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क्लाउड के सहारे मिलेगा पोषण आधारित भोजन

दीपशेखर चौधरी /  February 18, 2019

जब मानसी शर्मा ने जल्दी वजन घटाने की सोची तो उसने कीटो डाइट को अपनाने का निर्णय किया। इसमें कम कार्बोहाइड्रेड, थोड़ा अधिक प्रोटीन और ज्यादा वसा (फैट) वाले आहार शामिल होते हैं। इससे शरीर की वसा जल्दी खत्म होती है। इसके लिए मानसी ने खाना डिलिवरी रसोई 'हेल्थी' को चुना, जो कीटो डाइट के साथ साथ दैनिक आधार पर भोजन की सबस्क्रिप्शन सुविधा देती है। 

वह कहती हैं, 'मैं रोजाना के काम से थक जाती थी और दिल्ली जैसे बड़े शहर में अकेले रहती थी। इसलिए, मेरे लिए रोजाना डाइट के आधार पर भोजन बनाना बहुत मुश्किल था।' हेल्थी, इनरशेफ का हेल्थ फूड ब्रांड है। इनरशेफ एक साझा क्लाउड आधारित रसोई है और इनके कारोबार में बॉम्बे सैंडविच कंपनी, थालीज ऑफ इंडिया, यम यम दिल्ली, यम यम साउथ जैसे ब्रांड शामिल हैं। 

इनरशेफ ने हाल में अपनी बी सीरीज फंडिंग राउंड में 65 लाख डॉलर (करीब 43 करोड़ रुपये) जुटाए हैं। इस राउंड में शामिल निवेशकों में मिसटल्टो, दास कैपिटल, साहा कैपिटल, एमऐंडएस पार्टनर्स और ब्रांड कैपिटल आदि हैं। कंपनी ने अभी तक कुल 1 करोड़ डॉलर की वित्त उगाही की है। 

भोजन बनाने के लिए तैयार सामग्रियां बेचने के लिए वर्ष 2015 में कंपनी की स्थापना हुई थी। कोई भी ग्राहक इनमें से किसी भी बॉक्स को खरीद सकता है और उसमें दी गई विधि द्वारा खुद भोजन बना सकता है। हालांकि कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी राजेश साहनी कहते हैं कि हमें जल्दी ही लगा कि इस तरह की अवधारणा से भारतीय बाजार अभी 10 साल पीछे है। इसलिए उन्होंने कारोबार को साझा क्लाउड किचन मॉडल पर ले जाने का निर्णय लिया। 

संभावनाएं

सलाहकार फर्म रेडसिअर की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में बढ़ती युवा कामगारों की संख्या और आय के चलते भारतीय खाद्य वितरण बाजार सालाना दहाई अंकों में वृद्धि के साथ 2020 तक 36 करोड़ डॉलर को पार कर जाएगा। रिपोर्ट में बताया गया कि समान अवधि में फूड-टेक कारोबार 4 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा। साहनी कहते हैं, 'भोजन के लिए बाहर जाना काफी बोझिल काम है। अगले  पांच साल में घर में अधिकांश भोजन डिलिवरी आधारित होंगे। फूड डिलिवरी क्षेत्र अगले पांच साल में 10 गुना बढ़ेगा और हम इसमें बेहतर काम करेंगे।'

क्लाउड किचन हब ऐंड स्पोक मॉडल के तहत काम करती है जिसमें एक केंद्रीय रसोई में खाना तैयार किया जाता है और ग्राहकों को वितरित किया जाता है। इनके यहां बैठकर खाना खाने की सुविधा नहीं होती। इनरशेफ एक साझा क्लाउड आधारित रसोई है जो विभिन्न ब्रांड को सेवाएं देती है। पिछले कुछ सालों में फ्रेश मेन्यु, फैसो, बॉक्स8 और बिरयानी बाई किलो कुछ क्लाउड आधारित रसोई ब्रांड हैं जो बेंगलूरु, मुंबई, दिल्ली, हैदराबाद, कोलकाता जैसे शहरोंं में अपना कारोबार बढ़ा रहे हैं। 

फूड-टेक स्टार्टअप स्विगी ने भी ऐसी सुविधाएं शुरू की हैं जिसमें वह ऐसी रसोइयों से साझेदारी कर रही हैं जो अपने यहां खाना खाने की सुविधा नहीं देतीं और केवल डिलिवरी पर ही निर्भर हैं। स्विगी न्यू सप्लाई के सीईओ विशाल भाटिया कहते हैं, 'केवल डिलिवरी वाली रसोई रेस्टोरेंट उद्योग का भविष्य होंगी।'

कारोबारी मॉडल 

रेस्टोरेंट कारोबार को उच्च मार्जिन वाला उद्योग माना जाता है। इनरशेफ अकेले 70 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है। हालांकि लोगों का स्वाद बदलता रहता है और वे दूसरे रेस्तरां में जाने लगते हैं। दूसरी ओर, क्लाउड रसोई से भौतिक रूप में कोई ब्रांड नाम नहीं जुड़ा है। 

इनरशेफ और उसके सहयोगी ब्रांड 50 रुपये से लेकर 350 रुपये तक का भोजन उपलब्ध कराते हैं। हैल्थी ऐप की सहायता से खाने का ऑर्डर दे सकते हैं और सात दिनों के लिए खाना सबस्क्राइब कर सकते हैं। अगर कोई व्यक्ति अलग-अलग भोजन को मिक्स करना चाहता है या ऑर्डर रद्द करना चाहता है तो यह भी किया जा सकता है। इसी तरह, प्रत्येक ब्रांड के लिए अलग-अलग वेबसाइट और ऐप हैं जहां से भोजन ऑर्डर किया जा सकता है।  

चुनौतियां 

सत्यमूर्ति कहते हैं कि अलग व्यंजनों और खाने के लिए अलग ब्रांड लेकर आने से इनरशैफ को नुकसान भी हो सकता है। वह आगे कहते हैं कि फ्रेशमेन्यु, बॉक्स8 और ईट.फिट जैसी दूसरी कंपनियों ने भी अच्छी वित्त उगाही की है और ये इनरशैफ के लिए चुनौती हो सकती है। 

वीसी सर्किल की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत की पहला क्लाउड आधारित रसोई यूमिस्ट 190 रुपये के भोजन पर 60 रुपये का सकल काभ कमाने के बाद भी ज्यादा फंडिंग नहीं मिलने के कारण बंद हो गई थी। मिस्टलेटो के विक्टर एनजी इनरशैफ के सामने दो तरह की चुनौती देखते हैं। पहला, इस तरह के कारोबार से संसाधनों की उपलब्धता और दूसरे स्वरूप बदल जाएंगे। इसलिए हो सकता है कि कुछ समय बाद मानव संसाधान या कच्चे माल के लिए भारी प्रतिस्पर्धा हो। दूसरा, सामान की डिलिवरी कर रहे दूसरे स्टार्टअप के लिए इस क्षेत्र में प्रवेश करने में ज्यादा समय नहीं लगेगा।  

आगे की राह

कंपनी अपने 5 शहरों की 25 रसोइयों के लिए 50 प्रतिशत सामग्री एक ही वितरक से लेती है। राजेश शाहनी कहते हैं, 'राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार के लिए हमें आपूर्तिकर्ताओं से साझेदारियां करना जरूरी है।' कंपनी का लक्ष्य अगले दो साल में ब्रेक ईवन प्राप्त करना और 2019 के अंत तक रसोइयों की संख्या 50 पर पहुंचाना है। 
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