताबिक वित्त वर्ष 2020 के लिए भी इसका योगदान 18.5 फीसदी होगा। हालांकि विशेषज्ञों की राय है कि इसके मिले जुले परिणाम होंगे। एक ओर जहां बॉन्ड प्रतिफलों में वृद्घि पर रोक लगेगी, वहीं 10 साल के जी-सेक प्रतिफल अब नीचे रहेंगे। लेकिन इससे बैंकों के जमा पर मिलने वाला लाभ भी हटेगा जिसके परिणामस्वरूप बैंक ऋण महंगे हो जाएंगे। विभिन्न योजनाओं में लघु बचतकर्ताओं को मिलने वाला ब्याज प्रशासित ब्याज दरों के जरिये तय होता है जो किसी खास तिमाही की शुरुआत में सरकारी प्रतिभूतियों की दर तक सीमित होता है और स्प्रेड इसके ऊपर होता है। मौजूदा तिमाही के लिए ज्यादातर सामान्य डाकघर सावधिक जमाओं (मध्यावधि) के लिए यह 7 फीसदी से 7.8 फीसदी के बीच है।  तुलनात्मक रूप से भारतीय स्टेट बैंक में एक वर्ष की सावधिक जमा पर ब्याज दर 6.4 फीसदी है।

एसबीआई समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा, 'छोटी बचत बैंक जमाओं के मुकाबले प्रतिस्पर्धी संपत्ति वर्ग की तरह होती है। जब एनएसएसएफ संग्रह में उछाल आती है यह प्रभावी रूप से बैंकों से जमाओं की निकासी होती है, जिसके चलते बैंकों को जमा दरों में इजाफा करने पर मजबूर होना पड़ता है।' उन्होंने कहा कि बहुत अधिक छोटी जमाएं वाणिज्यिक बैंकों की सेहत के लिए ठीक नहीं है। फिलहाल जहां बैंक द्वारा उधार देने की दर 14.5 फीसदी है वहीं वित्त वर्ष 2019 में जमा वृद्घि दर 9 फीसदी पर अटकी है।

सरकार में शामिल सूत्रों के मुताबिक अब इस ब्याज को सुनिश्चित करने के लिए एनएसएसएफ इस साल सरकार को 8.4 फीसदी की महंगी दरों पर उधार दे रही है। लेकिन इसके बावजूद सरकार ने एनएसएसएफ से 75,000 करोड़ रुपये की वास्तविक योजना से अधिक 1.25 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने का निर्णय किया।  इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा, 'केंद्र सरकार के लिए एनएसएसएफ कोषों को इस्तेमाल करने का दूसरा कोई रास्ता नहीं है खासकर तब जब इससे राज्यों की उधारी कम हुई है। इसे छोटी बचतकर्ताओं को तयशुदा ब्याज दर पर धन लौटाना है।' घोष ने कहा, 'इसके साथ ही बाजार से घटी हुई उधारी जरूरत का प्रतिफलों पर बहुत ही कम असर पड़ेगा और उसे तुलनात्मक रूप से स्थिर रखेगा।'    

सार्वभौम घाटे को कम करने के लिए ऋण सहायता देने के अलावा, यह गरीबों के लिए खाद्य प्रावधानों, सड़क, रेलवे और बिजली जैसे बुनियादी ढांचे के लिए विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक एजेंसियों को नए सिरे से धन आपूर्ति भी करेगी। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि डाकघर बचत जमा और आवर्ती जमा खाते और वरिष्ठ नागरिक बचत योजना खातों में मौजूदा वित्त वर्ष में सर्वाधिक वृद्घि देखी गई। दूसरी तरफ कुल पीपीएफ संग्रह में 14 फीसदी की कमी आई। 

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